केरल

पहाड़ी इलाकों में जंगली जानवरों का बढ़ता आतंक, भैंस और हाथी के हमलों से लोगों में डर

Kavita2
24 July 2026 3:22 PM IST
पहाड़ी इलाकों में जंगली जानवरों का बढ़ता आतंक, भैंस और हाथी के हमलों से लोगों में डर
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इडुक्की : केरल के पहाड़ी इलाकों में जंगली जानवरों की बढ़ती आवाजाही ने स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है। जंगलों से निकलकर जानवरों का इंसानी बस्तियों में पहुंचना अब लगातार बड़ी समस्या बनता जा रहा है। बाघ, तेंदुए, हाथी, जंगली भैंस और जंगली सूअर जैसे जानवर कई क्षेत्रों में लोगों के लिए खतरा बने हुए हैं।

हाल के दिनों में सामने आई कई घटनाओं ने मानव-वन्यजीव संघर्ष की गंभीरता को उजागर किया है। मरायूर में जंगली भैंस के हमले में पहली कक्षा का एक छात्र गंभीर रूप से घायल हो गया, जबकि मुन्नार की साइलेंट वैली में ‘पदायप्पा’ नाम के जंगली हाथी से जुड़ी घटनाओं ने भी लोगों में डर पैदा कर दिया है।

मरायूर में भैंस के हमले से छात्र घायल

मरायूर क्षेत्र में हुई घटना ने स्थानीय लोगों को झकझोर दिया। जानकारी के अनुसार, पहली कक्षा में पढ़ने वाला एक छात्र जंगली भैंस के हमले का शिकार हो गया। हमले में छात्र गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसके बाद उसे इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया।

स्थानीय लोगों का कहना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में जंगली जानवरों की आवाजाही बढ़ने से बच्चों और ग्रामीणों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। स्कूल जाने वाले बच्चों को भी अब अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ रही है।

हाथी ‘पदायप्पा’ की गतिविधियों से बढ़ी चिंता

मुन्नार की साइलेंट वैली क्षेत्र में ‘पदायप्पा’ नाम के जंगली हाथी की गतिविधियां भी चर्चा में रही हैं। यह हाथी कई बार मानव आबादी के आसपास पहुंच चुका है, जिससे स्थानीय निवासियों और पर्यटकों में डर का माहौल बना है।

वन विभाग की ओर से ऐसे जानवरों की निगरानी की जाती है, लेकिन पहाड़ी क्षेत्रों में जंगल और आबादी के बीच बढ़ती नजदीकी के कारण संघर्ष की घटनाओं को पूरी तरह रोकना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती समस्या

केरल के पहाड़ी जिलों में जंगलों के आसपास रहने वाले लोग लंबे समय से जंगली जानवरों की समस्या का सामना कर रहे हैं। खेती, घरों और सड़कों के आसपास वन्यजीवों की मौजूदगी से लोगों की सुरक्षा और आजीविका दोनों प्रभावित हो रही हैं।

कई बार हाथी फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं, जबकि तेंदुए और बाघ जैसे शिकारी जानवर पालतू पशुओं और इंसानों के लिए खतरा बन जाते हैं। जंगली सूअर भी खेतों को नुकसान पहुंचाने के साथ लोगों पर हमला कर सकते हैं।

जंगल और आबादी के बीच घटता अंतर

विशेषज्ञों का कहना है कि जंगलों में बदलाव, भोजन और पानी की तलाश तथा मानव गतिविधियों के विस्तार के कारण वन्यजीव अक्सर अपने प्राकृतिक आवास से बाहर निकल आते हैं।

पहाड़ी इलाकों में सड़क निर्माण, पर्यटन गतिविधियों और अन्य विकास कार्यों के कारण जंगलों और मानव बस्तियों के बीच दूरी कम हो रही है। इसका असर वन्यजीवों के व्यवहार पर भी पड़ रहा है।

सुरक्षा उपायों की मांग

स्थानीय लोग वन विभाग से सुरक्षा उपायों को मजबूत करने की मांग कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि संवेदनशील इलाकों में नियमित निगरानी, चेतावनी प्रणाली और त्वरित कार्रवाई की व्यवस्था होनी चाहिए।

लोगों की मांग है कि वन विभाग को ऐसे क्षेत्रों की पहचान करनी चाहिए जहां जंगली जानवरों के आने की संभावना अधिक रहती है, ताकि पहले से तैयारी की जा सके।

वन विभाग की चुनौती

वन विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वन्यजीवों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जाए और लोगों की जान-माल की रक्षा भी हो। वन्यजीव संरक्षण कानूनों के तहत जानवरों को नुकसान पहुंचाए बिना संघर्ष को कम करने के उपाय तलाशने पड़ते हैं।

अधिकारियों की ओर से आमतौर पर लोगों को सलाह दी जाती है कि वे जंगली जानवरों के करीब न जाएं, उन्हें उकसाने की कोशिश न करें और किसी भी गतिविधि की जानकारी तुरंत वन विभाग को दें।

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