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तिरुवनंतपुरम: विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन ब्यूरो (VACB) सोमवार को पिनाराई विजयन, मोहम्मद रियास और टी. वीना के खिलाफ 'मंथली पे-ऑफ' विवाद के सिलसिले में मामला दर्ज कर सकता है। यह कदम हाई कोर्ट के आदेश के बाद उठाया जा रहा है। सरकार तिरुवनंतपुरम में स्पेशल इन्वेस्टिगेशन यूनिट को जांच सौंपने पर विचार कर रही है।
चूंकि कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड (CMRL), जिसने भुगतान किया था, का मुख्यालय कोच्चि में है, इसलिए जांच भी वहीं की जाएगी। जांच में कई जिले शामिल होंगे, इसलिए टीम में अलग-अलग यूनिट के अधिकारियों को शामिल किए जाने की संभावना है। क्राइम ब्रांच ने पिनाराई विजयन से जुड़ी प्रवर्तन निदेशालय (ED) की रिपोर्ट और संबंधित दस्तावेज VACB को सौंप दिए हैं। विजिलेंस डायरेक्टर मनोज अब्राहम के निर्देश पर FIR तैयार की गई है। पिनाराई विजयन को पहला आरोपी बनाए जाने की संभावना है। पिनाराई विजयन और अन्य लोगों के सोमवार को हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच में मामला दर्ज करने के आदेश को चुनौती देने की भी उम्मीद है।
उनकी अपील में यह तर्क दिया जा सकता है कि आदेश उनकी बात सुने बिना जारी किया गया था। डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (DGP) को लिखे पत्र में, ED ने हवाला लेनदेन, रिश्वतखोरी, सत्ता के दुरुपयोग, भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप लगाए थे। इन आरोपों के FIR में शामिल होने की उम्मीद है। हालांकि, संबंधित कानूनों के तहत केवल ED ही हवाला लेनदेन और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर सकती है। एक बार जब VACB FIR दर्ज कर लेगी, तो ED के उस आधार पर एनफोर्समेंट केस इंफॉर्मेशन रिपोर्ट (ECIR) दर्ज करने और अपनी जांच शुरू करने की उम्मीद है। VACB ने यह भी कहा है कि अगर जांच में और अपराध सामने आते हैं, तो भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत मामले दर्ज किए जाएंगे।
ED मंथली पे-ऑफ मामले में सावधानी से आगे बढ़ रही है। हाई कोर्ट के आदेश से पिनाराई विजयन और पी.ए. मोहम्मद रियास से जुड़े मंथली पे-ऑफ मामले की सीधी जांच का रास्ता साफ होने के बाद, प्रवर्तन निदेशालय ने आगे की कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। ED के वरिष्ठ अधिकारियों ने हाई कोर्ट के आदेश की समीक्षा की है। कोच्चि यूनिट को सावधानी से आगे बढ़ने का निर्देश दिया गया है। ED सूत्रों के मुताबिक, पिनाराई विजयन, मोहम्मद रियास और कोझिकोड में जिन लोगों के ठिकानों पर छापेमारी हुई थी, उनसे पूछताछ की जाएगी। एजेंसी मिले पैसे के सोर्स की भी जांच करेगी। ED ने सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस (SFIO) द्वारा दर्ज कॉर्पोरेट धोखाधड़ी के मामले के सिलसिले में प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत मामला दर्ज किया था।
एजेंसी इस नतीजे पर पहुंची कि T. वीना की कंपनी 'एक्सलॉजिक सॉल्यूशंस' को उन सेवाओं के लिए जो कथित तौर पर कभी दी ही नहीं गईं, जो पैसे दिए गए थे, वे असल में पिनाराई विजयन को दी गई रिश्वत थी, जो उस समय मुख्यमंत्री थे। ED ने राज्य पुलिस से प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट के तहत मामले की जांच करने को कहा था। हालांकि, जांच बिना FIR दर्ज किए ही आगे बढ़ गई, जिससे ED में कथित तौर पर नाराजगी थी। अब हाई कोर्ट के आदेश ने आगे की कार्रवाई का रास्ता साफ कर दिया है, जिससे ED अधिकारियों को राहत मिली है।
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