
Kerala केरल: देश के कई इलाकों में किसानों के सामने खाद की कमी, बढ़ती कीमतों और नई प्रशासनिक प्रक्रियाओं की चुनौती खड़ी हो गई है। खेती की लागत लगातार बढ़ने के बीच खाद हासिल करने के लिए लागू की गई नई शर्तों ने किसानों की परेशानी और बढ़ा दी है। कई किसान अब कानूनी और प्रक्रियात्मक उलझनों के कारण धान की खेती से दूरी बनाने पर विचार कर रहे हैं।
किसानों का कहना है कि पहले ही महंगे बीज, डीजल, मजदूरी और सिंचाई खर्च ने खेती को मुश्किल बना दिया है। अब खाद खरीदने की जटिल प्रक्रिया और सीमित उपलब्धता ने उनकी चिंता बढ़ा दी है।
खाद लेने के लिए दस्तावेज और ऐप रजिस्ट्रेशन जरूरी
किसानों के अनुसार, अब खाद प्राप्त करने के लिए उन्हें अपने खेत से जुड़े सभी दस्तावेज जमा करने पड़ रहे हैं। इसके अलावा एक विशेष मोबाइल ऐप पर पंजीकरण कराना भी जरूरी किया गया है।
इस प्रक्रिया के कारण कई छोटे और सीमांत किसान परेशान हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में कई किसानों को डिजिटल प्रक्रिया की पूरी जानकारी नहीं है, जिससे उन्हें खाद लेने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
किसानों का कहना है कि खेती के समय खाद की जरूरत तुरंत होती है, लेकिन ऑनलाइन पंजीकरण और दस्तावेजों की प्रक्रिया पूरी करने में समय लग जाता है। इससे फसल प्रभावित होने का डर बना रहता है।
जरूरत के अनुसार खाद नहीं मिलने की शिकायत
किसानों की सबसे बड़ी शिकायत खाद वितरण की नई शर्त को लेकर है। उनका कहना है कि अगर वे अपनी जरूरत के हिसाब से कम मात्रा में खाद के लिए आवेदन करते हैं तो उन्हें खाद नहीं मिलती।
बताया जा रहा है कि किसानों को एक साथ पूरी निर्धारित मात्रा में खाद लेने के लिए कहा जा रहा है। इससे छोटे किसानों के सामने आर्थिक परेशानी खड़ी हो रही है।
कई किसान कहते हैं कि उन्हें एक साथ ज्यादा खाद खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है, जबकि उनकी जरूरत और आर्थिक क्षमता सीमित होती है।
बढ़ती कीमतों ने बढ़ाई मुश्किल
खाद की कीमतों में बढ़ोतरी भी किसानों की परेशानी का बड़ा कारण बन रही है। खेती में पहले से बढ़े खर्च के बीच खाद के लिए अतिरिक्त पैसा जुटाना किसानों के लिए चुनौती बन गया है।
किसानों का कहना है कि धान जैसी फसलों में समय पर खाद देना जरूरी होता है। अगर खाद उपलब्ध न हो या देर से मिले तो उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
धान की खेती से दूरी बना रहे किसान
कई किसानों का कहना है कि लगातार बढ़ती लागत और सरकारी प्रक्रियाओं की जटिलता के कारण धान की खेती करना मुश्किल होता जा रहा है।
कुछ किसान अब ऐसी फसलों की ओर रुख करने पर विचार कर रहे हैं जिनमें लागत कम हो और खाद पर निर्भरता कम रहे।
किसानों का कहना है कि अगर समय पर खाद उपलब्ध नहीं होगी और नियम आसान नहीं किए गए तो आने वाले समय में धान की खेती का क्षेत्र घट सकता है।
किसानों ने की व्यवस्था आसान बनाने की मांग
किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि खाद वितरण की प्रक्रिया को सरल बनाया जाए। उनका कहना है कि छोटे किसानों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए और जरूरत के अनुसार खाद उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
किसानों का सुझाव है कि ऑनलाइन प्रक्रिया के साथ-साथ ऑफलाइन व्यवस्था भी मजबूत की जाए, ताकि तकनीकी जानकारी की कमी वाले किसान भी आसानी से खाद प्राप्त कर सकें।
कृषि व्यवस्था पर असर की आशंका
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि खाद की उपलब्धता खेती के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। अगर किसानों को समय पर खाद नहीं मिलती है तो इसका सीधा असर उत्पादन और किसानों की आय पर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, खाद वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता के साथ-साथ किसानों की वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखना जरूरी है।
किसानों को राहत की उम्मीद
फिलहाल किसान सरकार से उम्मीद कर रहे हैं कि खाद संकट और वितरण से जुड़ी समस्याओं का जल्द समाधान किया जाएगा। उनका कहना है कि खेती को बचाने के लिए जरूरी है कि किसानों को समय पर और उचित कीमत पर खाद उपलब्ध हो।
बढ़ती लागत, कम होती आमदनी और जटिल प्रक्रियाओं के बीच किसान पहले ही कई चुनौतियों से जूझ रहे हैं। ऐसे में खाद की समस्या ने उनकी मुश्किलों को और बढ़ा दिया है।





