केरल

भारी बारिश ने मचाई तबाही, जिले में 30 घर पूरी तरह तबाह; सैकड़ों परिवार प्रभावित

Kavita2
2 Aug 2026 3:19 PM IST
भारी बारिश ने मचाई तबाही, जिले में 30 घर पूरी तरह तबाह; सैकड़ों परिवार प्रभावित
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इडुक्की। शुक्रवार रात से शनिवार सुबह तक हुई लगातार और मूसलाधार बारिश ने जिले में भारी तबाही मचा दी। बारिश के बाद कई परिवारों की जिंदगी पूरी तरह बदल गई। किसी ने अपने परिजनों को खो दिया तो किसी की वर्षों की मेहनत एक ही रात में बर्बाद हो गई। कई लोग घर उजड़ने के बाद राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं, जबकि बड़ी संख्या में किसान अपने खेतों को कीचड़ और मलबे में तब्दील होते देख रहे हैं।

प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, जिले में भारी बारिश और उससे जुड़ी घटनाओं के कारण 30 घर पूरी तरह नष्ट हो गए हैं, जबकि 48 मकानों को आंशिक नुकसान पहुंचा है। प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य तेज कर दिए हैं।

थोडुपुझा और पीरुमेडु में सबसे ज्यादा असर

बारिश का सबसे अधिक प्रभाव थोडुपुझा और पीरुमेडु तालुकों में देखने को मिला है। इन दोनों क्षेत्रों में 200 मिलीमीटर से अधिक बारिश दर्ज की गई, जिसके कारण कई स्थानों पर जलभराव, भूस्खलन और संपत्तियों को नुकसान पहुंचने की घटनाएं सामने आईं।

लगातार बारिश के कारण पहाड़ी इलाकों में मिट्टी कमजोर हो गई, जिससे कई जगहों पर भूस्खलन हुआ। इससे घरों, सड़कों और कृषि क्षेत्रों को नुकसान पहुंचा। प्रशासन के अनुसार, इन दोनों तालुकों में सबसे अधिक नुकसान दर्ज किया गया है और कुछ लोगों की मौत भी हुई है।

कई परिवारों का छिना आशियाना

बारिश के बाद सबसे बड़ी समस्या उन परिवारों के सामने खड़ी हो गई है, जिनके घर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। कई लोगों ने रातोंरात अपना घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर शरण ली।

प्रभावित लोगों का कहना है कि उन्होंने वर्षों की मेहनत से अपने घर बनाए थे, लेकिन कुछ घंटों की भारी बारिश ने सब कुछ खत्म कर दिया। कई परिवारों के पास अब केवल जरूरी सामान ही बचा है और वे राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं।

किसानों को भी भारी नुकसान

भारी बारिश का असर खेती पर भी पड़ा है। कई खेतों में पानी भर गया और मिट्टी बहने से फसलों को नुकसान पहुंचा है। किसानों का कहना है कि उन्होंने फसल तैयार करने में महीनों मेहनत की थी, लेकिन बारिश ने उनकी पूरी मेहनत बर्बाद कर दी।

खेतों में जमा कीचड़ और मलबे के कारण दोबारा खेती शुरू करना भी मुश्किल दिखाई दे रहा है। किसानों ने प्रशासन से आर्थिक सहायता और पुनर्वास की मांग की है।

राहत शिविरों में पहुंचाए गए प्रभावित लोग

जिला प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए राहत शिविर शुरू किए हैं। जिन परिवारों के घर रहने लायक नहीं बचे हैं, उन्हें इन शिविरों में ठहराया गया है।

शिविरों में भोजन, पानी, चिकित्सा और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है। प्रशासन और स्थानीय स्वयंसेवी संगठन मिलकर प्रभावित लोगों की मदद में जुटे हैं।

प्रशासन ने बढ़ाई निगरानी

भारी बारिश के बाद जिला प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है। राजस्व विभाग, आपदा प्रबंधन दल और स्थानीय अधिकारी प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर नुकसान का आकलन कर रहे हैं।

अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे खतरे वाले इलाकों में जाने से बचें और प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करें। मौसम विभाग की चेतावनियों को देखते हुए आने वाले दिनों में भी सतर्कता बरती जा रही है।

पहाड़ी इलाकों में बढ़ा खतरा

जिले का बड़ा हिस्सा पहाड़ी क्षेत्र में आता है, जहां मानसून के दौरान भूस्खलन और बाढ़ का खतरा बना रहता है। लगातार बारिश से पहाड़ियों की मिट्टी कमजोर हो जाती है, जिससे अचानक भूस्खलन जैसी घटनाएं हो सकती हैं।

प्रशासन ने ऐसे इलाकों में रहने वाले लोगों से विशेष सावधानी बरतने को कहा है। जरूरत पड़ने पर लोगों को पहले ही सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने की तैयारी भी की जा रही है।

नुकसान का आकलन जारी

फिलहाल प्रशासन की ओर से नुकसान का विस्तृत सर्वे किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती आंकड़े बढ़ सकते हैं क्योंकि कई दूरदराज इलाकों से अभी पूरी जानकारी नहीं मिल पाई है।

सरकार की ओर से प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिया गया है। राहत और पुनर्वास कार्यों के साथ-साथ क्षतिग्रस्त सड़कों और बुनियादी ढांचे को दुरुस्त करने की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है।

लगातार बारिश से हुई इस तबाही ने जिले में बड़ी मानवीय और आर्थिक चुनौती खड़ी कर दी है। प्रभावित परिवारों के लिए अब सबसे बड़ी जरूरत सुरक्षित आश्रय, राहत और जीवन को फिर से पटरी पर लाने की है।

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