
Kerala केरल: एक कॉरपोरेशन के 'फीडिंग रूम' में वर्षों से बंद पड़ी करोड़ों रुपये की टैबलेट्स और पीपी किट (पर्सनल प्रोटेक्टिव किट) मिलने के बाद प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। निरीक्षण के दौरान सामने आया कि बड़ी संख्या में दवाएं और स्वास्थ्य सामग्री लंबे समय से इस्तेमाल के बिना पड़ी थीं और अब खराब हालत में पहुंच चुकी हैं।
जानकारी के अनुसार, कॉरपोरेशन के एक बंद कमरे को जब साफ करने की प्रक्रिया शुरू की गई तो वहां भारी मात्रा में अनुपयोगी सामग्री मिली। बताया गया कि यह कमरा लंबे समय से बंद था और इसमें कचरा जमा हो गया था। जब मेयर ए.के. हफीज ने कमरे की स्थिति देखी तो उन्होंने कर्मचारियों को इसे साफ करने के निर्देश दिए। सफाई के दौरान कमरे से बड़ी संख्या में टैबलेट्स और पीपी किट बरामद हुईं।
बताया जा रहा है कि कमरे में मिली 165 टैबलेट्स पानी से प्रभावित होकर खराब हो चुकी थीं। ये टैबलेट्स बिना इस्तेमाल की हुई थीं और लंबे समय से यहां रखी थीं। अधिकारियों के अनुसार, इन दवाओं को करीब 15 साल या उससे भी पहले खरीदे जाने की संभावना है। हालांकि, इन्हें जरूरतमंदों तक पहुंचाने या उपयोग में लाने के बजाय स्टोर रूम में ही छोड़ दिया गया।
मामला सामने आने के बाद कॉरपोरेशन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य से जुड़ी महत्वपूर्ण सामग्री को इस तरह लापरवाही से रखना गंभीर मामला है। यदि समय रहते इन दवाओं का उपयोग किया जाता तो संभव है कि जरूरतमंद लोगों को इसका लाभ मिल सकता था।
सूत्रों के मुताबिक, यह कॉरपोरेशन लंबे समय तक लेफ्ट पार्टी के शासन में रहा है। अब इस मामले के सामने आने के बाद पूर्व प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, अधिकारियों की ओर से अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि दवाओं की खरीद कब हुई थी और इन्हें उपयोग में क्यों नहीं लाया गया।
मेयर ए.के. हफीज ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित कर्मचारियों से जानकारी मांगी है। उन्होंने यह भी निर्देश दिया है कि कॉरपोरेशन के सभी स्टोर रूम और बंद पड़े स्थानों की जांच की जाए, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं और भी सरकारी सामग्री इसी तरह खराब स्थिति में तो नहीं पड़ी है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में दवाओं और सुरक्षा उपकरणों का महत्व काफी अधिक होता है। विशेषकर महामारी और आपातकालीन परिस्थितियों में पीपी किट जैसी सामग्री की आवश्यकता बढ़ जाती है। ऐसे में बड़ी मात्रा में सामग्री का वर्षों तक उपयोग के बिना खराब हो जाना प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करता है।
अधिकारियों का कहना है कि बरामद सामग्री की जांच कराई जाएगी। यह पता लगाया जाएगा कि टैबलेट्स और पीपी किट कब खरीदी गई थीं, किस विभाग के माध्यम से इनकी खरीद हुई और इन्हें वितरित क्यों नहीं किया गया। जांच के बाद जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की संभावना भी जताई जा रही है।
स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि सरकारी धन से खरीदी गई स्वास्थ्य सामग्री के रखरखाव और वितरण की व्यवस्था को बेहतर बनाया जाए। उनका कहना है कि जनता के पैसे से खरीदी गई वस्तुओं की बर्बादी रोकना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी संस्थानों में स्टॉक प्रबंधन की मजबूत व्यवस्था होनी चाहिए। दवाओं की समय-समय पर जांच, एक्सपायरी डेट की निगरानी और जरूरत के अनुसार वितरण की प्रक्रिया जरूरी है, ताकि संसाधनों का सही उपयोग हो सके।
फिलहाल कॉरपोरेशन प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। बंद कमरे में वर्षों से पड़ी करोड़ों रुपये की सामग्री मिलने की घटना ने न केवल स्टोर प्रबंधन व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि सरकारी संसाधनों के बेहतर उपयोग की जरूरत को भी सामने ला दिया है।





