
Kerala केरल: कासरगोड जिले की 87.65 किलोमीटर लंबी तटीय (कोस्टलाइन) पट्टी पर इस साल अतिक्रमण कम करने के लिए कोई ठोस योजना आगे नहीं बढ़ पाई है। कासरगोड इरिगेशन सब-डिपार्टमेंट द्वारा तैयार किया गया प्रस्ताव अभी तक स्वीकृति या निर्णय के अभाव में लंबित पड़ा हुआ है, जिससे तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों में निराशा और चिंता बढ़ती जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल आने वाले तूफानों और समुद्री आपदाओं की वजह से तटीय क्षेत्र लगातार प्रभावित होते हैं। समुद्र की तेज लहरों और प्राकृतिक आपदाओं के कारण कई परिवारों को अपने घर, जमीन और आजीविका तक गंवानी पड़ती है। इसके बावजूद स्थायी सुरक्षा उपायों पर अपेक्षित प्रगति नहीं हो पा रही है।
पिछले लगभग दस वर्षों से जिले के तटीय क्षेत्रों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। समुद्र के बढ़ते कटाव और अतिक्रमण के कारण कई गांवों का अस्तित्व खतरे में है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि हर साल स्थिति और गंभीर होती जा रही है, लेकिन समाधान के प्रयास धीमे हैं।
इरिगेशन विभाग द्वारा तैयार किया गया अतिक्रमण नियंत्रण प्लान प्रशासनिक स्तर पर अटका हुआ है। इस योजना के लागू न होने के कारण तटीय सुरक्षा उपायों को जमीन पर उतारा नहीं जा सका है। इससे लोगों की सुरक्षा और भविष्य दोनों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों का कहना है कि वे लगातार खतरे के साये में जीवन जीने को मजबूर हैं। बारिश और समुद्री तूफानों के समय स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, जब पानी गांवों के भीतर तक पहुंच जाता है और भारी नुकसान होता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते तटीय संरक्षण के लिए मजबूत कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में स्थिति और खराब हो सकती है। समुद्री कटाव और अतिक्रमण को रोकने के लिए दीर्घकालिक और प्रभावी योजना की आवश्यकता है।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से जल्द से जल्द लंबित योजना को मंजूरी देने और तटीय सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है। उनका कहना है कि केवल योजनाएं बनाने से नहीं, बल्कि उन्हें जमीन पर लागू करने से ही वास्तविक समाधान संभव है।
कुल मिलाकर, कासरगोड की तटीय पट्टी में अतिक्रमण नियंत्रण योजना का लंबित रहना और प्रशासनिक देरी ने तटीय लोगों की चिंताओं को और बढ़ा दिया है, जबकि वे लगातार प्राकृतिक आपदाओं के खतरे के बीच जीवन जीने को मजबूर हैं।





