
Kerala केरल: केरल में 10 साल से लगातार बिना बिजली कटौती के चल रहे रिकॉर्ड पर उस समय विराम लग गया जब केरल स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड (KSEB) ने राज्य में आधे घंटे की लोड शेडिंग लागू करने का ऐलान किया। इस फैसले के बाद राज्य में बिजली प्रबंधन और तैयारियों को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।
जानकारी के अनुसार, मौजूदा बिजली संकट को लेकर विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति KSEB की पावर मैनेजमेंट योजना में हुई चूक का परिणाम है। राज्य में गर्मियों के दौरान बिजली की मांग पहले भी बढ़ती रही है और 2024 में भी इसी तरह की स्थिति देखने को मिली थी। इस साल मार्च से ही बारिश कम होने के कारण बिजली की मांग और दबाव बढ़ गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध जैसी वैश्विक परिस्थितियों के चलते एलपीजी की उपलब्धता प्रभावित हुई है, जिससे घरेलू स्तर पर खाना पकाने के लिए इलेक्ट्रिक उपकरणों का उपयोग बढ़ गया है। इससे बिजली की खपत में अचानक वृद्धि देखी गई।
आलोचकों का कहना है कि KSEB के पास ऐसी स्थिति से निपटने के लिए प्रभावी मॉनिटरिंग सिस्टम नहीं है। अनुमान लगाया गया है कि इस गर्मी में बिजली की मांग 6000 मेगावाट से अधिक हो सकती है, जबकि वर्तमान रिकॉर्ड खपत 6033 मेगावाट तक पहुंच चुकी है।
इसके अलावा, बिजली खरीद और सप्लाई प्लानिंग को लेकर भी सवाल उठे हैं। गर्मियों के दौरान बिजली जरूरतों को पूरा करने के लिए किसी बार्टर सिस्टम या वैकल्पिक खरीद व्यवस्था को सक्रिय नहीं किया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि 2025 और 2026 की गर्मियों के लिए पहले से योजना बनाई जाती, तो स्थिति को बेहतर तरीके से संभाला जा सकता था।
बताया गया है कि बाहर से बिजली खरीदने के तीन कॉन्ट्रैक्ट, जिनमें प्रत्येक 200 मेगावाट की आपूर्ति शामिल थी, समय पर रिन्यू नहीं किए गए, जिससे लगभग 600 मेगावाट की उपलब्धता प्रभावित हुई। साथ ही, पावर एक्सचेंज के माध्यम से 90 दिन पहले बिजली बुक करने की सुविधा का भी उपयोग नहीं किया गया।
ट्रांसफॉर्मर क्षमता को समय पर अपग्रेड न करने को भी संकट का एक बड़ा कारण माना जा रहा है। इन सभी कारणों के चलते राज्य की बिजली व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है और लोड शेडिंग जैसी स्थिति उत्पन्न हुई है।
फिलहाल KSEB द्वारा स्थिति को नियंत्रित करने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन इस घटना ने बिजली प्रबंधन की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।





