
Kerala केरल: राज्य में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा 108 एम्बुलेंस के संचालन से जुड़े नए फैसलों के खिलाफ विरोध तेज हो गया है, जिसके बाद कई जगहों पर एम्बुलेंस सेवा प्रभावित हुई है। ड्राइवरों और मेडिकल टेक्नीशियनों को हटाने के फैसले के विरोध में कर्मचारियों ने आंदोलन शुरू कर दिया, जिसके चलते 108 एम्बुलेंस का संचालन अस्थायी रूप से रोक दिया गया है।
108 एम्बुलेंस सेवा एक महत्वपूर्ण सरकारी प्रणाली है, जो सड़क दुर्घटनाओं, गंभीर बीमारियों और आपात स्थितियों में मरीजों को नजदीकी सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों तक मुफ्त परिवहन सुविधा प्रदान करती है। इस सेवा के बाधित होने से आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, कर्मचारियों के अनुसार नियमों में बदलाव और स्टाफ हटाने के फैसले के कारण यह विरोध शुरू हुआ है। पहले इस व्यवस्था के तहत हर एम्बुलेंस में एक ड्राइवर और एक प्रशिक्षित नर्स (इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन) की तैनाती अनिवार्य थी। नर्स के रूप में G.N.M. या B.Sc. नर्सिंग योग्यता वाले स्टाफ को नियुक्त किया जाता था।
लेकिन नए प्रस्तावित सिस्टम में बदलाव करते हुए अब एम्बुलेंस में नर्स की जगह कम प्रशिक्षित इमरजेंसी टेक्नीशियन रखने की बात कही जा रही है। बताया जा रहा है कि इन नए कर्मचारियों को तीन से छह महीने का EMT कोर्स और 12वीं पास जैसी न्यूनतम योग्यता के आधार पर भर्ती किया जाएगा।
कर्मचारियों का आरोप है कि इस बदलाव से न केवल रोजगार प्रभावित होगा, बल्कि मरीजों को मिलने वाली आपातकालीन चिकित्सा सेवा की गुणवत्ता पर भी असर पड़ेगा। उनका कहना है कि गंभीर स्थिति में योग्य नर्स की अनुपस्थिति मरीजों के जीवन के लिए खतरा बन सकती है।
वहीं, प्रबंधन पक्ष का दावा है कि यह बदलाव लागत कम करने और सिस्टम को अधिक टिकाऊ बनाने के उद्देश्य से किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, 2019-24 के बीच जहां एम्बुलेंस सेवा का टेंडर 517 करोड़ रुपये में दिया गया था, वहीं इस बार इसे घटाकर लगभग 293 करोड़ रुपये में GVK EMR द्वारा कोट किया गया है।
बताया जा रहा है कि कंपनी अगले पांच वर्षों में करीब 224 करोड़ रुपये के संभावित घाटे को देखते हुए खर्च में कटौती और सैलरी संरचना में बदलाव की योजना बना रही है। इसमें स्टाफ कम करना और वेतन में कमी जैसे कदम शामिल हैं।
वर्तमान में एक नर्स का औसत वेतन लगभग 23,000 रुपये बताया जाता है। प्रबंधन का मानना है कि नए मॉडल में प्रशिक्षित लेकिन कम वेतन वाले कर्मचारियों को शामिल कर खर्च नियंत्रित किया जा सकता है और सेवा को जारी रखा जा सकता है।
हालांकि, कर्मचारियों और यूनियन का कहना है कि यह निर्णय मरीज सुरक्षा से समझौता है और इसे तुरंत वापस लिया जाना चाहिए। इसी मांग को लेकर राज्य के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, जिससे एम्बुलेंस सेवाएं प्रभावित हुई हैं।
फिलहाल सरकार और संबंधित कंपनी के बीच बातचीत की संभावना जताई जा रही है, ताकि इस विवाद का समाधान निकाला जा सके और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं फिर से सामान्य रूप से बहाल हो सकें।





