
Kerala केरल: केरल में विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस गठबंधन ने सत्ता संभाल ली है और नई सरकार के गठन के साथ कई पुराने नीतिगत फैसलों पर चर्चा तेज हो गई है। इन्हीं में केंद्र सरकार की पीएम श्री योजना भी शामिल है, जिसे लेकर राज्य में राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर विचार-विमर्श जारी है। यह योजना पिछली वामपंथी गठबंधन सरकार के कार्यकाल में केंद्र सरकार के साथ समझौते के तहत स्वीकार की गई थी, हालांकि इसे अभी तक लागू नहीं किया गया है।
पिछली सरकार के दौरान इस योजना को लेकर आधिकारिक हस्ताक्षर किए गए थे, लेकिन इसके क्रियान्वयन को लेकर कई स्तरों पर समीक्षा की प्रक्रिया जारी रही। उस समय शिक्षा मंत्री एन. शम्सुद्दीन ने स्पष्ट किया था कि योजना के सभी पहलुओं की जांच की जाएगी और विशेषज्ञों की राय लेने के बाद ही इसके लागू करने पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। इस कारण योजना को अभी तक जमीन पर लागू नहीं किया जा सका है।
अब सत्ता परिवर्तन के बाद इस मुद्दे पर नई सरकार की भूमिका पर नजरें टिकी हुई हैं। कांग्रेस गठबंधन के वरिष्ठ नेता और राज्य के स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन ने इस विषय पर प्रतिक्रिया देते हुए स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की है। रविवार को पत्रकारों के सवालों के जवाब में उन्होंने कहा कि पिछली सरकार ने इस परियोजना को लेकर केंद्र के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, और यह एक औपचारिक प्रक्रिया का हिस्सा था।
उन्होंने आगे कहा कि किसी भी योजना पर एक बार हस्ताक्षर हो जाने के बाद उससे पीछे हटना इतना आसान नहीं होता। इसके साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नई सरकार इस मुद्दे पर जल्दबाजी में कोई निर्णय नहीं लेगी। सरकार सभी पहलुओं का विस्तृत अध्ययन करने के बाद ही योजना के क्रियान्वयन पर अंतिम फैसला करेगी।
केरल की नई सरकार का यह रुख संकेत देता है कि वह शिक्षा और विकास से जुड़े मामलों में संतुलित और विचारशील दृष्टिकोण अपनाना चाहती है। पीएम श्री योजना को लेकर राज्य में पहले से ही अलग-अलग राय रही है, और अब नई सरकार के निर्णय पर सबकी नजरें हैं कि वह इस योजना को आगे बढ़ाती है या इसमें संशोधन की दिशा अपनाती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सत्ता परिवर्तन के बाद ऐसे समझौतों और योजनाओं की समीक्षा स्वाभाविक प्रक्रिया होती है। केरल में शिक्षा व्यवस्था और नीतिगत फैसलों को लेकर हमेशा से सक्रिय बहस होती रही है, ऐसे में यह मामला भी राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण बन गया है।
फिलहाल सरकार ने साफ कर दिया है कि किसी भी तरह का अंतिम निर्णय विशेषज्ञों की राय और विस्तृत अध्ययन के बाद ही लिया जाएगा। इससे यह संकेत मिलता है कि राज्य सरकार जल्दबाजी से बचते हुए दीर्घकालिक नीति के आधार पर आगे बढ़ना चाहती है।





