
Kerala केरल: इडुक्की जिले को रेलवे नेटवर्क से जोड़ने की लंबे समय से चली आ रही उम्मीद एक बार फिर अधर में लटकती नजर आ रही है। अंगमाली-सबरी रेलवे लाइन परियोजना के अगले चरणों में हो रही देरी के कारण इडुक्की के रेल से जुड़ने के सपने को झटका लगा है।
यह परियोजना करीब तीन दशक बाद दोबारा शुरू की गई थी, जिससे स्थानीय लोगों में रेलवे कनेक्टिविटी को लेकर नई उम्मीद जगी थी। पिछली सरकार के कार्यकाल में इस परियोजना को फिर से गति दी गई थी, जब राज्य सरकार ने कुल लागत का लगभग आधा हिस्सा यानी 1900 करोड़ रुपये देने पर सहमति जताई थी।
इस परियोजना के तहत पहले यह घोषणा की गई थी कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को तेज किया जाएगा, ताकि निर्माण कार्य में तेजी लाई जा सके। इसके लिए राज्य के राजस्व विभाग ने 14 मार्च को भूमि अधिग्रहण के लिए प्रारंभिक अधिसूचना (Section 11(1)) भी जारी कर दी थी।
हालांकि, अधिसूचना जारी होने के तीन महीने बाद भी जमीनी स्तर पर स्थिति में कोई खास प्रगति नहीं देखी जा रही है। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि भूमि अधिग्रहण से जुड़े आवश्यक कार्यालय अभी तक स्थापित नहीं किए गए हैं, जिससे प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है।
स्थानीय लोगों और एक्शन काउंसिल के पदाधिकारियों ने इस देरी पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि यदि समय पर कार्यालय और प्रशासनिक ढांचा स्थापित नहीं किया गया तो पूरी परियोजना में और अधिक देरी हो सकती है।
लोगों का मानना है कि यह रेलवे लाइन इडुक्की जैसे पहाड़ी जिले के लिए विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। इससे न केवल आवागमन आसान होगा बल्कि पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, परियोजना में बार-बार होने वाली देरी से लागत बढ़ने का भी खतरा रहता है। साथ ही स्थानीय जनता में निराशा भी बढ़ रही है, जो वर्षों से इस रेलवे कनेक्शन का इंतजार कर रही है।
प्रशासनिक स्तर पर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू होने के बावजूद उसकी धीमी गति ने परियोजना की प्रगति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार और संबंधित विभाग कब तक इस अटकी हुई प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हैं।
इडुक्की के लिए यह रेलवे लाइन केवल एक परिवहन परियोजना नहीं, बल्कि क्षेत्रीय विकास की एक बड़ी उम्मीद मानी जा रही है। लेकिन मौजूदा स्थिति में यह सपना एक बार फिर अनिश्चितता के घेरे में दिखाई दे रहा है।





