
Kerala केरल: अंतरराष्ट्रीय फ्रूट डे के अवसर पर केरल के पुलिकोटिल, चालिसरी निवासी जीजू की खेती से जुड़ी कहानी एक प्रेरणादायक उदाहरण के रूप में सामने आई है। जीजू खेती को केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि जीवन में खुशी और संतुष्टि का महत्वपूर्ण स्रोत मानते हैं। वे वर्षों से फलदार वृक्षों की खेती को बढ़ावा देते हुए इसे एक विशेष मिशन की तरह आगे बढ़ा रहे हैं।
साल 2007 से हर वर्ष 1 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय फ्रूट डे मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य फलों के पोषण मूल्य, स्वास्थ्य लाभ और पर्यावरण के अनुकूल खान-पान के प्रति जागरूकता फैलाना है। इसी संदेश को जीजू ने अपने जीवन में अपनाया और खेती को एक नई दिशा दी।
जीजू का जीवन सफर भी काफी प्रेरक रहा है। वे करीब चार दशक पहले व्यवसाय के सिलसिले में एर्नाकुलम आए थे, जहां उन्होंने धीरे-धीरे कृषि कार्यों की ओर रुझान बढ़ाया। वदुथला ग्रीन गार्डन में बसने के बाद उन्होंने खेती को गंभीरता से अपनाया और पिछले दो दशकों से अधिक समय से इस क्षेत्र में सक्रिय हैं।
आज उनके खेत दुर्लभ और विविध प्रकार के फलों के पेड़ों का एक समृद्ध संग्रह बन चुके हैं। जीजू ने स्थानीय किस्मों के साथ-साथ कई विदेशी और दुर्लभ फलों की खेती भी शुरू की है, जिससे उनका बाग एक अनोखी पहचान बना चुका है। उनके अनुसार, खेती केवल उत्पादन का साधन नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ जुड़ने का एक तरीका है।
उन्होंने बताया कि फलों की खेती न केवल आर्थिक रूप से लाभकारी है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण में भी अहम भूमिका निभाती है। उनके बाग में लगे पेड़ मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के साथ-साथ जैव विविधता को भी बढ़ावा देते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जीजू की मेहनत और लगन ने पूरे क्षेत्र में कृषि के प्रति नई सोच पैदा की है। पहले जहां लोग पारंपरिक खेती तक सीमित थे, वहीं अब कई लोग फल आधारित खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि जीजू जैसे किसानों की पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ स्वस्थ जीवनशैली को भी बढ़ावा देती है। अंतरराष्ट्रीय फ्रूट डे जैसे अवसर इस तरह की कहानियों को सामने लाकर लोगों को प्रेरित करते हैं।
जीजू का मानना है कि आने वाली पीढ़ी को प्राकृतिक खेती और फलदार वृक्षों के महत्व को समझना चाहिए, ताकि पर्यावरण संतुलन और स्वास्थ्य दोनों को सुरक्षित रखा जा सके। वे लगातार अपने अनुभव साझा कर अन्य किसानों को भी इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं।
आज उनका बाग केवल एक खेत नहीं, बल्कि सीखने और प्रेरणा देने वाला केंद्र बन चुका है, जहां लोग खेती की नई तकनीक और विविध फलों की जानकारी लेने आते हैं।
कुल मिलाकर, अंतरराष्ट्रीय फ्रूट डे के मौके पर जीजू की यह कहानी यह संदेश देती है कि अगर खेती को जुनून और समर्पण के साथ अपनाया जाए तो यह न केवल जीवन बदल सकती है, बल्कि समाज के लिए भी एक सकारात्मक उदाहरण बन सकती है।





