
तिरुवनंतपुरम। केरल के परिवहन मंत्री सीपी जॉन अपने एक बयान को लेकर विवादों में घिर गए हैं। महिलाओं को लेकर दिए गए बयान पर राजनीतिक विरोध शुरू होने के बाद मंत्री ने सफाई देते हुए खेद जताया है। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी को ठेस पहुंचाना या अपमानित करना नहीं था, लेकिन उन्हें अपने शब्दों के चयन में अधिक सावधानी बरतनी चाहिए थी।
मंत्री सीपी जॉन ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि यदि उनकी बातों से किसी को दुख पहुंचा है तो वह इसके लिए माफी मांगते हैं। उन्होंने कहा कि उनका इरादा किसी महिला या किसी वर्ग का अपमान करने का नहीं था। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार की मुफ्त ‘प्रियदर्शिनी बस यात्रा योजना’ जारी रहेगी, क्योंकि यह संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (UDF) सरकार की महत्वपूर्ण योजनाओं में से एक है।
दरअसल, मंत्री ने एक कार्यक्रम के दौरान टिप्पणी की थी कि जो महिलाएं सरकार की मुफ्त बस यात्रा योजना और सरकारी अस्पतालों की सुविधाओं का लाभ उठाती हैं, वे अपने बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाना पसंद करती हैं। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में प्रतिक्रिया शुरू हो गई।
विपक्षी दलों और कुछ संगठनों ने मंत्री के बयान को महिलाओं के प्रति आपत्तिजनक बताते हुए सवाल उठाए। विवाद बढ़ने के बाद मंत्री ने अपनी टिप्पणी को लेकर सफाई दी और कहा कि उनकी बातों का गलत अर्थ निकाला गया।
सीपी जॉन ने कहा कि वह एक छोटे कार्यक्रम में संबोधन कर रहे थे और बातचीत के दौरान कुछ शब्दों का चयन सही नहीं हो पाया। उन्होंने स्वीकार किया कि उन्हें बोलते समय अधिक सतर्क रहना चाहिए था।
मंत्री ने कहा, "मुझे शब्दों के चयन में सावधानी बरतनी चाहिए थी। मुझे ऐसा नहीं कहना चाहिए था। इसे स्वीकार करने में मुझे कोई झूठा अहंकार नहीं है और जो मैंने कहा, उस पर खेद जताने में भी मुझे कोई परेशानी नहीं है।"
उन्होंने दोहराया कि प्रियदर्शिनी योजना महिलाओं के लिए शुरू की गई एक महत्वपूर्ण पहल है और सरकार इसे जारी रखेगी। उन्होंने कहा कि इस योजना का उद्देश्य महिलाओं को बेहतर परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना है और इसके प्रति सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
प्रियदर्शिनी बस यात्रा योजना के तहत महिलाओं को सार्वजनिक परिवहन में मुफ्त यात्रा की सुविधा दी जाती है। सरकार का उद्देश्य इस योजना के माध्यम से महिलाओं की आवाजाही को आसान बनाना और उन्हें आर्थिक राहत देना है।
मंत्री के बयान के बाद उठे विवाद ने एक बार फिर सार्वजनिक मंचों पर नेताओं की भाषा और जिम्मेदारी को लेकर चर्चा शुरू कर दी है। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों के बयान समाज में व्यापक प्रभाव डालते हैं, इसलिए उन्हें संवेदनशील मुद्दों पर बोलते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
वहीं, मंत्री के खेद जताने के बाद विवाद को शांत करने की कोशिश की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी मंशा महिलाओं की आलोचना करना नहीं थी और वह सरकार की योजनाओं को लेकर पूरी तरह सकारात्मक हैं।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, केरल में सामाजिक योजनाएं और कल्याणकारी कार्यक्रम हमेशा से राजनीतिक बहस का हिस्सा रहे हैं। ऐसे में किसी योजना से जुड़े बयान पर प्रतिक्रिया आना स्वाभाविक है।
फिलहाल सीपी जॉन के बयान और बाद में दिए गए स्पष्टीकरण के बाद मामला राजनीतिक चर्चा में बना हुआ है। मंत्री की ओर से खेद जताए जाने के बाद अब नजर इस बात पर है कि विपक्ष इस मुद्दे को आगे किस तरह उठाता है।





