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Kerala केरल: मंत्री साजी चेरियन के विवादित बयान के बाद कांग्रेस सांसद शफी परांबिल ने सोमवार को तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह असंवैधानिक है और एक राजनीतिक नेता तथा सार्वजनिक कार्यकर्ता के लिए ऐसा करना अनुपयुक्त और अपमानजनक है। परांबिल ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा नेतृत्व अब यह समझ गया है कि राज्य में नफरत फैलाने में भाजपा से ज्यादा क्षमता CPI(M) में है।
सांसद ने कहा कि साजी चेरियन के बयान का उद्देश्य केवल वर्तमान राज्य सरकार और मुख्यमंत्री पिनारायी विजयन के खिलाफ विरोध पैदा करना है। उनका कहना है कि सत्ता में लौटने के लिए कुछ राजनीतिक दल राज्यवासियों को बांटने और विभाजन पैदा करने की रणनीति अपना रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह तरह के बयान राजनीतिक एजेन्डा और असंवैधानिक प्रयासों का हिस्सा हैं, और यह लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
शफी परांबिल ने कहा, “एक जनता द्वारा चुने गए नेता को अपने पद का सम्मान करना चाहिए। सार्वजनिक मंच पर इस तरह की टिप्पणियां केवल राजनीतिक नफरत और ध्रुवीकरण को बढ़ावा देती हैं। यह किसी भी जिम्मेदार राजनीतिक व्यवहार के अनुरूप नहीं है।” उन्होंने यह भी कहा कि राज्य की जनता अब सकारात्मक और विकासात्मक राजनीति की अपेक्षा कर रही है, न कि राजनीतिक असहमति और विरोधाभासी बयानों को।
कांग्रेस सांसद ने आगे कहा कि राज्य में चुनावी समीकरणों को देखते हुए, कुछ दल जनभावनाओं का राजनीतिक लाभ उठाने के लिए विभाजनकारी रुख अपना रहे हैं। उन्होंने इस मामले में सभी नागरिकों से अपील की कि वे राजनीतिक ध्रुवीकरण के जाल में न फँसें और लोकतंत्र के मूल्यों को बनाए रखें।
इस घटनाक्रम से केरल की राजनीति में सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों के बीच तनाव बढ़ने की संभावना है। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह बयान आगामी चुनावी रणनीतियों और राज्य की सामाजिक और राजनीतिक स्थिरता पर प्रभाव डाल सकता है। साथ ही, सांसद परांबिल ने राज्य के नेताओं और नागरिकों से आग्रह किया कि वे राजनीतिक असहमति को शांति और संवैधानिक रूप से हल करें, ताकि राज्य में विकास और सामाजिक सौहार्द कायम रहे।
इस बयान के बाद केरल की राजनीति में सियासी विवाद और मीडिया में बहस तेज हो गई है, और आने वाले दिनों में इस पर और राजनीतिक प्रतिक्रिया की संभावना बनी हुई है।
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