
Kerala केरल: पेरियार टाइगर रिज़र्व के वल्लकदावु रेंज में छोड़ा गया एक नर टाइगर एक बार फिर रिहायशी इलाकों के करीब पहुंच गया, जिससे वन विभाग की चिंता बढ़ गई है। यह टाइगर पहले भी स्थानीय क्षेत्रों में पालतू जानवरों पर हमले कर चुका है, जिसके चलते उसे पकड़कर जंगल क्षेत्र में छोड़ा गया था।
जानकारी के अनुसार, लगभग पांच साल का यह नर टाइगर कुछ समय पहले मरयूर के पंबन हिल्स क्षेत्र से पकड़ा गया था। स्थानीय लोगों की शिकायतों के बाद इसे पकड़ा गया था, क्योंकि इसने वहां कई पालतू जानवरों पर हमला किया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मरयूर इलाके में टाइगर द्वारा लगभग 18 पालतू जानवरों को मारने की घटनाएं सामने आई थीं।
इसके बाद वन विभाग ने इस टाइगर को पेरियार टाइगर रिज़र्व के वल्लकदावु रेंज स्थित पांडियन थोडू इलाके में स्थानांतरित कर दिया था, ताकि उसे जंगल के भीतर सुरक्षित रूप से छोड़ा जा सके और मानव बस्तियों से दूरी बनाई जा सके।
हालांकि, हाल की घटनाओं में यह टाइगर फिर से रिहायशी क्षेत्रों के पास देखा गया है। बताया जा रहा है कि इस दौरान उसने एक पालतू जानवर का शिकार भी किया और उसे खाने के बाद वापस जंगल की ओर चला गया। इस घटना ने स्थानीय लोगों में डर का माहौल पैदा कर दिया है।
केरल वन विभाग के अधिकारियों के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण बन गई है, क्योंकि टाइगर लगातार अपने इलाके से बाहर आकर मानव बस्तियों के करीब पहुंच रहा है। वन कर्मी लगातार इसकी गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं और क्षेत्र में गश्त बढ़ा दी गई है।
वन विभाग के अनुसार, टाइगर को पहले सुरक्षित रूप से जंगल में छोड़ा गया था, लेकिन उसके व्यवहार में आक्रामकता और भोजन की तलाश के कारण वह बार-बार बस्तियों के करीब आ रहा है। इस स्थिति को देखते हुए विशेषज्ञों की टीम भी उसकी गतिविधियों का अध्ययन कर रही है।
स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि टाइगर के बार-बार गांवों के पास आने से लोगों में डर बढ़ गया है। लोग अपने मवेशियों और पालतू जानवरों को लेकर चिंतित हैं और शाम के बाद बाहर निकलने से बच रहे हैं।
वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे जंगल के सीमावर्ती क्षेत्रों में सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना दें। साथ ही, प्रभावित क्षेत्रों में अतिरिक्त निगरानी दल तैनात किए गए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और मानव बस्तियों के बीच दूरी बनाए रखना बेहद जरूरी है, ताकि दोनों के बीच टकराव की स्थिति से बचा जा सके।
फिलहाल, यह टाइगर वन विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है और उसकी हर गतिविधि पर कड़ी नजर रखी जा रही है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।





