केरल

केरल के पूर्व CM पिनाराई विजयन की हाई कोर्ट में 4 अपीलें

Ratna Netam
12 Oct 2026 8:27 PM IST
केरल के पूर्व CM पिनाराई विजयन की हाई कोर्ट में 4 अपीलें
x
तिरुवनंतपुरम। केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने विवादित मासिक भुगतान मामले, जिसे 'मासाप्पाडी' के नाम से जाना जाता है, में केरल हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी है। सोमवार को उन्होंने हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच के समक्ष चार अपीलें दायर कीं। इन अपीलों में उस न्यायिक आदेश पर सवाल उठाए गए हैं, जिसके तहत विजयन और पूर्व लोक निर्माण विभाग मंत्री पी.ए. मोहम्मद रियास के खिलाफ मामला दर्ज करने का निर्देश दिया गया था। अपीलकर्ताओं ने दावा किया है कि आदेश पारित करने से पहले उन्हें नोटिस नहीं दिया गया और न ही अपना पक्ष रखने का अवसर प्रदान किया गया।यह मामला एक निजी खनन कंपनी और प्रमुख राजनीतिक नेताओं तथा संस्थाओं के बीच कथित अवैध वित्तीय लेन-देन के आरोपों से जुड़ा है। इस संबंध में दायर याचिका में आरोपों की विस्तृत जांच कराने की मांग की गई थी। उसी याचिका पर विचार करते हुए अदालत ने संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। अब इस आदेश की वैधानिकता को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच से हस्तक्षेप की मांग की गई है।अपीलों पर मंगलवार सुबह सुनवाई होने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में मामले से जुड़े पक्षों और आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिहाज से यह सुनवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
मासाप्पाडी मामले में हाई कोर्ट पहुंचे पिनाराई विजयन
केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने सोमवार को हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच में चार अपीलें दाखिल कीं।इन अपीलों के माध्यम से उन्होंने अपने और पूर्व मंत्री पी.ए. मोहम्मद रियास के खिलाफ मामला दर्ज करने संबंधी आदेश को चुनौती दी है।अपीलकर्ताओं का कहना है कि संबंधित आदेश पारित करते समय न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं का पालन नहीं किया गया।उन्होंने विशेष रूप से नोटिस और सुनवाई का अवसर नहीं दिए जाने का मुद्दा उठाया है।इसके अलावा अपील में अदालत के आदेश और कार्यपालिका के अधिकार क्षेत्र से संबंधित कानूनी सवाल भी उठाए गए हैं।
क्या है मासाप्पाडी मामला?
मासाप्पाडी मामला कथित मासिक भुगतान और वित्तीय लेन-देन से जुड़े आरोपों के कारण चर्चा में है।इस मामले में एक निजी खनन कंपनी और राजनीतिक नेताओं तथा संस्थाओं के बीच कथित अवैध धन के लेन-देन का मुद्दा उठाया गया था।इन्हीं आरोपों की विस्तृत जांच की मांग करते हुए अदालत में याचिका दाखिल की गई थी।याचिका पर विचार करते हुए अदालत ने संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज करने का निर्देश दिया।हालांकि, किसी व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज करने का आदेश उसके दोषी होने का प्रमाण नहीं होता।आरोपों की सत्यता का निर्धारण जांच और आगे की न्यायिक प्रक्रिया में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर किया जाता है।
बिना नोटिस दिए आदेश पारित करने का आरोप
पिनाराई विजयन की ओर से दायर अपीलों में सबसे प्रमुख आपत्ति यह है कि अदालत ने संबंधित आदेश पारित करने से पहले आरोपियों को नोटिस नहीं दिया।अपील में दावा किया गया है कि संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर भी नहीं मिला।अपीलकर्ताओं ने इसे न्यायिक प्रक्रिया से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बताया है।उनका कहना है कि जिस आदेश का सीधा प्रभाव संबंधित व्यक्तियों पर पड़ता है, उस संबंध में उनकी बात सुनी जानी चाहिए थी।हालांकि, इस दलील को स्वीकार करना है या नहीं, इसका निर्णय हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच करेगी।
कार्यपालिका के अधिकार क्षेत्र का भी उठाया सवाल
अपील में यह तर्क भी दिया गया है कि संबंधित न्यायिक आदेश कार्यपालिका के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप करता है।अपीलकर्ताओं के अनुसार, प्रारंभिक जांच और उससे संबंधित निर्णयों के संदर्भ में अदालत के निर्देशों की वैधानिकता पर विचार किया जाना आवश्यक है।यह सवाल न्यायपालिका और कार्यपालिका की निर्धारित भूमिकाओं से जुड़ा है।भारतीय संवैधानिक व्यवस्था में दोनों संस्थाओं की अलग-अलग जिम्मेदारियां हैं।हालांकि, न्यायालयों को कानून के अनुसार प्रशासनिक और जांच संबंधी कार्रवाइयों की न्यायिक समीक्षा करने का अधिकार भी प्राप्त है।ऐसे में इस मामले में अधिकार क्षेत्र संबंधी आपत्ति कितनी उचित है, इसका फैसला संबंधित कानूनी प्रावधानों और मामले की परिस्थितियों के आधार पर होगा।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का दिया हवाला
