
कुम्मानूर। क्षेत्र में आवारा कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। कुम्मानूर के मुलंथरा इलाके में एक आवारा कुत्ते के हमले में 65 वर्षीय व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल है। लोगों का कहना है कि इलाके में आवारा कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे सड़क पर चलना भी मुश्किल हो गया है।
जानकारी के अनुसार, मुलंथरा कुलंगरा निवासी थंकाचन (65) सोमवार शाम मुलंथरा जंक्शन से अपने घर लौट रहे थे। इसी दौरान रास्ते में एक आवारा कुत्ते ने अचानक उन पर हमला कर दिया। कुत्ते के हमले में थंकाचन के सिर, हाथ और पैरों में चोटें आईं। अचानक हुए हमले से वह संभल नहीं पाए और मदद के लिए आसपास के लोगों ने मौके पर पहुंचकर उन्हें बचाया।
घटना के बाद पड़ोसियों ने तुरंत घायल थंकाचन को इलाज के लिए कोन्नी मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल में डॉक्टरों ने उनका उपचार शुरू किया। बताया गया कि कुत्ते के काटने से उनके शरीर के कई हिस्सों में घाव हुए हैं। समय पर अस्पताल पहुंचने के कारण उनका इलाज शुरू किया जा सका।
स्थानीय निवासियों के अनुसार, मुलंथरा और आसपास के क्षेत्रों में पिछले कुछ समय से आवारा कुत्तों की समस्या गंभीर होती जा रही है। कई स्थानों पर बड़ी संख्या में आवारा कुत्ते घूमते रहते हैं, जिससे राहगीरों में भय बना रहता है। खासकर सुबह और शाम के समय जब लोग पैदल निकलते हैं, तब कुत्तों के हमले का खतरा अधिक रहता है।
लोगों का कहना है कि सबसे ज्यादा परेशानी बुजुर्गों, बच्चों और महिलाओं को हो रही है। छोटे बच्चों को अकेले बाहर भेजने से अभिभावक डरते हैं, वहीं बुजुर्गों के लिए सड़क पर चलना चुनौती बन गया है। कई लोगों ने प्रशासन से पहले भी इस समस्या के समाधान की मांग की है, लेकिन अब तक कोई स्थायी व्यवस्था नहीं हो पाई है।
स्थानीय लोगों ने बताया कि आवारा कुत्तों के झुंड कई जगहों पर दिखाई देते हैं। ये कुत्ते कई बार राहगीरों का पीछा करते हैं और अचानक हमला कर देते हैं। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में बड़ी घटनाएं हो सकती हैं।
लगातार बढ़ रही घटनाओं को देखते हुए मुलंथरा जनकीय पुरावर समिति ने आवारा कुत्तों की समस्या के स्थायी समाधान की मांग की है। समिति के सदस्यों का कहना है कि केवल अस्थायी उपायों से समस्या का समाधान नहीं होगा। प्रशासन को वैज्ञानिक तरीके से आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रित करने और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
समिति ने मांग की है कि इलाके में आवारा कुत्तों की पहचान कर आवश्यक कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही लोगों को सुरक्षित रखने के लिए स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों को मिलकर काम करना चाहिए। लोगों का कहना है कि सार्वजनिक स्थानों पर घूमने वाले आवारा कुत्तों के कारण आम नागरिकों का जीवन प्रभावित हो रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, आवारा कुत्तों के हमलों को रोकने के लिए नियमित निगरानी, पशु जन्म नियंत्रण कार्यक्रम और लोगों में जागरूकता जरूरी है। केवल कुत्तों को हटाने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकता। इसके लिए स्थानीय निकायों को लगातार अभियान चलाने की आवश्यकता है।
घटना के बाद मुलंथरा क्षेत्र के लोगों ने प्रशासन से जल्द हस्तक्षेप करने की अपील की है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि सड़क पर सुरक्षित माहौल बनाना प्रशासन की जिम्मेदारी है। लोगों को डर के माहौल में जीवन नहीं बिताना चाहिए।
फिलहाल घायल थंकाचन का अस्पताल में इलाज जारी है। वहीं, इस घटना ने एक बार फिर इलाके में आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या को सामने ला दिया है। स्थानीय लोग अब प्रशासन से उम्मीद कर रहे हैं कि उनकी सुरक्षा के लिए जल्द प्रभावी कदम उठाए जाएंगे, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।





