केरल

Kerala : बीमारी से जंग जीतने वाले शिक्षक पर वेतन कटौती का संकट

Kavita2
17 July 2026 3:13 PM IST
Kerala : बीमारी से जंग जीतने वाले शिक्षक पर वेतन कटौती का संकट
x

कोट्टायम: केरल के कोट्टायम स्थित जीएचएसएस स्कूल के यूपीएसटी शिक्षक K.A. अजेश इन दिनों एक अलग तरह की परेशानी से जूझ रहे हैं। गंभीर बीमारी को मात देने के बाद शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय योगदान दे रहे अजेश के खिलाफ विभागीय स्तर पर की गई कार्रवाई को लेकर शिकायत दर्ज कराई गई है। आरोप है कि जनरल एजुकेशन डिपार्टमेंट ने उनकी वेतन सुरक्षा (सैलरी प्रोटेक्शन) में गैर-कानूनी तरीके से कटौती की है और उनसे पहले प्राप्त वेतन में से 4.66 लाख रुपये की वसूली का आदेश जारी किया गया है।

अजेश की कहानी संघर्ष और समर्पण की मिसाल मानी जाती है। वह ब्रेन ट्यूमर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ चुके हैं। उनकी सर्जरी हुई और इसके बाद उन्हें आठ से अधिक बार गंभीर रेडिएशन ट्रीटमेंट से गुजरना पड़ा। स्वास्थ्य संबंधी कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और शिक्षा के प्रति अपने समर्पण को जारी रखा।

बीमारी से उबरने के बाद अजेश ने बच्चों तक किताबों और ज्ञान को पहुंचाने के उद्देश्य से अपनी मोबाइल लाइब्रेरी ‘बुक कार्ट’ शुरू की। इस पहल के माध्यम से वह छात्रों और आम लोगों में पढ़ने की आदत को बढ़ावा देने का काम कर रहे हैं। उनकी यह पहल शिक्षा के क्षेत्र में एक सकारात्मक प्रयास के रूप में देखी गई है।

अजेश को उनके सामाजिक और शैक्षणिक योगदान के लिए ‘दिव्यांग सर्वश्रेष्ठ सरकारी कर्मचारी’ का राज्य स्तरीय पुरस्कार भी मिल चुका है। यह सम्मान उनके संघर्ष, कार्यक्षमता और समाज के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को देखते हुए दिया गया था।

हालांकि, अब वे वेतन संबंधी विवाद के कारण चर्चा में हैं। शिकायत के अनुसार, विभाग ने उनकी वेतन सुरक्षा व्यवस्था में कटौती की है और उनसे 4.66 लाख रुपये की राशि वापस जमा करने का निर्देश दिया है। अजेश और उनके समर्थकों का कहना है कि यह कार्रवाई नियमों के विपरीत है और इससे एक ऐसे कर्मचारी को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, जिसने गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों के बावजूद अपनी जिम्मेदारियां निभाई हैं।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि विभागीय स्तर पर उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। मामले से जुड़े लोगों का कहना है कि अजेश की चिकित्सा स्थिति, दिव्यांग कर्मचारी के रूप में उनकी परिस्थितियों और उनके सेवा रिकॉर्ड को ध्यान में रखते हुए संवेदनशीलता के साथ निर्णय लिया जाना चाहिए था।

वहीं, शिक्षा विभाग की ओर से इस मामले में आधिकारिक पक्ष का इंतजार है। विभागीय अधिकारी यह स्पष्ट कर सकते हैं कि वेतन निर्धारण और वसूली का आदेश किन नियमों और दस्तावेजों के आधार पर जारी किया गया।

अजेश के मामले ने सरकारी कर्मचारियों के अधिकारों, विशेषकर गंभीर बीमारी और दिव्यांगता से जुड़े मामलों में प्रशासनिक संवेदनशीलता को लेकर चर्चा शुरू कर दी है। शिक्षक संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि ऐसे मामलों में नियमों के साथ-साथ मानवीय पहलुओं पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।

शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि अजेश ने अपनी व्यक्तिगत कठिनाइयों के बावजूद छात्रों के लिए काम करना जारी रखा। मोबाइल लाइब्रेरी ‘बुक कार्ट’ के जरिए वह किताबों को उन लोगों तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं, जहां संसाधनों की कमी है।

स्थानीय स्तर पर भी कई लोग उनके प्रयासों की सराहना करते हैं। उनका मानना है कि बीमारी और उपचार की लंबी प्रक्रिया के बाद भी समाज और शिक्षा के प्रति उनका योगदान प्रेरणादायक है।

फिलहाल मामला विभागीय शिकायत और प्रशासनिक समीक्षा के स्तर पर है। अजेश ने न्याय की उम्मीद जताई है और मांग की है कि उनकी वेतन सुरक्षा और वसूली आदेश की निष्पक्ष समीक्षा की जाए।

यह मामला केवल एक शिक्षक के वेतन विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सवाल भी उठाता है कि गंभीर स्वास्थ्य परिस्थितियों से गुजर चुके और समाज में सकारात्मक योगदान दे रहे कर्मचारियों के मामलों में प्रशासनिक फैसले कितनी संवेदनशीलता से लिए जाते हैं। अब सभी की नजरें विभाग की आगे की कार्रवाई और मामले के समाधान पर टिकी हैं।

Next Story