केरल

Kerala: यूनिवर्सिटी कैंपस में ईरानी छात्रा को स्विमिंग पूल इस्तेमाल का अधिकार

Kavita2
24 April 2026 5:56 PM IST
Kerala: यूनिवर्सिटी कैंपस में ईरानी छात्रा को स्विमिंग पूल इस्तेमाल का अधिकार
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Kerala केरल: केरल मानवाधिकार आयोग ने केरल यूनिवर्सिटी के कर्यवट्टम कैंपस में रहने वाली एक ईरानी छात्रा के मामले में महत्वपूर्ण निर्णय दिया है। आयोग के चेयरपर्सन जस्टिस अलेक्जेंडर थॉमस ने स्पष्ट किया कि छात्रा को कैंपस के स्विमिंग पूल का उपयोग करने का पूरा कानूनी अधिकार है और उसे इस सुविधा से वंचित नहीं किया जा सकता।

यह मामला सारा मूसावी नामक ईरानी छात्रा की शिकायत के बाद सामने आया, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि स्विमिंग पूल के प्रभारी ने उनके साथ नस्लभेदी टिप्पणी की थी। शिकायत में यह भी कहा गया कि उन्हें यह बताया गया कि स्विमिंग पूल का उपयोग केवल भारतीय नागरिकों के लिए ही सीमित है, जिससे उनके साथ भेदभाव हुआ।

मानवाधिकार आयोग ने इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए मामले की जांच की और पाया कि इस तरह का प्रतिबंध और व्यवहार मानवाधिकारों के खिलाफ है। आयोग ने अपनी सिफारिश में कहा कि जब शिकायतकर्ता स्विमिंग पूल का उपयोग कर रही हों, तो किसी भी कर्मचारी को अनावश्यक रूप से हस्तक्षेप करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि विदेशी छात्रों के साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव स्वीकार्य नहीं है और शैक्षणिक संस्थानों में समान अधिकार सुनिश्चित किए जाने चाहिए। इसके साथ ही यूथ अफेयर्स डिपार्टमेंट को निर्देश दिया गया है कि वह आवश्यक सुविधाएं और सुरक्षित माहौल सुनिश्चित करे ताकि सभी छात्र बिना किसी भेदभाव के इन सुविधाओं का उपयोग कर सकें।

इस मामले में सिटी पुलिस कमिश्नर ने अपनी रिपोर्ट में यह भी बताया कि असिस्टेंट पुलिस कमिश्नर और SHO ने आयोग द्वारा मांगी गई रिपोर्ट समय पर जमा नहीं की और न ही सुनवाई में उपस्थित हुए। इस पर आयोग ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा जाए और यदि आवश्यक हो तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।

मानवाधिकार आयोग ने इस मामले को संस्थागत जिम्मेदारी और जवाबदेही से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया है। आयोग का कहना है कि सार्वजनिक संस्थानों में काम करने वाले अधिकारियों को अपने कर्तव्यों का पालन गंभीरता से करना चाहिए, विशेषकर तब जब मामला मानवाधिकार और भेदभाव से जुड़ा हो।

इस फैसले के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन और संबंधित विभागों पर यह जिम्मेदारी बढ़ गई है कि वे सभी छात्रों के लिए समान सुविधाएं और निष्पक्ष वातावरण सुनिश्चित करें। यह निर्णय विदेशी छात्रों के अधिकारों और कैंपस में समानता के सिद्धांत को मजबूत करने वाला माना जा रहा है।

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