
Kerala केरल: केरल के इडुक्की जिले के ऊंचे और आदिवासी इलाकों में नेशनल रूरल एम्प्लॉयमेंट गारंटी स्कीम (मनरेगा) के तहत काम कर रहे मजदूरों को डिजिटल अटेंडेंस प्रणाली के कारण गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इन क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क कवरेज नहीं होने से योजना के क्रियान्वयन पर असर पड़ा है।
फरवरी से ‘नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम (NMMS)’ ऐप के माध्यम से उपस्थिति दर्ज करना अनिवार्य किए जाने के बाद स्थिति और अधिक गंभीर हो गई है। इस व्यवस्था के तहत मजदूरों की ऑनलाइन हाजिरी दर्ज करना जरूरी है, लेकिन इडुक्की के कई ग्रामीण और ऊंचाई वाले इलाकों में मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध नहीं होने से यह प्रक्रिया संभव नहीं हो पा रही है।
इस कारण मरयूर, इदमालकुडी, शांतनपारा और आदिमाली पंचायतों के कई वार्डों में मनरेगा के कार्य लगभग ठप पड़ गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जहां नेटवर्क उपलब्ध नहीं है, वहां मजदूर अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं कर पा रहे हैं, जिससे उन्हें काम का रिकॉर्ड नहीं मिल रहा और भुगतान भी रुक गया है।
आदिवासी मजदूरों और ग्रामीणों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि उनकी आजीविका पूरी तरह मनरेगा पर निर्भर है। डिजिटल प्रणाली के कारण काम के बावजूद मजदूरी का भुगतान नहीं हो पा रहा है, जिससे आर्थिक संकट की स्थिति पैदा हो गई है।
इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए सांसद डीन कुरियाकोस ने केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने आग्रह किया है कि ऐसे क्षेत्रों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था बनाई जाए, जहां नेटवर्क की समस्या के कारण डिजिटल उपस्थिति संभव नहीं है।
स्थानीय प्रतिनिधियों का कहना है कि इन दुर्गम इलाकों में पहले से ही बुनियादी सुविधाओं की कमी है और अब डिजिटल प्रणाली ने मजदूरों की समस्याओं को और बढ़ा दिया है। लोगों ने मांग की है कि या तो नेटवर्क सुविधा को मजबूत किया जाए या फिर ऑफलाइन अटेंडेंस प्रणाली को फिर से लागू किया जाए।
कुल मिलाकर, इडुक्की के आदिवासी और पहाड़ी क्षेत्रों में डिजिटल अटेंडेंस सिस्टम के कारण मनरेगा कार्यों पर गंभीर असर पड़ा है और मजदूरों की आजीविका पर संकट गहरा गया है, जिससे तत्काल समाधान की आवश्यकता जताई जा रही है।





