केरल
KAS भर्ती भी संदेह के घेरे में: PSC घोटाले में 3 नई परीक्षाओं पर गहराया संकट
Tara Tandi
8 Oct 2026 10:29 AM IST

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तिरुवनंतपुरम: स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) के अनुसार, केरल पब्लिक सर्विस कमीशन (PSC) ने प्लानिंग बोर्ड भर्ती मामले में हुई गड़बड़ियों जैसे ही तरीके से तीन और परीक्षाओं में कुछ खास उम्मीदवारों को फायदा पहुँचाने के लिए मिलीभगत की। आरोप है कि इंटरव्यू में उम्मीदवारों को बहुत ज़्यादा नंबर दिए गए, जबकि कुछ मामलों में 10 सवालों के जवाबों की जांच ही नहीं की गई। IG अजीता बेगम की अगुवाई वाली SIT ने इन नई गड़बड़ियों का पता लगाया। मंगलवार तक तीन और मामले दर्ज होने की उम्मीद है, जब केरल हाई कोर्ट प्लानिंग बोर्ड भर्ती धोखाधड़ी मामले को खारिज करने की PSC की याचिका पर अपना फैसला सुनाएगा। SIT ने कहा कि तीन नए मामलों में गड़बड़ियां अब तक सामने आई गड़बड़ियों से ज़्यादा गंभीर थीं।
ये तीनों मामले अपेक्षाकृत छोटी परीक्षाओं से जुड़े थे और जांच टीम को स्पष्ट सबूत मिले हैं। शिकायतकर्ताओं के विस्तृत बयान भी दर्ज किए गए हैं। SIT ने कहा कि गड़बड़ियों के पीछे राजनीतिक दखल था। जिन उम्मीदवारों ने परीक्षाओं में अच्छा प्रदर्शन किया था लेकिन रैंक लिस्ट में जगह नहीं बना पाए, उन्होंने सूचना का अधिकार (RTI) कानून के तहत PSC से जानकारी मांगी थी। उन्हें मिले जवाब कथित तौर पर विरोधाभासी और असंतोषजनक थे। SIT की जांच इन्हीं शिकायतों के बाद शुरू हुई। जांच टीम ने तीनों परीक्षाओं और उसके बाद हुई नियुक्तियों से जुड़े डिजिटल सबूत और संबंधित फाइलों से जानकारी ज़ब्त की है। इंटरव्यू लेने वाले PSC सदस्यों की भी जांच हो सकती है।
लिखित परीक्षा के नंबर पहले ही मिल गए थे: PSC के नियमों के अनुसार, इंटरव्यू की प्रक्रिया पूरी होने से पहले लिखित परीक्षा में मिले नंबरों को प्रकाशित नहीं किया जाना चाहिए। हालांकि, आरोप है कि PSC सदस्यों ने अधिकारियों पर प्रभाव डालकर कई उम्मीदवारों के लिखित परीक्षा के नंबर पहले ही हासिल कर लिए थे। SIT के अनुसार, इससे पसंदीदा उम्मीदवारों को इंटरव्यू के दौरान ज़्यादा नंबर देने में मदद मिली, जिससे वे रैंक लिस्ट में ऊंची जगह हासिल कर सके। KAS मामले में सबूत जुटाए गए: SIT ने केरल एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस (KAS) के दूसरे बैच की भर्ती में गड़बड़ी की शिकायत के संबंध में भी सबूत जुटाए हैं। इस मामले में भी केस दर्ज होने की संभावना है। शिकायत में सवाल तैयार करने, मूल्यांकन और इंटरव्यू में राजनीतिक दखल का आरोप लगाया गया है। इसमें यह भी आरोप लगाया गया है कि इंटरव्यू के लिए कम योग्यता वाले उम्मीदवारों को चुना गया था।
इंटरव्यू पैनल में शामिल लोगों में DYFI का एक नेता और PSC का एक सदस्य भी था, जो एक मेडिकल कॉलेज में ब्लड-बैंक टेक्नीशियन के तौर पर काम कर चुका था।
खबरों के मुताबिक, सरकार का प्रतिनिधित्व करने वाले एक सीनियर सरकारी अधिकारी ने तब आपत्ति जताई थी जब इंटरव्यू के दौरान कुछ उम्मीदवारों को अतिरिक्त अंक देने के लिए कहा गया था।
इस अपराध के लिए उम्रकैद की सज़ा हो सकती है। SIT के अनुसार, इसमें शामिल अधिकारियों को भरोसा तोड़ने के आरोप में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316(5) के तहत उम्रकैद या 10 साल तक की जेल और जुर्माना हो सकता है। इस प्रावधान के तहत बिना वारंट के गिरफ्तारी भी की जा सकती है। चूंकि यह गैर-ज़मानती अपराध है, इसलिए पुलिस स्टेशन से ज़मानत नहीं मिल सकती। SIT ने कहा, "छोटी परीक्षाओं में बहुत गंभीर अनियमितताएं पाई गई हैं। शुरुआती सबूत इकट्ठा कर लिए गए हैं। PSC का जवाब संतोषजनक नहीं है।"
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