
Kerala केरल: वेंगनूर गांव, जो कभी अपनी प्राकृतिक खूबसूरती, पहाड़ियों, धान के खेतों और शांत वातावरण के लिए जाना जाता था, आज खदानों से जुड़े भारी ट्रकों की लगातार आवाजाही के कारण गंभीर समस्याओं का सामना कर रहा है। गांव के बीचों-बीच दिन-रात दौड़ते ट्रकों ने यहां के वातावरण को प्रभावित किया है, जिससे स्थानीय लोगों का जीवन कठिन हो गया है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, ग्रेनाइट खदानों से जुड़े वाहनों की लगातार आवाजाही से न केवल तेज शोर हो रहा है, बल्कि धूल और प्रदूषण भी बढ़ गया है। ग्रामीणों का कहना है कि हवा की गुणवत्ता इतनी खराब हो चुकी है कि उन्हें सांस लेने में भी परेशानी महसूस होने लगी है। पहले जो क्षेत्र साफ हवा और प्राकृतिक वातावरण के लिए जाना जाता था, वहां अब धूल और धुएं का असर साफ दिखाई देता है।
वेंगनूर गांव अलाथुर शहर के उत्तर दिशा में गायत्री नदी के पार स्थित है। यह इलाका पहाड़ियों और हरे-भरे धान के खेतों से घिरा हुआ था और काफी कम आबादी वाला क्षेत्र माना जाता था। लगभग दो दशक पहले तक यह गांव शांत और प्राकृतिक रूप से समृद्ध था। लेकिन जैसे-जैसे अलाथुर शहर में जनसंख्या बढ़ी और आवासीय दबाव बढ़ा, वैकल्पिक स्थानों की तलाश शुरू हुई।
शहर में बढ़ती भीड़ के कारण कई लोगों ने वेंगनूर गांव को रहने के लिए चुना, क्योंकि यह शहर से केवल लगभग एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और नदी पार करने के बाद आसानी से पहुंचा जा सकता है। धीरे-धीरे यहां आबादी बढ़ने लगी और आवासीय गतिविधियां भी तेज हो गईं। हालांकि, इसी बदलाव के साथ खनन गतिविधियों और भारी वाहनों की आवाजाही भी बढ़ती चली गई।
आज की स्थिति में वेंगनूर गांव केवल एक शांत आवासीय क्षेत्र नहीं रह गया है, बल्कि यह खनन और परिवहन गतिविधियों के दबाव में आ चुका है। गांव के लोग बताते हैं कि दिन और रात लगातार ट्रकों के गुजरने से न केवल शांति भंग होती है, बल्कि सड़क सुरक्षा को लेकर भी खतरा बढ़ गया है। भारी वाहनों की आवाजाही के कारण दुर्घटनाओं की आशंका भी बनी रहती है।
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि पहले जहां वे खुले वातावरण में ताजी हवा लेते थे, वहीं अब धूल के कारण घरों के अंदर भी परेशानी महसूस होती है। बच्चों और बुजुर्गों पर इसका अधिक प्रभाव देखा जा रहा है। कई लोगों ने स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की भी शिकायत की है, हालांकि इस पर कोई आधिकारिक चिकित्सा रिपोर्ट का उल्लेख नहीं है।
वेंगनूर गांव की भौगोलिक स्थिति भी इसे विशेष बनाती है। यह कवासेरी, कुथन्नूर और अलाथुर ग्राम पंचायतों की सीमाओं से जुड़ा हुआ क्षेत्र है। यहां की पहाड़ियों और चट्टानी संरचना के कारण पहले यह इलाका प्राकृतिक रूप से सुरक्षित और कम हस्तक्षेप वाला माना जाता था। लेकिन खनन गतिविधियों के विस्तार ने इस संतुलन को प्रभावित किया है।
ग्रामीणों का कहना है कि खदानों से निकलने वाले ट्रक बिना किसी रुकावट के गांव के मुख्य रास्तों से गुजरते हैं, जिससे सामान्य जनजीवन प्रभावित हो रहा है। स्कूल जाने वाले बच्चों, खेतों में काम करने वाले किसानों और रोजमर्रा की गतिविधियों पर इसका सीधा असर देखा जा रहा है।
स्थानीय लोगों की चिंता यह भी है कि यदि इसी तरह खनन और भारी वाहनों की आवाजाही बढ़ती रही, तो आने वाले समय में गांव का प्राकृतिक स्वरूप पूरी तरह बदल सकता है। उनका मानना है कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है, ताकि ग्रामीण जीवन सुरक्षित और स्वस्थ रह सके।
फिलहाल गांव के लोग इस स्थिति को लेकर अपनी परेशानियां व्यक्त कर रहे हैं और समाधान की उम्मीद कर रहे हैं, ताकि वेंगनूर अपनी पुरानी पहचान—शांत, स्वच्छ और प्राकृतिक वातावरण—को फिर से हासिल कर सके।





