
Kerala केरल: जिले में मानव और जंगली जानवरों के बीच बढ़ते टकराव को कम करने के लिए प्रशासन ने व्यापक कदम उठाने का निर्णय लिया है। इस संबंध में कलेक्टर डॉ. दिनेसन चेरुवत की अध्यक्षता में वन विभाग के अधिकारियों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें सांसद डीन कुरियाकोस, सरकारी मुख्य सचेतक अपु जॉन जोसेफ तथा विधायक रॉय के. पॉलोस, सिरियाक थॉमस, सेनापति वेणु और एफ. राजा सहित कई जनप्रतिनिधि शामिल हुए।
बैठक में यह तय किया गया कि मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए मौजूदा व्यवस्थाओं को और मजबूत किया जाएगा। इसके तहत जन जागरूकता समिति, रैपिड रिस्पॉन्स टीम (RRT) और प्राइमरी रिस्पॉन्स टीम (PRT) की गतिविधियों को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा, ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
अधिकारियों ने बताया कि जिन क्षेत्रों में मानव और जंगली जानवरों के बीच टकराव की संभावना अधिक है, वहां विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों के माध्यम से स्थानीय लोगों को सुरक्षित रहने के उपायों, वन्यजीवों के व्यवहार और उनसे बचाव के तरीकों की जानकारी दी जाएगी।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि स्थानीय संस्थाओं को सीवेज ट्रीटमेंट व्यवस्था को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक सुझाव दिए जाएंगे, ताकि पर्यावरणीय असंतुलन को कम किया जा सके और वन्यजीवों के आवासीय क्षेत्रों में अनावश्यक हस्तक्षेप को रोका जा सके।
इसके अलावा डेयरी किसानों के लिए विशेष जागरूकता अभियान चलाने पर भी सहमति बनी है। अधिकारियों का मानना है कि कई बार पशुपालन गतिविधियां भी वन्यजीवों को मानव बस्तियों की ओर आकर्षित करती हैं, जिससे टकराव की स्थिति उत्पन्न होती है।
कलेक्टर ने बैठक में कहा कि मानव और वन्यजीवों के बीच संतुलन बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है और इसके लिए प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय समुदायों को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने सभी विभागों को निर्देश दिए कि वे क्षेत्रीय स्तर पर समन्वय बढ़ाएं और शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित करें।
जनप्रतिनिधियों ने भी इस पहल का समर्थन करते हुए कहा कि बढ़ते संघर्ष को रोकने के लिए ठोस और दीर्घकालिक रणनीति की आवश्यकता है। उनका मानना है कि जागरूकता और त्वरित प्रतिक्रिया व्यवस्था को मजबूत करके कई घटनाओं को रोका जा सकता है।
फिलहाल प्रशासन ने इन निर्णयों को लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और आने वाले दिनों में संबंधित क्षेत्रों में जागरूकता कार्यक्रमों और प्रशिक्षण सत्रों का आयोजन किया जाएगा, ताकि मानव और वन्यजीवों के बीच टकराव को कम किया जा सके।





