
Kerala केरल: केरल स्थित पेरियार कडुवा वाइल्डलाइफ़ सैंक्चुअरी में दो दिवसीय इको-रेस्टोरेशन कैंप का आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य जंगल की जैव विविधता (बायोडायवर्सिटी) को खतरा पहुंचाने वाले आक्रामक पौधों को हटाना था। इस अभियान के तहत वन क्षेत्र की प्राकृतिक पारिस्थितिकी को सुरक्षित और संतुलित बनाए रखने पर जोर दिया गया।
इस कार्यक्रम का संचालन एनजीओ ‘अर्थिंग नेचर फाउंडेशन’ की अगुवाई में किया गया। कैंप में पूरे केरल से आए 27 स्वयंसेवकों ने सक्रिय रूप से भाग लिया और जंगल में फैली इनवेसिव प्लांट प्रजातियों को हटाने का काम किया।
कार्यक्रम का उद्घाटन पेरियार टाइगर रिज़र्व की उप निदेशक आर. लक्ष्मी ने किया। उन्होंने इस पहल को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया और कहा कि ऐसे प्रयास जंगल की प्राकृतिक संरचना को बनाए रखने में मदद करते हैं।
अभियान के दौरान स्वयंसेवकों ने जंगल में फैल चुके कई खतरनाक पौधों को हटाया, जिनमें सेना (Senna), यूपेटोरियम (Eupatorium), ब्लडरूट और सिंगापुर डेज़ी शामिल हैं। ये पौधे स्थानीय वनस्पति के विकास में बाधा डालते हैं और वन्यजीवों की खाद्य श्रृंखला (फूड चेन) को भी प्रभावित करते हैं।
अधिकारियों के अनुसार, इन आक्रामक प्रजातियों के कारण देसी पौधों की वृद्धि रुक जाती है, जिससे पूरे पारिस्थितिकी तंत्र पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसलिए समय-समय पर इन पौधों को हटाना बेहद जरूरी हो जाता है।
इस अभियान की निगरानी पेरियार टाइगर रिज़र्व के अधिकारियों और अर्थिंग नेचर फाउंडेशन के प्रतिनिधियों द्वारा संयुक्त रूप से की गई। पूरे कार्यक्रम के दौरान वैज्ञानिक तरीके से पौधों की पहचान कर उन्हें हटाया गया, ताकि पर्यावरण को न्यूनतम नुकसान पहुंचे।
अधिकारियों ने बताया कि यह केवल एक शुरुआती चरण का अभियान है और आने वाले दिनों में भी इस तरह की इको-रेस्टोरेशन गतिविधियां लगातार जारी रहेंगी। उनका कहना है कि जंगल की जैव विविधता को बचाने के लिए स्थानीय समुदाय और स्वयंसेवकों की भागीदारी बेहद महत्वपूर्ण है।
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे अभियानों से जंगलों में प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने में मदद मिलती है और वन्यजीवों के आवास को सुरक्षित किया जा सकता है।
यह इको-रेस्टोरेशन कैंप पेरियार टाइगर रिज़र्व में संरक्षण प्रयासों को नई दिशा देने वाला कदम माना जा रहा है, जिससे भविष्य में जंगलों की पारिस्थितिकी और मजबूत हो सकेगी।





