
Kerala केरल: इदमलाकुडी क्षेत्र में हर बारिश के मौसम में जनजीवन गंभीर रूप से प्रभावित हो जाता है। यहां कई गांवों की सड़कें बारिश के दौरान बंद हो जाती हैं, जिससे बाहर गए लोग अपने घरों तक वापस नहीं लौट पाते। लंबे समय से चल रही इस समस्या का अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, पंचायत कार्यालय के पास बहने वाली मनलयार नदी पर पुल नहीं होने के कारण स्थिति और गंभीर हो जाती है। इस वजह से करीब 10 गांवों के लोगों का जीवन पूरी तरह प्रभावित हो रहा है। बारिश के दौरान नदी का जलस्तर बढ़ते ही आवागमन पूरी तरह ठप हो जाता है और इलाके अन्य क्षेत्रों से कट जाते हैं।
मॉनसून के समय जब मनलयार नदी का पानी किनारों से ऊपर बहने लगता है, तो 10 गांव पूरी तरह से बाहरी दुनिया से अलग हो जाते हैं। इससे लगभग 1,300 लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। लोगों का कहना है कि ऐसे समय में न तो वे बाहर जा पाते हैं और न ही आवश्यक सामान गांव तक पहुंच पाता है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि उन्होंने कई वर्षों से संबंधित अधिकारियों को इस समस्या के समाधान के लिए आवेदन दिए हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। प्रशासनिक स्तर पर केवल आश्वासन दिए जाते रहे हैं, जबकि जमीनी स्तर पर स्थिति जस की तस बनी हुई है।
इस समस्या का सबसे गंभीर प्रभाव खाद्य आपूर्ति पर पड़ता है। स्थानीय लोगों के अनुसार, वे इदमलाकुडी सोसाइटी से जरूरी राशन सामग्री प्राप्त करते हैं, लेकिन बारिश के दौरान नदी पार न कर पाने के कारण यह आपूर्ति बाधित हो जाती है।
ग्रामीणों ने चिंता जताई है कि यदि स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो कई बार भोजन की कमी और भुखमरी जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है। खासकर मानसून के दौरान जब रास्ते पूरी तरह बंद हो जाते हैं, तो लोगों के सामने दैनिक जरूरतों को पूरा करने का गंभीर संकट खड़ा हो जाता है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि पुल निर्माण न होने के कारण यह समस्या हर साल दोहराई जाती है, जिससे उनका सामान्य जीवन प्रभावित होता है। बच्चों की पढ़ाई, बीमार लोगों का इलाज और दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति सभी प्रभावित होती हैं।
लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द मनलयार नदी पर पुल का निर्माण कराया जाए, ताकि हर साल होने वाली इस परेशानी से स्थायी राहत मिल सके।
फिलहाल स्थिति यह है कि मानसून शुरू होते ही ये 10 गांव फिर से कट ऑफ हो जाते हैं और लोगों को एक बार फिर कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है।





