केरल

Kerala : स्कूल समय में टिपर लॉरियों की आवाजाही पर नाराजगी

Kavita2
24 Jun 2026 3:41 PM IST
Kerala : स्कूल समय में टिपर लॉरियों की आवाजाही पर नाराजगी
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Kerala केरल: केरल के विभिन्न कस्बों में स्कूल समय के दौरान टिपर लॉरियों की लगातार आवाजाही से स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। सरकार द्वारा निर्धारित नियमों के बावजूद सड़कों पर भारी वाहन बेधड़क चलते देखे जा रहे हैं, जिससे बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता गहराती जा रही है।

सरकारी निर्देशों के अनुसार सुबह 8:30 से 10:00 बजे और दोपहर 3:30 से शाम 5:00 बजे के बीच टिपर लॉरियों के संचालन पर रोक है, ताकि स्कूल आने-जाने के समय बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। लेकिन कोल्लेनगोड, पुथुनागरम और कोडुवायूर जैसे क्षेत्रों में इस आदेश का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस की मौजूदगी के बावजूद स्थिति में कोई खास बदलाव नहीं देखा जा रहा है। स्कूलों के पास से तेज रफ्तार में गुजरती टिपर लॉरियां बच्चों और अभिभावकों के लिए खतरा बनी हुई हैं। कई बार शिकायतें किए जाने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से लोगों में असंतोष बढ़ रहा है।

अभिभावकों का आरोप है कि पुलिस और मोटर वाहन विभाग द्वारा नियम तोड़ने वाली लॉरियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं की जा रही है। इससे सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

पेरेंट्स कोऑर्डिनेशन फोरम के पदाधिकारियों ने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए पुथुनागरम, मुथालामाडा, पल्लासना, कोडुवायूर, कोल्लेनगोड और पनांगत्तिरी क्षेत्रों में स्कूल समय के दौरान चलने वाले टिपरों पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।

फोरम के सदस्यों का कहना है कि कई जगहों पर यह भी देखा गया है कि टिपर लॉरियां पुलिस स्टेशनों के सामने से गुजरती हैं, लेकिन उन्हें रोकने या कार्रवाई करने की बजाय नजरअंदाज किया जाता है। इससे लोगों में यह धारणा बन रही है कि नियमों का पालन कराने में सख्ती की कमी है।

स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से अपील की है कि स्कूल समय के दौरान भारी वाहनों की आवाजाही पर सख्ती से नियंत्रण लगाया जाए और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।

विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूल समय में भारी वाहनों की आवाजाही बच्चों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती है। ऐसे में नियमों का सख्ती से पालन कराना बेहद जरूरी है।

फिलहाल, इस मुद्दे पर प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम सामने नहीं आया है, लेकिन स्थानीय लोगों का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। अभिभावकों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

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