केरल

पुलिस के रवैये पर बहस: सुहैल सजीव को बोर्स्टल स्कूल भेजने पर विवाद

Tara Tandi
13 Oct 2026 7:04 PM IST
पुलिस के रवैये पर बहस: सुहैल सजीव को बोर्स्टल स्कूल भेजने पर विवाद
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केरल: नेडुम्बसेरी में मिनी कूपर कार दुर्घटना, जिसमें तीन लोगों की जान चली गई थी, के आरोपी सुहेल सजीव को कक्कानाड बोर्स्टल स्कूल में रखा जाएगा। 19 साल के आरोपी को आम जेल के बजाय बोर्स्टल स्कूल भेजने को लेकर काफी बहस हो रही है। क्या यह जुवेनाइल होम (बाल सुधार गृह) है? वहां क्या सुविधाएं हैं और यह दूसरी जेलों से कैसे अलग है?
बोर्स्टल स्कूल सिस्टम भारत में ब्रिटिश शासन के दौरान आया था। ये स्कूल इस सोच पर आधारित थे कि युवा अपराधियों पर जीवन भर अपराधी होने का ठप्पा नहीं लगना चाहिए, बल्कि उन्हें सुधारा जाना चाहिए और मुख्यधारा के समाज में फिर से शामिल किया जाना चाहिए। आम जेलों में सज़ा देने के तरीकों के उलट, ये संस्थान शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण, खेल गतिविधियों, अनुशासन और सामाजिक पुनर्वास पर ज़ोर देते हैं।
बोर्स्टल एक सुधार और पुनर्वास केंद्र है जिसे 18 से 21 साल के युवा अपराधियों को रखने के लिए बनाया गया है। केरल का एकमात्र बोर्स्टल स्कूल एर्नाकुलम ज़िले के थ्रिक्काकारा में है। यह संस्थान छह एकड़ के कैंपस में चलता है और इसमें 16 सेल हैं, जिनकी कुल क्षमता 66 कैदियों को रखने की है। आम जेलों के उलट, जिनका ध्यान कैद रखने पर होता है, यह केंद्र इन युवाओं को सुधारने और समाज में फिर से शामिल होने में मदद करने के लिए प्रशिक्षण और मार्गदर्शन को प्राथमिकता देता है। 21 साल से कम उम्र के आरोपियों को दूसरे कैदियों के साथ आम जेलों में रखने से युवाओं के व्यवहार और नज़रिए पर बुरा असर पड़ सकता है।
कभी-कभी यह बदलाव ऐसा हो सकता है जिसे ठीक न किया जा सके। बोर्स्टल स्कूलों का मुख्य मकसद ऐसी स्थितियों से बचना, युवा अपराधियों को अपराध की दुनिया से दूर रखना और उनके सामाजिक पुनर्वास में मदद करना है। हालांकि, बोर्स्टल स्कूल में रखे जाने से आरोपी अपराध से बरी नहीं हो जाता और न ही सज़ा कम होने की गारंटी मिलती है। जांच, अपराध साबित होना और सज़ा सुनाना आम कानूनी प्रक्रियाओं के अनुसार ही होता है। बोर्स्टल स्कूल जुवेनाइल होम से अलग होते हैं, जो जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत 18 साल से कम उम्र के बच्चों से जुड़े मामलों को देखते हैं।
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