
Kerala केरल: उत्तरी मालाबार क्षेत्र के प्रमुख मछली पकड़ने वाले केंद्र पुथियांगडी में मछली पकड़ने के लिए बंदरगाह (हार्बर) बनाने की संभावना पर अध्ययन किया जाएगा। राज्य के मंत्री अब्दुल गफूर ने विधानसभा में यह जानकारी दी। वे विधायक विजी द्वारा क्षेत्र में बंदरगाह की आवश्यकता को लेकर पेश किए गए प्रस्ताव का जवाब दे रहे थे।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि पुथियांगडी में बंदरगाह निर्माण को लेकर संभावनाओं का विस्तृत अध्ययन किया जा रहा है और इस परियोजना को केंद्र एवं राज्य सरकार की योजनाओं में शामिल करने की प्रक्रिया पर भी विचार किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि परियोजना को आगे बढ़ाते समय समुद्र तट के प्राकृतिक स्वरूप को किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा, इसका विशेष ध्यान रखा जाएगा।
पुथियांगडी को राज्य के प्रमुख मछली निर्यात केंद्रों में से एक माना जाता है, जहां मछली संसाधनों का बड़े स्तर पर उपयोग किया जाता है। मडाई पंचायत के अंतर्गत आने वाले इस क्षेत्र में लंबे समय से मछुआरे समुदाय और स्थानीय लोगों की मांग रही है कि यहां एक छोटा लेकिन आधुनिक मछली पकड़ने का बंदरगाह बनाया जाए, जिससे उनकी रोज़गार संबंधी समस्याओं का समाधान हो सके।
स्थानीय मछुआरों का कहना है कि इस क्षेत्र में बंदरगाह की कमी के कारण मछली पकड़ने वाली बड़ी नावों से मछली को दूसरी जगह ले जाने में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। बड़ी ट्रॉलरों से छोटी फाइबर नावों में मछली स्थानांतरित करने की प्रक्रिया न केवल कठिन है, बल्कि कई बार जोखिम भरी भी हो जाती है।
इस वजह से मछली उद्योग से जुड़े लोगों को समय, लागत और सुरक्षा—तीनों स्तरों पर समस्याओं का सामना करना पड़ता है। मछुआरों का कहना है कि यदि यहां बंदरगाह विकसित किया जाता है, तो मछली उतारने और निर्यात की प्रक्रिया अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित हो जाएगी।
पुथियांगडी से मछली राज्य के विभिन्न हिस्सों के साथ-साथ विदेशों में भी निर्यात की जाती है। यह क्षेत्र मछली व्यापार का एक महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है, जहां से बड़े पैमाने पर आपूर्ति की जाती है। इस उद्योग पर हजारों लोगों की आजीविका निर्भर करती है, जिनमें स्थानीय मजदूरों के साथ-साथ अन्य राज्यों से आए श्रमिक भी शामिल हैं। अनुमान के अनुसार यहां तीन हजार से अधिक लोग इस मछली उद्योग से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए हैं।
हालांकि, इस क्षेत्र में बुनियादी ढांचे की कमी लंबे समय से एक बड़ी समस्या बनी हुई है। बंदरगाह न होने के कारण न केवल व्यापार प्रभावित होता है, बल्कि मछुआरों को कई तरह की दैनिक कठिनाइयों का सामना भी करना पड़ता है। समुद्र के कटाव की समस्या भी इस क्षेत्र में गंभीर है, जिससे कई बार मछली पकड़ने के जाल और अन्य उपकरणों को नुकसान पहुंचता है।
स्थानीय मछुआरों ने यह भी बताया है कि पिछले कुछ वर्षों में बड़ी नावों से छोटी फाइबर नावों में मछली स्थानांतरित करते समय कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें कुछ मछुआरों की समुद्र में जान भी गई है। यह स्थिति क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और संरचनात्मक सुविधाओं की कमी को उजागर करती है।
मछुआरों का कहना है कि यदि पुथियांगडी में एक व्यवस्थित बंदरगाह बनाया जाता है, तो न केवल उनकी सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि मछली व्यापार भी अधिक संगठित और लाभकारी हो सकेगा। इससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
सरकार की ओर से अध्ययन की घोषणा के बाद स्थानीय लोगों में उम्मीद जगी है कि वर्षों पुरानी मांग अब पूरी हो सकती है। हालांकि, लोग यह भी चाहते हैं कि अध्ययन के बाद परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाया जाए ताकि वास्तविक लाभ जमीन पर दिखाई दे सके।
मंत्री अब्दुल गफूर ने आश्वासन दिया है कि परियोजना के हर पहलू पर ध्यान दिया जाएगा और पर्यावरण संतुलन को बनाए रखते हुए ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि अध्ययन के बाद बंदरगाह परियोजना को कब तक मंजूरी मिलती है और इसका कार्य कब शुरू होता है।





