
Kerala केरल: चेंगन्नूर और मावेलिक्कारा तालुकों के विभिन्न इलाकों में प्रस्तावित सिल्वरलाइन (K-Rail) परियोजना को लेकर लोगों का विरोध लंबे समय से जारी है। सर्वे के दौरान लगाए गए पीले निशान वाले पत्थरों को लेकर स्थानीय लोगों में गहरी नाराजगी देखी गई, जिसे वे अपनी जमीन और भविष्य से जुड़ी चिंता के रूप में देख रहे हैं।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि जनता के कड़े विरोध के बावजूद इन निशान पत्थरों को हटाया नहीं गया, जिससे असंतोष और बढ़ गया। कई जगहों पर लोगों ने इसे जबरन थोपे गए प्रोजेक्ट के रूप में बताया और लगातार विरोध प्रदर्शन किए।
आंदोलन का नेतृत्व करने वाले संगठनों के साथ-साथ कई गृहिणियों और महिलाओं ने भी सड़कों पर उतरकर विरोध दर्ज कराया। आरोप है कि विरोध प्रदर्शनों के दौरान कुछ लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई और कुछ को जेल भी भेजा गया, जिससे स्थिति और तनावपूर्ण हो गई।
विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि सरकार ने उनकी चिंताओं को गंभीरता से नहीं लिया और बार-बार अनुरोध करने के बावजूद परियोजना से जुड़े मुद्दों और कानूनी मामलों को वापस नहीं लिया गया।
इसी बीच, राजनीतिक बदलाव के बाद स्थिति में नया मोड़ देखने को मिला। जब UDF सरकार सत्ता में आई, तो मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने इस मुद्दे को लेकर एक महत्वपूर्ण घोषणा की, जिसके बाद क्षेत्र में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गईं।
घोषणा के बाद चेंगन्नूर के मुलाकुझा, पिरालस्सेरी, कोझुवल्लूर, वेनमणि, नूराडू और पालामेल क्षेत्रों में स्थानीय लोगों और ‘एंटी-K-Rail पीपल्स कमेटी’ ने सरकार का स्वागत करते हुए जोरदार प्रदर्शन किए।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे लंबे समय से अपनी जमीन और जीवनशैली को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे थे और अब उन्हें उम्मीद है कि उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा।
फिलहाल, यह मुद्दा क्षेत्र में राजनीतिक और सामाजिक रूप से संवेदनशील बना हुआ है, और आगे सरकार के निर्णय पर सभी की नजरें टिकी हैं।





