
अगरतला : त्रिपुरा सरकार ने राज्य के सभी स्कूलों में राष्ट्रगान ‘जन-गण-मन’ के साथ राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के पूरे संस्करण को गाना अनिवार्य कर दिया है। मुख्यमंत्री माणिक साहा ने मंगलवार को इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से इस संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर एक पोस्ट साझा करते हुए कहा कि केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के सम्मान, शिष्टाचार और आधिकारिक संस्करण के संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इन्हीं निर्देशों के आधार पर राज्य के स्कूलों में राष्ट्रगीत के गायन को लेकर नई व्यवस्था लागू की गई है।
स्कूलों में लागू होगा नया निर्देश
मुख्यमंत्री माणिक साहा ने अपनी पोस्ट में बताया कि स्कूल शिक्षा विभाग ने राज्य के सभी विद्यालयों को निर्देश दिया है कि राष्ट्रगान ‘जन-गण-मन’ के साथ राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ का पूरा संस्करण भी गाया जाए।
उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों में देश की सांस्कृतिक विरासत, राष्ट्रीय भावना और देश के प्रति सम्मान की भावना को मजबूत करना है। स्कूलों में होने वाले कार्यक्रमों और विशेष आयोजनों में निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान का आयोजन किया जाएगा।
गृह मंत्रालय की गाइडलाइन का दिया हवाला
मुख्यमंत्री ने अपनी पोस्ट में गृह मंत्रालय की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि गाइडलाइन में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के सम्मान, उचित तरीके और आधिकारिक संस्करण के इस्तेमाल पर जोर दिया गया है।
उन्होंने लिखा कि निर्देशों में विशेष रूप से कहा गया है कि सभी औपचारिक, अर्ध-औपचारिक और शैक्षणिक कार्यक्रमों में सही प्रोटोकॉल का पालन किया जाना चाहिए। इसका उद्देश्य राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान से जुड़ी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को बनाए रखना और लोगों में गर्व की भावना को बढ़ावा देना है।
विद्यार्थियों में देशभक्ति की भावना बढ़ाने पर जोर
त्रिपुरा सरकार का मानना है कि स्कूल बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण और राष्ट्रीय मूल्यों को विकसित करने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। ऐसे में विद्यालयों में राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान के माध्यम से विद्यार्थियों को देश के इतिहास और सांस्कृतिक महत्व से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
अधिकारियों के अनुसार, स्कूलों में होने वाली प्रार्थना सभाओं, विशेष कार्यक्रमों और अन्य आयोजनों में इन निर्देशों का पालन किया जाएगा।
‘वंदे मातरम’ का ऐतिहासिक महत्व
‘वंदे मातरम’ भारत के स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ा एक महत्वपूर्ण राष्ट्रगीत है। इसकी रचना प्रसिद्ध लेखक और साहित्यकार बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी। यह गीत स्वतंत्रता संग्राम के दौरान लोगों के बीच प्रेरणा और एकता का प्रतीक बना।
भारत सरकार ने ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगीत का दर्जा दिया है, जबकि ‘जन-गण-मन’ को राष्ट्रगान के रूप में मान्यता प्राप्त है। दोनों का देश के इतिहास और राष्ट्रीय भावना में विशेष स्थान है।
आधिकारिक संस्करण के पालन पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि गृह मंत्रालय की गाइडलाइन में राष्ट्रगीत के आधिकारिक संस्करण और सही तरीके से प्रस्तुति पर विशेष ध्यान दिया गया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राष्ट्रीय प्रतीकों से जुड़े कार्यक्रमों में गरिमा और अनुशासन बना रहे।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान करना हर नागरिक का कर्तव्य है और स्कूलों में बच्चों को शुरुआत से ही इसके महत्व की जानकारी देना जरूरी है।
राज्य सरकार ने दिए निर्देश
त्रिपुरा स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से जारी निर्देशों के बाद अब सभी सरकारी और निजी स्कूलों में इसका पालन करना होगा। स्कूल प्रशासन को कार्यक्रमों के दौरान निर्धारित नियमों और प्रोटोकॉल का ध्यान रखने के लिए कहा गया है।
शिक्षा विभाग की ओर से यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी विद्यालयों में नए निर्देशों का पालन हो रहा है या नहीं।
देशभर में राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान पर जोर
हाल के वर्षों में केंद्र और राज्य सरकारें राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान और उनके सही उपयोग को लेकर जागरूकता बढ़ाने पर जोर दे रही हैं। स्कूलों में राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत के आयोजन को इसी दिशा में एक कदम माना जा रहा है।
त्रिपुरा सरकार के इस फैसले के बाद राज्य के स्कूलों में होने वाले आयोजनों में अब राष्ट्रगान के साथ राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ का भी नियमित रूप से आयोजन किया जाएगा।
मुख्यमंत्री माणिक साहा ने कहा कि यह कदम विद्यार्थियों में राष्ट्रीय गौरव और देश की सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान की भावना को मजबूत करेगा।





