
कोच्चि/केरल: कभी साफ पानी के लिए पहचानी जाने वाली कदंबरायर नदी आज गाद, खरपतवार और प्रदूषण की समस्या से जूझ रही है। नदी में लगातार जमा हो रही गाद और घटती गहराई के कारण पानी का बहाव प्रभावित हो रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से चल रही सफाई और पुनर्जीवन योजनाओं के बावजूद नदी की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं आया है।
कदंबरायर नदी अब कई स्थानों पर मटमैले पानी और रुकावट वाले प्रवाह के कारण गंभीर संकट का सामना कर रही है। नदी का जलमार्ग खरपतवार से भर गया है, जिससे न केवल प्राकृतिक प्रवाह प्रभावित हो रहा है, बल्कि आसपास के क्षेत्रों में पर्यावरणीय समस्याएं भी बढ़ रही हैं।
कई संस्थानों की जल जरूरतों से जुड़ी नदी
कदंबरायर नदी का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि इससे कई बड़े संस्थान जुड़े हुए हैं। स्मार्ट सिटी परियोजना, इन्फोपार्क की आईटी कंपनियां और आसपास के कई अन्य संस्थान इस नदी के पानी पर निर्भर हैं।
किन्फ्रा (Kinfra) भी नदी से पानी पंप कर उसे शुद्ध करने के बाद उपयोग और आपूर्ति के लिए इस्तेमाल करता है। ऐसे में नदी में बढ़ता प्रदूषण और गाद की समस्या जल प्रबंधन के लिए चिंता का विषय बन रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर नदी की स्थिति लगातार खराब होती रही तो भविष्य में जल आपूर्ति और पर्यावरण दोनों पर इसका असर पड़ सकता है।
गाद और कम होती गहराई बनी बड़ी समस्या
नदी में गाद जमा होना और पानी की गहराई कम होना अब एक आम समस्या बन गई है। गाद जमा होने से नदी का प्राकृतिक बहाव धीमा हो जाता है और कई जगह पानी रुकने लगता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी नदी के स्वस्थ प्रवाह के लिए समय-समय पर गाद हटाना और जलमार्ग को साफ रखना जरूरी होता है। लेकिन कदंबरायर नदी में यह काम लगातार और प्रभावी तरीके से नहीं हो पाया है।
हालांकि, नदी की गहराई बढ़ाने और बहाव सुधारने के लिए गाद हटाने के प्रयास किए गए हैं, लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि ये प्रयास स्थायी समाधान साबित नहीं हुए हैं।
करोड़ों रुपये खर्च के बाद भी स्थिति जस की तस
कदंबरायर नदी के जीर्णोद्धार और पर्यटन विकास से जुड़े प्रोजेक्ट पर 10 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जाने की बात सामने आई है। इसके बावजूद नदी की स्थिति में बड़ा बदलाव नहीं आया है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि सफाई और विकास कार्यों का असर जमीन पर दिखाई नहीं दे रहा है। उनका कहना है कि खरपतवार हटाने और गाद निकालने का काम कई बार केवल औपचारिकता बनकर रह जाता है।
लोगों का कहना है कि यदि खरपतवार हटाने पर लाखों रुपये खर्च किए भी जाते हैं, तो उसे पूरी तरह हटाने के बजाय नदी के किनारे जमा कर दिया जाता है। बारिश के मौसम में यही खरपतवार दोबारा फैल जाते हैं और नदी फिर से पहले जैसी स्थिति में पहुंच जाती है।
खरपतवार से बढ़ रही परेशानी
नदी में फैले खरपतवार के कारण जल प्रवाह बाधित हो रहा है। इससे पानी की गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है और जलीय पर्यावरण को नुकसान पहुंचने की आशंका बढ़ रही है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि केवल ऊपर-ऊपर सफाई करने से समस्या का समाधान नहीं होगा। खरपतवार की जड़ों को हटाना, गाद की स्थायी सफाई करना और नियमित निगरानी जरूरी है।
उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि नदी के पुनर्जीवन के लिए एक दीर्घकालिक योजना तैयार की जाए, जिसमें केवल सफाई ही नहीं बल्कि जल संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा को भी शामिल किया जाए।
पर्यटन संभावनाओं पर भी असर
कदंबरायर नदी को पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। नदी के आसपास प्राकृतिक सुंदरता और जल पर्यटन की संभावनाएं मौजूद हैं। इसी उद्देश्य से नदी के विकास और पर्यटन परियोजनाओं पर भी काम किया गया था।
लेकिन नदी की मौजूदा स्थिति पर्यटन गतिविधियों के लिए बड़ी चुनौती बन रही है। गंदा पानी, खरपतवार और कमजोर बहाव के कारण नदी का आकर्षण कम हो गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि नदी को सही तरीके से पुनर्जीवित किया जाए तो यह क्षेत्र के लिए आर्थिक और पर्यावरणीय दोनों रूप से फायदेमंद साबित हो सकती है।
स्थायी समाधान की जरूरत
कदंबरायर नदी की समस्या केवल सफाई तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके लिए लगातार निगरानी और वैज्ञानिक प्रबंधन की आवश्यकता है। गाद हटाने, खरपतवार नियंत्रण, प्रदूषण रोकने और जल प्रवाह सुधारने के लिए एक समन्वित योजना जरूरी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अब केवल घोषणाओं और अस्थायी सफाई अभियानों से काम नहीं चलेगा। नदी को बचाने के लिए प्रभावी कदम उठाने होंगे।
कदंबरायर नदी आज इस बात का उदाहरण बन गई है कि केवल धन खर्च करने से किसी जलस्रोत का पुनर्जीवन संभव नहीं है। इसके लिए सही योजना, नियमित रखरखाव और जिम्मेदार निगरानी की जरूरत होती है।





