केरल

हार चोरी मामले में 6 साल बाद मिला न्याय, कोर्ट ने बेगुनाह रमेश कुमार को किया बरी

Kavita2
29 July 2026 3:51 PM IST
हार चोरी मामले में 6 साल बाद मिला न्याय, कोर्ट ने बेगुनाह रमेश कुमार को किया बरी
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अलप्पुझा। केरल के चेट्टीकुलंगारा निवासी रमेश कुमार को आखिरकार लंबी कानूनी लड़ाई के बाद न्याय मिल गया है। साल 2019 में हार चोरी के एक मामले में गिरफ्तार किए गए रमेश कुमार को अदालत ने सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। करीब छह साल तक चले इस मामले में अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष ऐसा कोई ठोस प्रमाण पेश नहीं कर सका, जिससे रमेश का अपराध से सीधा संबंध साबित हो सके।

रमेश कुमार को 26 नवंबर 2019 को मावेलिक्कारा पुलिस ने एक महिला का हार चोरी करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। आरोप था कि चेट्टीकुलंगारा मंदिर में पवित्र जल लेने पहुंची महिला का हार चोरी हो गया था और इस मामले में रमेश को आरोपी बनाया गया था।

47 दिन रिमांड में रहे थे रमेश

मामले में गिरफ्तारी के बाद रमेश कुमार को 47 दिनों तक न्यायिक हिरासत (रिमांड) में रहना पड़ा। इसके बाद शुरू हुई लंबी कानूनी प्रक्रिया में उन्होंने खुद को निर्दोष बताते हुए लड़ाई जारी रखी।

रमेश का कहना था कि उन्हें गलत तरीके से इस मामले में फंसाया गया है। हालांकि, शुरुआती जांच के बाद भी पुलिस ने उनके खिलाफ दर्ज मामले को वापस नहीं लिया और जांच आगे बढ़ती रही।

दूसरे आरोपी के कबूलनामे से उठा सवाल

मामले में उस समय नया मोड़ आया जब एक अन्य चोरी के मामले में गिरफ्तार किए गए आरोपी ने पूछताछ के दौरान कथित रूप से कबूल किया कि चेट्टीकुलंगारा मंदिर में हुई हार चोरी की घटना भी उसी ने की थी।

इस कबूलनामे के बाद रमेश कुमार के खिलाफ चल रहे मामले की जांच पर सवाल उठे। उम्मीद थी कि पुलिस इस मामले की दोबारा जांच करेगी और नए तथ्यों के आधार पर कार्रवाई करेगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ और रमेश के खिलाफ मामला जारी रहा।

मानवाधिकार आयोग ने भी की थी अपील

रमेश कुमार के मामले में मानवाधिकार आयोग ने भी दोबारा जांच की मांग की थी। आयोग की ओर से मामले की समीक्षा और उचित जांच की अपील की गई थी, लेकिन इसके बावजूद जांच की दिशा में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ।

इसके बाद रमेश को अदालत में अपना पक्ष रखने के लिए लंबी कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ा।

अभियोजन पक्ष के 24 गवाह भी नहीं जोड़ सके अपराध से

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल 24 गवाहों से पूछताछ की। हालांकि, इनमें से कोई भी गवाह ऐसा बयान नहीं दे सका, जो रमेश कुमार को चोरी की घटना से सीधे जोड़ता हो।

अदालत ने सभी साक्ष्यों और गवाहों के बयानों की समीक्षा के बाद पाया कि रमेश के खिलाफ आरोप साबित नहीं होते। इसके बाद अदालत ने उन्हें दोषमुक्त करते हुए बरी कर दिया।

छह साल बाद खत्म हुआ संघर्ष

कोर्ट के फैसले के बाद रमेश कुमार और उनके परिवार को बड़ी राहत मिली है। करीब छह वर्षों तक चले इस मामले ने उनके जीवन को प्रभावित किया। गिरफ्तारी, हिरासत और लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद अब उन्हें कानूनी रूप से निर्दोष घोषित किया गया है।

रमेश कुमार की रिहाई और बरी होने का फैसला न्याय व्यवस्था में साक्ष्यों के महत्व को भी रेखांकित करता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल आरोपों के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराया जा सकता, जब तक अपराध से जुड़े पर्याप्त सबूत मौजूद न हों।

पुलिस जांच पर उठे सवाल

इस मामले में पुलिस की जांच प्रक्रिया को लेकर भी सवाल खड़े हुए हैं। एक अन्य आरोपी के कथित कबूलनामे के बावजूद रमेश के खिलाफ मामला जारी रहने को लेकर कई लोगों ने चिंता जताई।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी आपराधिक मामले में जांच निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होनी चाहिए। यदि जांच के दौरान नए तथ्य सामने आते हैं, तो उनकी गंभीरता से समीक्षा करना जरूरी होता है।

निर्दोष साबित होने के बाद राहत

अदालत के फैसले के बाद रमेश कुमार ने राहत की सांस ली है। उनके लिए यह फैसला केवल कानूनी जीत नहीं, बल्कि वर्षों तक चले संघर्ष का अंत भी है।

यह मामला इस बात की याद दिलाता है कि आपराधिक मामलों में सही जांच, ठोस सबूत और निष्पक्ष न्याय प्रक्रिया कितनी महत्वपूर्ण होती है। रमेश कुमार को आखिरकार वह न्याय मिला, जिसके लिए उन्होंने वर्षों तक कानूनी लड़ाई लड़ी।

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