
Kerala केरल: फिशरीज़ विभाग ने मछली प्रजनन (ब्रीडिंग) सीजन के दौरान अंदरूनी जल क्षेत्रों में होने वाली गैर-कानूनी मछली पकड़ने की गतिविधियों (पोचिंग) पर रोक लगाने के लिए सख्त कदम उठाए हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस अवधि में मछलियों के प्राकृतिक प्रजनन और उनकी आवाजाही को सुरक्षित रखना अत्यंत आवश्यक है, ताकि जल स्रोतों में मछली की संख्या संतुलित बनी रहे।
इनलैंड फिशरीज़ एक्ट के तहत ब्रीडिंग सीजन में मछलियों की प्राकृतिक गतिविधियों में बाधा डालना, और पिंजरे, जाल तथा ट्रैप जैसे प्रतिबंधित साधनों का उपयोग कर मछली पकड़ना पूरी तरह से गैर-कानूनी है। इस कानून का उद्देश्य मीठे पानी की मछलियों के संरक्षण और उनकी घटती संख्या को रोकना है।
विभाग ने चेतावनी दी है कि इस तरह की अवैध गतिविधियों में शामिल पाए जाने वाले व्यक्तियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। नियमों का उल्लंघन करने पर 10,000 रुपये तक का जुर्माना और अधिकतम छह महीने की जेल का प्रावधान है। इसके अलावा अवैध रूप से उपयोग किए गए मछली पकड़ने के उपकरण भी जब्त किए जाएंगे।
फिशरीज़ विभाग के अनुसार, इस समय मछली पकड़ने पर पूर्ण या आंशिक प्रतिबंध लगाया गया है, क्योंकि पोचिंग के कारण मीठे पानी की मछलियों की संख्या में तेजी से गिरावट देखी जा रही है। यदि समय पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो यह स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र और मछली पालन उद्योग दोनों को प्रभावित कर सकता है।
कोट्टायम फिशरीज़ के डिप्टी डायरेक्टर ने जानकारी देते हुए कहा कि विभाग आने वाले दिनों में निरीक्षण (इंस्पेक्शन) अभियान को और तेज करेगा। उन्होंने बताया कि नदियों, झीलों और अन्य अंदरूनी जल स्रोतों पर लगातार निगरानी रखी जाएगी ताकि किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि को रोका जा सके।
उन्होंने यह भी कहा कि विभाग की टीमें विशेष रूप से उन इलाकों में सक्रिय रहेंगी, जहां पहले पोचिंग की शिकायतें मिल चुकी हैं। इसके साथ ही स्थानीय मछुआरों और समुदायों को भी जागरूक किया जा रहा है ताकि वे नियमों का पालन करें और अवैध गतिविधियों की सूचना विभाग को दें।
फिशरीज़ विभाग का मानना है कि सख्त निगरानी और कानून के प्रभावी क्रियान्वयन से मछलियों की प्रजनन प्रक्रिया को सुरक्षित रखा जा सकता है। इससे न केवल जल संसाधनों का संरक्षण होगा, बल्कि भविष्य में मछली उत्पादन भी स्थिर बना रहेगा।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि ब्रीडिंग सीजन में नियमों का पालन सभी के लिए अनिवार्य है और किसी भी प्रकार की लापरवाही या उल्लंघन को गंभीरता से लिया जाएगा।





