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Kerala : 204 फ्लैटों में बिजली नहीं, आवंटन के बाद भी रहने में दिक्कत

Kavita2
25 Jun 2026 3:25 PM IST
Kerala : 204 फ्लैटों में बिजली नहीं, आवंटन के बाद भी रहने में दिक्कत
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Kerala केरल: केरल में मछुआरा परिवारों के लिए बनाए गए एक बड़े आवासीय प्रोजेक्ट को लेकर विवाद सामने आया है। पेरुवझी क्षेत्र के लाभार्थियों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि सरकार ने जिस आवासीय कॉम्प्लेक्स को तैयार कर चाबियां सौंप दीं, उसमें बुनियादी सुविधाओं की कमी है, जिसके कारण लोग वहां रह नहीं पा रहे हैं।

यह आवासीय परियोजना थोट्टापल्ली मन्नुमपुराट स्थित ‘सफलम भावना कॉम्प्लेक्स’ से जुड़ी है, जिसे विशेष रूप से तटीय क्षेत्रों में रहने वाले मछुआरा परिवारों और उन लोगों के लिए तैयार किया गया था, जो समुद्र के पानी के भराव और बाढ़ जैसी समस्याओं से प्रभावित रहते हैं या जिनके पास अपना पक्का घर नहीं है। इस परियोजना का उद्देश्य ऐसे परिवारों को सुरक्षित और बेहतर आवास उपलब्ध कराना था।

जानकारी के अनुसार, यह फ्लैट कॉम्प्लेक्स लगभग 3 एकड़ 48 सेंट जमीन पर बनाया गया है, जिसे पहले राजस्व विभाग से मत्स्य विभाग को हस्तांतरित किया गया था। इस परियोजना के निर्माण पर करीब 26.5 करोड़ रुपये की लागत आई है। निर्माण कार्य की जिम्मेदारी केरल कोस्टल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन को सौंपी गई थी।

इस आवासीय परिसर में कुल 204 फ्लैट बनाए गए हैं, जिन्हें अंबालाप्पुझा क्षेत्र में भूमिहीन और घरविहीन परिवारों के पुनर्वास के लिए आवंटित किया गया था। इन घरों को मछुआरा समुदाय के उन परिवारों को दिया गया, जो लंबे समय से सुरक्षित आवास की मांग कर रहे थे।

हालांकि परियोजना पूरी होने और लाभार्थियों को चाबियां सौंपे जाने के बावजूद अब यहां रहने को लेकर गंभीर समस्या सामने आ रही है। स्थानीय लोगों और लाभार्थियों का कहना है कि फ्लैटों में बिजली कनेक्शन उपलब्ध नहीं है, जिसके कारण वे वहां शिफ्ट नहीं हो पा रहे हैं।

जानकारी के मुताबिक, इन फ्लैटों को तैयार करते समय कमरों में पंखे, लाइट और पाइपलाइन जैसी बुनियादी सुविधाएं तो लगाई गई थीं, लेकिन बिजली आपूर्ति की व्यवस्था पूरी नहीं की गई। नतीजतन, जिन परिवारों को घरों की चाबियां सौंपी गई थीं, वे अब भी असमंजस की स्थिति में हैं और नए घरों में रहने में असमर्थ हैं।

लाभार्थियों का कहना है कि घर मिलने के बाद उम्मीद थी कि वे जल्द ही सुरक्षित और सुविधाजनक आवास में शिफ्ट हो जाएंगे, लेकिन बिजली की कमी ने इस उम्मीद को रोक दिया है। कई परिवार अभी भी पुराने और असुरक्षित इलाकों में रहने को मजबूर हैं।

स्थानीय स्तर पर यह मुद्दा लगातार उठाया जा रहा है। लोगों का कहना है कि सरकार की इस परियोजना का उद्देश्य सराहनीय था, लेकिन बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण इसका लाभ पूरी तरह नहीं मिल पा रहा है। उनका कहना है कि जब तक बिजली जैसी जरूरी सुविधा उपलब्ध नहीं कराई जाती, तब तक इस आवासीय परिसर का उपयोग संभव नहीं है।

इस मामले को लेकर पेरुवझी क्षेत्र में भी चर्चा तेज हो गई है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब परियोजना पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए और घर तैयार कर दिए गए, तो बिजली कनेक्शन जैसी मूलभूत सुविधा क्यों अधूरी रह गई।

मछुआरा समुदाय के लिए यह परियोजना एक महत्वपूर्ण पुनर्वास योजना के रूप में देखी जा रही थी, क्योंकि यह उन परिवारों को स्थायी आवास देने के उद्देश्य से बनाई गई थी जो प्राकृतिक आपदाओं और समुद्री जलभराव से प्रभावित होते हैं। लेकिन वर्तमान स्थिति ने योजना के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

परियोजना के तहत बनाए गए फ्लैटों में आधुनिक सुविधाओं का दावा किया गया था, लेकिन जमीन पर स्थिति इसके विपरीत नजर आ रही है। लाभार्थियों का कहना है कि केवल चाबियां सौंप देना पर्याप्त नहीं है, जब तक वहां पूरी तरह रहने योग्य माहौल तैयार न हो।

स्थानीय लोगों ने मांग की है कि सरकार और संबंधित विभाग जल्द से जल्द बिजली आपूर्ति की व्यवस्था सुनिश्चित करें, ताकि आवंटित परिवार अपने नए घरों में शिफ्ट हो सकें। उनका कहना है कि यह परियोजना तभी सफल मानी जाएगी जब लोग वास्तव में वहां रहना शुरू करेंगे।

फिलहाल, इस पूरे मामले पर प्रशासन की ओर से आगे की कार्रवाई का इंतजार किया जा रहा है। वहीं, लाभार्थी परिवार अभी भी इस उम्मीद में हैं कि जल्द ही सभी बुनियादी सुविधाएं पूरी कर दी जाएंगी और वे अपने नए घरों में सुरक्षित जीवन शुरू कर पाएंगे।

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