केरल

Kerala : वाहन सुविधा के अभाव में अंधिकाड आबकारी विभाग परेशान

Kavita2
16 July 2026 3:11 PM IST
Kerala : वाहन सुविधा के अभाव में अंधिकाड आबकारी विभाग परेशान
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त्रिशूर : अंधिकाड आबकारी विभाग इन दिनों गंभीर संसाधन संकट से जूझ रहा है। विभाग के पास मौजूद तीनों सरकारी जीपें खराब हो चुकी हैं और लंबे समय से इस्तेमाल के लायक नहीं बची हैं। वाहनों की कमी के कारण अधिकारियों को क्षेत्र में कार्रवाई करने, जांच अभियान चलाने और आपात परिस्थितियों में मौके तक पहुंचने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

अंधिकाड आबकारी रेंज ऑफिस त्रिशूर सर्कल के अंतर्गत आने वाले अटाट्टू, अरिमपुर, मनलुर और अंधिकाड सहित बड़े क्षेत्र में आबकारी गतिविधियों की निगरानी करता है। यह कार्यालय पिछले करीब डेढ़ साल से सक्रिय रूप से काम कर रहा है, लेकिन इसी अवधि में उपलब्ध तीनों जीपें भी लगातार इस्तेमाल के कारण खराब हालत में पहुंच गई हैं।

खराब वाहनों से बढ़ी परेशानी

विभागीय अधिकारियों के अनुसार, तीनों जीपों की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि उनका इस्तेमाल करना मुश्किल हो गया है। वाहनों में जंग लग चुका है और वे नियमित गश्त या कार्रवाई के लिए भरोसेमंद नहीं रह गई हैं।

आबकारी विभाग का काम मुख्य रूप से अवैध शराब निर्माण, बिक्री और परिवहन पर रोक लगाना, जांच अभियान चलाना और लोगों को नशे के खिलाफ जागरूक करना है। ऐसे में क्षेत्र में तेजी से पहुंचने के लिए वाहनों की अहम भूमिका होती है।

लेकिन वर्तमान स्थिति में वाहन उपलब्ध नहीं होने के कारण अधिकारियों और कर्मचारियों को कई बार कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है।

'ऑपरेशन थंडर' और 'तूफान' अभियान पर असर

राज्य सरकार की ओर से अवैध शराब और नशीले पदार्थों के खिलाफ समय-समय पर विशेष अभियान चलाए जाते हैं। इनमें 'ऑपरेशन थंडर' और 'तूफान' जैसे अभियान भी शामिल हैं।

हालांकि, वाहन सुविधा के अभाव के कारण अंधिकाड आबकारी विभाग के अधिकारी इन अभियानों में पूरी क्षमता के साथ शामिल होने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं। किसी भी सूचना पर तुरंत मौके तक पहुंचना चुनौती बन गया है।

अधिकारियों को कई बार संबंधित स्थान तक पहुंचने के लिए कार्यालय से करीब 25 किलोमीटर तक की दूरी तय करनी पड़ती है। लेकिन पर्याप्त वाहन नहीं होने से कार्रवाई में देरी होने की आशंका बनी रहती है।

आपात स्थिति में सिर्फ दो दोपहिया वाहन सहारा

वर्तमान में किसी घटना या छापेमारी की स्थिति में विभाग के पास केवल दो दोपहिया वाहन उपलब्ध हैं। इतने बड़े क्षेत्र को कवर करने के लिए यह व्यवस्था पर्याप्त नहीं मानी जा रही है।

अधिकारियों का कहना है कि आबकारी कार्रवाई अक्सर ऐसे इलाकों में करनी पड़ती है जहां तुरंत पहुंचना जरूरी होता है। अवैध शराब से जुड़े मामलों में समय पर कार्रवाई नहीं होने से आरोपी मौके से भाग सकते हैं।

जागरूकता अभियानों में सक्रिय भूमिका

वाहनों की समस्या के बावजूद अंधिकाड आबकारी विभाग शराब विरोधी जागरूकता अभियानों में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।

विभाग की ओर से स्कूलों, सार्वजनिक स्थानों और समुदायों में नशे के दुष्प्रभावों को लेकर जागरूकता कक्षाएं आयोजित की जा रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि लोगों को नशे से दूर रखने और अवैध शराब के खिलाफ जागरूक करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

नए वाहनों की मांग

विभागीय कर्मचारियों का मानना है कि क्षेत्र की जरूरतों को देखते हुए नए वाहनों की तत्काल आवश्यकता है। पुराने और खराब हो चुके वाहनों के कारण न केवल विभागीय कार्य प्रभावित हो रहे हैं, बल्कि कर्मचारियों की सुरक्षा और अभियान की प्रभावशीलता पर भी असर पड़ रहा है।

उन्होंने सरकार और संबंधित विभाग से मांग की है कि अंधिकाड आबकारी रेंज ऑफिस के लिए जल्द से जल्द नए वाहनों की व्यवस्था की जाए।

बड़ी जिम्मेदारी, सीमित संसाधन

आबकारी विभाग की जिम्मेदारी शराब और नशीले पदार्थों से जुड़े अपराधों पर नियंत्रण रखना है। इसके लिए नियमित गश्त, जांच और त्वरित कार्रवाई जरूरी होती है।

अंधिकाड क्षेत्र में विभाग की जिम्मेदारी बड़े इलाके में फैली हुई है, लेकिन सीमित संसाधनों के कारण कर्मचारियों को अतिरिक्त दबाव में काम करना पड़ रहा है।

स्थानीय स्तर पर भी लोगों का कहना है कि अवैध शराब और नशे से जुड़े मामलों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए आबकारी विभाग को पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराना जरूरी है।

फिलहाल, अंधिकाड आबकारी विभाग खराब वाहनों और सीमित परिवहन सुविधा के बीच अपना काम जारी रखे हुए है। अब नजर इस बात पर है कि सरकार और संबंधित विभाग वाहन संकट को दूर करने के लिए कब तक कदम उठाते हैं।

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