अपील में प्रारंभिक जांच से संबंधित सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का भी उल्लेख किया गया है।अपीलकर्ताओं ने दावा किया है कि प्रारंभिक जांच को रद्द करने संबंधी मौजूदा फैसला सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप नहीं है।उनका कहना है कि इस कानूनी पहलू की समीक्षा की जानी चाहिए।हालांकि, उपलब्ध जानकारी में सुप्रीम कोर्ट के जिस विशिष्ट आदेश या निर्णय का हवाला दिया गया है, उसका विस्तृत विवरण शामिल नहीं है।इसलिए संबंधित न्यायिक मिसाल के बारे में कोई निश्चित निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।डिवीजन बेंच के सामने इस दलील पर भी विचार किए जाने की संभावना है।
सुप्रीम कोर्ट जाने की अनुमति भी मांगी
चार अपीलों में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करने की अनुमति का अनुरोध भी किया गया है।अपीलकर्ताओं ने अपने कानूनी विकल्पों के तहत उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की बात उठाई है।हालांकि, सुप्रीम कोर्ट जाने की अनुमति मांगे जाने का अर्थ यह नहीं है कि ऐसी अनुमति पहले ही प्रदान कर दी गई है।इस संबंध में आगे की स्थिति हाई कोर्ट के आदेश और लागू कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।फिलहाल डिवीजन बेंच के समक्ष दाखिल अपीलों पर विचार किया जाना है।
पूर्व मंत्री पी.ए. मोहम्मद रियास का भी नाम
इस मामले में पूर्व लोक निर्माण विभाग मंत्री पी.ए. मोहम्मद रियास का नाम भी शामिल है।जिस आदेश को चुनौती दी गई है, उसमें पिनाराई विजयन के साथ रियास के खिलाफ भी मामला दर्ज करने का निर्देश दिया गया था।इसलिए अपीलों का प्रभाव दोनों नेताओं से संबंधित कानूनी कार्यवाही पर पड़ सकता है।हालांकि, उपलब्ध जानकारी में दोनों नेताओं के खिलाफ लगाए गए विशिष्ट आरोपों या उनके संबंध में प्रस्तुत साक्ष्यों का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है।ऐसे में आरोपों की प्रकृति और उनकी सत्यता को लेकर किसी अतिरिक्त निष्कर्ष से बचना आवश्यक है।निजी खनन कंपनी से जुड़े वित्तीय लेन-देन की जांच की मांगमूल याचिका में एक निजी खनन कंपनी और राजनीतिक नेताओं तथा संस्थाओं के बीच कथित अवैध धन के लेन-देन की विस्तृत जांच कराने की मांग की गई थी।याचिकाकर्ता ने आरोपों की जांच आवश्यक बताते हुए अदालत से हस्तक्षेप का अनुरोध किया था।इसी याचिका पर सुनवाई के दौरान संबंधित आदेश पारित किया गया।अब अपीलकर्ताओं ने उस आदेश की प्रक्रिया और वैधानिक आधार पर सवाल उठाए हैं।इस प्रकार मामला दो अलग-अलग पहलुओं से जुड़ा है। पहला, कथित वित्तीय लेन-देन के आरोपों की जांच और दूसरा, जांच या मामला दर्ज करने के निर्देश की कानूनी वैधता।इन दोनों विषयों पर अदालत की आगे की कार्यवाही महत्वपूर्ण होगी।
मंगलवार सुबह डिवीजन बेंच करेगी विचार
केरल हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच मंगलवार सुबह इन अपीलों पर विचार करेगी।सुनवाई के दौरान अपीलकर्ताओं की ओर से उठाए गए कानूनी सवाल अदालत के सामने रखे जाएंगे।इनमें नोटिस नहीं दिए जाने, सुनवाई का अवसर न मिलने, कार्यपालिका के अधिकार क्षेत्र और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों से संबंधित आपत्तियां शामिल हैं।अदालत इन दलीलों पर क्या रुख अपनाती है, यह सुनवाई के बाद स्पष्ट होगा।फिलहाल अपील दाखिल होने मात्र से पूर्व आदेश स्वतः निरस्त या स्थगित नहीं माना जा सकता। इसके लिए संबंधित न्यायिक आदेश आवश्यक होगा।
अदालत के अगले फैसले पर नजर
मासाप्पाडी मामले में पिनाराई विजयन की ओर से चार अपीलें दाखिल किए जाने के बाद कानूनी कार्यवाही एक नए चरण में पहुंच गई है।पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने और पी.ए. मोहम्मद रियास के खिलाफ मामला दर्ज करने के आदेश को चुनौती देते हुए न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े कई सवाल उठाए हैं।अपील में कहा गया है कि संबंधित पक्षों को सुनवाई का अवसर नहीं दिया गया और आदेश कार्यपालिका के अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन करता है।इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला देते हुए उच्चतम न्यायालय में याचिका दाखिल करने की अनुमति भी मांगी गई है।अब मंगलवार सुबह होने वाली सुनवाई में यह स्पष्ट हो सकेगा कि हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच इन अपीलों पर क्या निर्णय लेती है और मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया किस दिशा में बढ़ती है।
Next Story