केरल

केरल खुशी और भलाई को बढ़ावा देने के लिए 'आनंदम' विभाग बनाने की योजना बना रहा है

Tulsi Rao
15 Oct 2026 1:44 PM IST
केरल खुशी और भलाई को बढ़ावा देने के लिए आनंदम विभाग बनाने की योजना बना रहा है
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तिरुवनंतपुरम: केवल आर्थिक पैमानों के बजाय सर्वांगीण कल्याण पर जोर देते हुए, भूटान के चौथे राजा जिग्मे सिंग्ये वांगचुक ने 1972 में पहली बार 'ग्रॉस नेशनल हैप्पीनेस' (GNH) इंडेक्स की परिकल्पना की थी। अब यह विचार केरल में भी अपनी जगह बना रहा है, जहाँ राज्य सरकार 'खुशी विभाग' (डिपार्टमेंट ऑफ हैप्पीनेस) बनाने की योजना बना रही है।

वैश्विक मॉडलों से प्रेरणा लेते हुए, जहाँ प्रगति को मापने में 'हैप्पीनेस इंडेक्स' एक अहम भूमिका निभाता है, राज्य सरकार एक 'खुशी विभाग' स्थापित करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

'आनंदम' नाम का यह नया विभाग, स्थानीय स्वशासन (लोकल सेल्फ गवर्नमेंट) पोर्टफोलियो के अंतर्गत आएगा। लोगों के बीच खुशी फैलाना, खुशहाली को बढ़ावा देना और नई कल्याणकारी व विकास योजनाओं का लोगों की खुशी पर पड़ने वाले असर का आकलन करना, इस नए विभाग के मुख्य कार्य होंगे।

शाजी ने कहा, "आज दुनिया भर में यह सोच बन रही है कि किसी देश की प्रगति को मापने का पैमाना केवल 'ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट' (GDP) नहीं होना चाहिए। इसके बजाय, 'ग्रॉस नेशनल हैप्पीनेस इंडेक्स' को पैमाना माना जाना चाहिए। इंसानों का अंतिम लक्ष्य जीवन में खुशी पाना ही है। इसी अवधारणा के आधार पर, हमने एक नया 'खुशी विभाग' स्थापित करने का फैसला किया है।"

यह विभाग न केवल कल्याणकारी पहलों पर ध्यान देगा, बल्कि विकास कार्यों के जरिए भी खुशहाली को बढ़ावा देगा। उदाहरण के लिए, पंचायतों और अन्य स्थानीय निकायों में ऐसी जगहें (एम्फी कॉर्नर) बनाई जाएंगी, जहाँ लोग इकट्ठा होकर बातचीत कर सकें। मंत्री ने आगे बताया, "इस विभाग के तहत कई तरह की गतिविधियां होंगी, जैसे 'हैप्पीनेस सेंटर' स्थापित करना। फिलहाल, इस नए विभाग को बनाने का काम चल रहा है।"

सामाजिक-राजनीतिक विशेषज्ञों की ओर से इस कदम पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आई हैं। एमजी यूनिवर्सिटी के 'स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज' के निदेशक दिनेसन वी. का मानना ​​है कि, "सिर्फ सरकारी कागजी कार्रवाई या प्रशासनिक कवायद से लोगों के जीवन में खुशी नहीं लाई जा सकती। इसके लिए राज्य को मौजूदा सामाजिक ढांचे पर ध्यान देना होगा।"

उन्होंने कहा कि यह काम एक नए दृष्टिकोण और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल के जरिए ही किया जा सकता है। वहीं, राजनीतिक विश्लेषक सज्जाद इब्राहिम ने कहा कि इस तरह के सतही कदमों से आम लोगों पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा, “हैप्पीनेस इंडेक्स (खुशहाली सूचकांक) मुख्य रूप से एक पश्चिमी अवधारणा है। हम बुनियादी सुरक्षा और कल्याण जैसी अन्य चीजें हासिल करने के बाद ही खुशहाली के बारे में सोचते हैं। जब तक इस दिशा में ठोस प्रयास नहीं किए जाते, तब तक ऐसी पहल केवल दिखावा बनकर रह सकती हैं।” उनका मानना ​​है कि सरकार को अन्य जरूरी सुविधाएं सुनिश्चित करने पर ध्यान देना चाहिए।

इससे पहले की वामपंथी सरकार ने भी हैप्पीनेस इंडेक्स की दिशा में कुछ कदम उठाए थे। स्थानीय स्वशासन विभाग के तहत ‘कुडुम्बश्री हैप्पी केरलम - हैप्पीनेस सेंटर’ इसी तरह की एक पहल थी। वर्तमान CPM राज्य प्रमुख एम.वी. गोविंदन ने, जब वे तलिपरम्बा से विधायक थे, अपने निर्वाचन क्षेत्र में ‘हैप्पीनेस फेस्टिवल’ (खुशहाली उत्सव) आयोजित किए थे।

पिछले महीने UDF सरकार ने मानसिक स्वास्थ्य केंद्रों का नाम बदलकर ‘हैप्पीनेस एंड वेलफेयर सेंटर’ (खुशहाली और कल्याण केंद्र) रखने का फैसला किया। मध्य प्रदेश सरकार देश की पहली ऐसी सरकार थी जिसने 2016 में ‘हैप्पीनेस डिपार्टमेंट’ (खुशहाली विभाग) की स्थापना की थी।

‘आनंदम’

‘आनंदम’ नाम का यह नया विभाग स्थानीय स्वशासन विभाग के अंतर्गत आएगा।

यह विभाग न केवल कल्याणकारी कार्यों पर ध्यान देगा, बल्कि विभिन्न पहलों के जरिए खुशहाली को बढ़ावा देने का भी काम करेगा।

प्रमुख उदाहरण

संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में खुशहाली और भलाई (हैप्पीनेस एंड वेलबीइंग) के लिए एक राज्य मंत्री हैं, वहीं भूटान सरकार ने अपने शासन में ‘ग्रॉस नेशनल हैप्पीनेस’ (GNH) इंडेक्स की अवधारणा को शामिल किया है।

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