केरल

Kerala : धान की खेती के बीच फर्टिलाइजर की कीमतों में भारी उछाल

Kavita2
25 May 2026 3:42 PM IST
Kerala : धान की खेती के बीच फर्टिलाइजर की कीमतों में भारी उछाल
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Kerala केरल: जिले में धान की पहली फसल और खरीफ सीजन की खेती की शुरुआत के साथ ही लगातार बारिश होने से किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। इस समय फर्टिलाइजर की कीमतों में अचानक तेज बढ़ोतरी ने खेती की लागत को और अधिक महंगा बना दिया है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।

किसानों का कहना है कि इस मौसम में धान की अच्छी पैदावार के लिए फैक्टमफॉस, पोटाश और अन्य कॉम्प्लेक्स फर्टिलाइजर की आवश्यकता होती है। लेकिन इन जरूरी खादों की कीमतें बाजार में काफी बढ़ गई हैं। पहले की तुलना में अब इनकी कीमतें कई गुना अधिक हो चुकी हैं, जिससे छोटे और मध्यम वर्ग के किसानों पर सीधा असर पड़ रहा है।

स्थानीय कृषि बाजारों में भी फर्टिलाइजर की कमी और बढ़ती कीमतों को लेकर अफरा-तफरी का माहौल देखा जा रहा है। कई जगहों पर किसानों को जरूरत के अनुसार खाद नहीं मिल पा रही है, जबकि जहां उपलब्ध है वहां बढ़ी हुई दरों पर बिक्री हो रही है।

किसानों ने बताया कि धान की बुवाई के इस महत्वपूर्ण समय में फर्टिलाइजर की महंगाई ने उनकी पूरी आर्थिक योजना को प्रभावित कर दिया है। खेती की लागत बढ़ने से उत्पादन पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। कई किसानों ने यह भी कहा कि पहले से ही मौसम की अनिश्चितता और बारिश की वजह से खेतों में काम प्रभावित हो रहा है, ऊपर से महंगे खाद ने स्थिति को और कठिन बना दिया है।

जानकारी के अनुसार, फर्टिलाइजर की कीमतों में इस बढ़ोतरी के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारण बताए जा रहे हैं। पश्चिम एशियाई देशों में चल रहे युद्ध जैसे हालात के कारण कच्चे माल की सप्लाई प्रभावित हुई है, जिसका सीधा असर फर्टिलाइजर उत्पादन पर पड़ा है। इसके अलावा, सब्सिडी की राशि में कमी को भी कीमतों में बढ़ोतरी का एक बड़ा कारण माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उर्वरक निर्माण से जुड़े कच्चे माल की आपूर्ति में कमी आने से भारत जैसे कृषि प्रधान देशों में भी इसका असर देखने को मिल रहा है। इसके साथ ही सरकारी स्तर पर सब्सिडी में कमी के कारण बाजार मूल्य और अधिक बढ़ गए हैं।

इस स्थिति को देखते हुए किसानों ने सरकार से मांग की है कि फर्टिलाइजर की कीमतों को नियंत्रित किया जाए और सब्सिडी बढ़ाई जाए, ताकि खेती की लागत कम हो सके और उन्हें राहत मिल सके। किसानों का कहना है कि यदि समय पर हस्तक्षेप नहीं किया गया तो इसका असर धान उत्पादन पर भी पड़ सकता है।

फिलहाल, जिले के कृषि बाजारों में स्थिति अस्थिर बनी हुई है और किसान लगातार बढ़ती कीमतों से परेशान हैं। प्रशासन से उम्मीद की जा रही है कि वह इस मुद्दे पर जल्द कोई ठोस कदम उठाएगा।

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