
मांड्या। कावेरी नदी के जल बंटवारे को लेकर जारी विवाद के बीच कर्नाटक के कृष्णराज सागर (KRS) जलाशय से तमिलनाडु के लिए पानी छोड़े जाने का मामला सामने आया है। बीजेपी की मांड्या इकाई के प्रवक्ता मंजूनाथ सिटी ने दावा किया कि शनिवार देर रात KRS जलाशय से तमिलनाडु के लिए पानी छोड़ा गया।
मंजूनाथ ने बताया कि कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) के निर्देश के बाद यह कदम उठाया गया है। प्राधिकरण ने कर्नाटक को 15 दिनों तक तमिलनाडु के लिए प्रतिदिन 12,000 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्देश दिया था।
कृष्णराज सागर बांध कर्नाटक के मांड्या जिले में स्थित है और कावेरी नदी पर बने प्रमुख जलाशयों में से एक है। इस बांध से छोड़ा गया पानी कावेरी नदी के प्रवाह को प्रभावित करता है।
देर रात छोड़ा गया पानी
बीजेपी नेता मंजूनाथ सिटी ने कहा कि KRS बांध से देर रात पानी छोड़ा गया। उन्होंने दावा किया कि पानी छोड़े जाने के बाद कावेरी नदी में जलस्तर बढ़ गया है।
उन्होंने कहा कि यह फैसला कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण के निर्देशों के तहत लिया गया है। हालांकि, उन्होंने राज्य सरकार के पहले के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार ने पहले पानी छोड़ने से इनकार करने की बात कही थी।
सरकार के रुख पर बीजेपी का हमला
मंजूनाथ ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने किसानों और आम लोगों की पानी की जरूरतों का हवाला देते हुए तमिलनाडु को पानी नहीं देने की बात कही थी।
उन्होंने कहा कि जब सरकार पहले ही जल उपलब्धता और पेयजल संकट को लेकर चिंता जता चुकी थी, तो फिर रात के समय पानी छोड़ने का फैसला क्यों लिया गया।
बीजेपी नेता ने इस मामले में सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।
CWMA के निर्देश के बाद बढ़ा दबाव
कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से जारी निर्देश के बाद कर्नाटक पर तमिलनाडु को पानी छोड़ने का दबाव बढ़ गया था।
कावेरी नदी के पानी को लेकर दोनों राज्यों के बीच लंबे समय से विवाद चला आ रहा है। जल बंटवारे का मुद्दा हर साल मानसून और जल उपलब्धता के आधार पर राजनीतिक रूप से संवेदनशील बन जाता है।
किसानों की चिंता बनी हुई
कर्नाटक के मांड्या समेत कावेरी बेसिन के कई क्षेत्रों में किसान सिंचाई के लिए नदी के पानी पर निर्भर हैं। ऐसे में तमिलनाडु के लिए पानी छोड़े जाने की खबर के बाद किसानों की चिंता बढ़ गई है।
किसान संगठनों का कहना है कि राज्य में उपलब्ध जल संसाधनों का आकलन करने के बाद ही पानी छोड़ा जाना चाहिए, ताकि स्थानीय किसानों और पेयजल जरूरतों पर असर न पड़े।
कावेरी विवाद का लंबा इतिहास
कावेरी नदी के पानी को लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच कई दशकों से विवाद चला आ रहा है। दोनों राज्य नदी के पानी पर अपने-अपने अधिकार का दावा करते रहे हैं।
कावेरी जल विवाद से जुड़े मामलों के समाधान के लिए केंद्र सरकार ने कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण का गठन किया है, जो समय-समय पर दोनों राज्यों के बीच पानी के बंटवारे को लेकर निर्देश जारी करता है।
मांड्या में राजनीतिक हलचल तेज
KRS बांध से पानी छोड़े जाने के बाद मांड्या जिले में राजनीतिक गतिविधियां तेज होने की संभावना है। बीजेपी ने इस मुद्दे को लेकर सरकार को घेरना शुरू कर दिया है।
वहीं, राज्य सरकार की ओर से अभी इस मामले पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। सरकार की ओर से स्थिति स्पष्ट किए जाने के बाद ही पानी छोड़े जाने के कारणों और आगे की रणनीति की जानकारी मिल सकेगी।
आगे की स्थिति पर नजर
फिलहाल कावेरी जल विवाद एक बार फिर चर्चा में है। एक ओर जहां प्राधिकरण के निर्देशों का पालन करने की बात सामने आ रही है, वहीं दूसरी ओर राज्य के किसानों की चिंताओं को लेकर राजनीतिक बहस शुरू हो गई है।
KRS जलाशय से तमिलनाडु के लिए पानी छोड़े जाने के बाद आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना है।





