केरल

इदमलाकुडी में बीमार बुजुर्ग को ग्रामीणों ने डंडे के सहारे पहुंचाया अस्पताल, 8 किमी जंगल पार किया

Kavita2
13 Aug 2026 3:35 PM IST
इदमलाकुडी में बीमार बुजुर्ग को ग्रामीणों ने डंडे के सहारे पहुंचाया अस्पताल, 8 किमी जंगल पार किया
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इडुक्की। केरल के इदमलाकुडी इलाके से इंसानियत और ग्रामीणों के साहस की एक भावुक तस्वीर सामने आई है। गंभीर रूप से बीमार 75 वर्षीय बुजुर्ग को अस्पताल पहुंचाने के लिए गांव वालों ने मुश्किल भरे जंगल के रास्ते को पार किया। बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में ग्रामीणों ने लकड़ी के डंडे और कपड़े की मदद से बुजुर्ग को सहारा दिया और उन्हें अस्पताल तक पहुंचाया।

जानकारी के अनुसार, गुडल्लाराकुडी गांव के रहने वाले मलयप्पन (75) अचानक बीमार पड़ गए थे। उनकी हालत लगातार बिगड़ने लगी, जिसके बाद परिवार और ग्रामीणों ने उन्हें अस्पताल पहुंचाने का फैसला किया। लेकिन दुर्गम पहाड़ी और जंगल क्षेत्र होने के कारण वहां से मरीज को सीधे वाहन तक ले जाना आसान नहीं था।

ग्रामीणों ने हिम्मत दिखाते हुए एक लकड़ी के डंडे पर कपड़ा बांधा और उसे अस्थायी स्ट्रेचर की तरह इस्तेमाल किया। इसके बाद उन्होंने बुजुर्ग मलयप्पन को उस पर बैठाकर जंगल के रास्ते से अस्पताल की ओर ले जाना शुरू किया।

ग्रामीणों ने बताया कि मरीज को करीब आठ किलोमीटर से अधिक दूरी तक पैदल जंगल के रास्ते ले जाना पड़ा। इस दौरान रास्ता बेहद कठिन था और इलाके में जंगली हाथी और भैंसों की मौजूदगी का खतरा भी बना रहता है। इसके बावजूद ग्रामीणों ने हिम्मत नहीं हारी और बुजुर्ग की जान बचाने के लिए लगातार आगे बढ़ते रहे।

ग्रामीण पहले अनाकुलम पहुंचे। इसके बाद वहां से वाहन की मदद से मरीज को आदिमाली तालुक अस्पताल ले जाया गया। समय पर अस्पताल पहुंचने के बाद बुजुर्ग का इलाज शुरू किया गया।

ग्रामीणों ने बताया कि इदमलाकुडी इलाके में कई लोग इन दिनों उल्टी और दस्त जैसी बीमारियों से परेशान हैं। कुछ मरीजों की हालत गंभीर भी बताई जा रही है। स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच की कठिनाई के कारण लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इदमलाकुडी जैसे दुर्गम क्षेत्रों में आपात स्थिति में मरीजों को अस्पताल पहुंचाना बड़ी चुनौती है। खराब रास्ते और जंगल क्षेत्र के कारण एंबुलेंस जैसी सुविधाएं भी आसानी से उपलब्ध नहीं हो पातीं।

यह पहली बार नहीं है जब इस इलाके में बीमारी के कारण लोगों को ऐसी परेशानियों का सामना करना पड़ा है। पिछले साल भी इदमलाकुडी में कई तरह की संक्रामक बीमारियां फैल गई थीं। उस समय करीब 10 लोगों को इसी तरह कठिन रास्तों से अस्पताल पहुंचाया गया था, लेकिन कार्तिक नाम के एक बच्चे की मौत हो गई थी।

उस घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग ने इलाके में पहुंचकर बचाव और उपचार के उपाय तेज किए थे। विभाग की ओर से लोगों को स्वास्थ्य संबंधी सावधानियों के बारे में जानकारी दी गई थी और बीमारियों की निगरानी बढ़ाई गई थी।

इदमलाकुडी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के मेडिकल ऑफिसर डॉ. सकिल रामचंद्रन ने बताया कि बारिश के मौसम को देखते हुए पहले से ही बचाव और सावधानी के उपाय शुरू कर दिए गए थे। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग इलाके की स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है।

डॉ. रामचंद्रन ने बताया कि आशा कार्यकर्ताओं से मिलने वाली जानकारी के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि किसी व्यक्ति की हालत गंभीर पाई जाती है तो उसे तुरंत अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की जाएगी।

स्वास्थ्य विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें। खासकर उल्टी, दस्त, बुखार और कमजोरी जैसी समस्याओं को नजरअंदाज नहीं करने की सलाह दी गई है।

इदमलाकुडी की घटना एक बार फिर दूरदराज क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं और बेहतर सड़क संपर्क की जरूरत को उजागर करती है। जहां एक ओर ग्रामीणों के साहस और मानवता की प्रशंसा हो रही है, वहीं दूसरी ओर यह सवाल भी उठ रहा है कि आपात स्थिति में लोगों को समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए स्थायी समाधान कब तक तैयार होगा।

फिलहाल स्वास्थ्य विभाग की टीम इलाके में निगरानी बनाए हुए है और गंभीर मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।

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