
अलाप्पुझा। केरल के पारंपरिक कॉयर उद्योग को नई मजबूती देने और इससे जुड़े लाखों लोगों की आजीविका को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राज्य सरकार एक विशेष अभियान शुरू करने जा रही है। कॉयर मंत्री रमेश चेन्निथला ने घोषणा की है कि ‘हर घर में एक कॉयर उत्पाद, हर हाथ के लिए एक रस्सी’ परियोजना का राज्य स्तरीय उद्घाटन रविवार को अलाप्पुझा स्थित कॉयर कॉर्पोरेशन हॉल में किया जाएगा। कार्यक्रम दोपहर तीन बजे आयोजित होगा।
अभियान के तहत छह महीने तक राज्यभर में कॉयर से बने उत्पादों को घर-घर तक पहुंचाने और लोगों को पारंपरिक कॉयर उद्योग से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। कार्यक्रम 10 अगस्त से अगले वर्ष 10 फरवरी तक चलाया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि इस अवधि के दौरान केरल के प्रत्येक घर तक कम से कम एक कॉयर उत्पाद पहुंचाया जाए।
कॉयर उद्योग को पुनर्जीवित करने पर जोर
केरल में कॉयर उद्योग का लंबा और समृद्ध इतिहास रहा है। नारियल के रेशे से तैयार होने वाले कॉयर उत्पाद राज्य के पारंपरिक उद्योगों में शामिल हैं और बड़ी संख्या में लोगों की आजीविका इससे जुड़ी हुई है। बदलते बाजार और आधुनिक उत्पादों की प्रतिस्पर्धा के कारण पारंपरिक कॉयर उद्योग को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
ऐसे में राज्य सरकार का नया अभियान इस उद्योग को फिर से मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अभियान के माध्यम से कॉयर उत्पादों की मांग बढ़ाने, स्थानीय उत्पादन को प्रोत्साहित करने और इस क्षेत्र में रोजगार के अवसर बनाए रखने पर जोर दिया जाएगा।
रविवार को होगा राज्य स्तरीय उद्घाटन
राज्य स्तरीय कार्यक्रम अलाप्पुझा कॉयर कॉर्पोरेशन हॉल में आयोजित होगा। बैठक की अध्यक्षता मंत्री एम. लिजू करेंगे, जबकि कॉयर मंत्री रमेश चेन्निथला कार्यक्रम का उद्घाटन करेंगे।
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न लाभों का वितरण भी किया जाएगा। इसके अलावा अभियान के आधिकारिक लोगो का लॉन्च भी होगा। सांसद के.सी. वेणुगोपाल लोगो का अनावरण और लाभ वितरण करेंगे। वहीं, विधानसभा अध्यक्ष शनीमोल उस्मान अभियान के तहत पहली बिक्री करेंगी।
इस कार्यक्रम के जरिए सरकार कॉयर उद्योग से जुड़े लोगों और उपभोक्ताओं के बीच नए अभियान को लेकर जागरूकता बढ़ाने की कोशिश करेगी।
छह महीने तक चलेगा अभियान
‘हर घर में एक कॉयर उत्पाद, हर हाथ के लिए एक रस्सी’ परियोजना छह महीने तक चलेगी। इसकी शुरुआत 10 अगस्त से होगी और अभियान 10 फरवरी तक जारी रहेगा।
अभियान का मुख्य उद्देश्य कॉयर उत्पादों को केवल पारंपरिक बाजार तक सीमित रखने के बजाय राज्य के हर घर तक पहुंचाना है। सरकार का मानना है कि यदि आम लोग कॉयर से बने उत्पादों का अधिक इस्तेमाल करेंगे तो इससे उद्योग की मांग बढ़ेगी और उत्पादन से जुड़े लोगों को लाभ मिलेगा।
इसके तहत अलग-अलग स्थानों पर कॉयर उत्पादों की बिक्री और प्रचार गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी इस अभियान से जोड़ा जाएगा।
वार्ड स्तर पर भी होगी बिक्री
अभियान के तहत अलाप्पुझा नगर पालिका की चेयरपर्सन मौली जैकब के वार्ड में भी नारियल जटा यानी कॉयर उत्पादों की बिक्री की जाएगी। इस बिक्री अभियान का नेतृत्व जनप्रतिनिधि करेंगे।
इस पहल का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर लोगों को कॉयर उत्पादों से परिचित कराना और उनके उपयोग को बढ़ावा देना है। स्थानीय स्तर पर बिक्री से छोटे उत्पादकों और सहकारी समितियों को भी बाजार उपलब्ध कराने में मदद मिलने की उम्मीद है।
दो लाख से अधिक लोग जुड़े
केरल में कॉयर उद्योग रोजगार का एक महत्वपूर्ण पारंपरिक क्षेत्र है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस उद्योग से दो लाख से अधिक कर्मचारी जुड़े हुए हैं। इसके अलावा राज्य में 743 से अधिक कॉयर सहकारी समितियां भी काम कर रही हैं।
इन सहकारी समितियों के माध्यम से बड़ी संख्या में लोग कॉयर उत्पादन, प्रसंस्करण और उत्पाद निर्माण से जुड़े हैं। ग्रामीण और तटीय क्षेत्रों में कॉयर उद्योग स्थानीय अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।
सरकार का प्रयास है कि उद्योग को आधुनिक बाजार की जरूरतों के अनुरूप विकसित किया जाए और इससे जुड़े लोगों के लिए रोजगार के अवसर लंबे समय तक बनाए रखे जाएं।
कॉयर उत्पादों की मांग बढ़ाने की कोशिश
आधुनिक दौर में प्लास्टिक और अन्य सिंथेटिक उत्पादों के बढ़ते इस्तेमाल के कारण पारंपरिक कॉयर उत्पादों की मांग पर असर पड़ा है। ऐसे में सरकार प्राकृतिक और पर्यावरण के अनुकूल उत्पादों के रूप में कॉयर को बढ़ावा देने की कोशिश कर रही है।
कॉयर से रस्सी, चटाई, मैट, सजावटी वस्तुएं और घरेलू उपयोग के कई उत्पाद तैयार किए जाते हैं। अभियान के दौरान इन उत्पादों के उपयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाएगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, प्राकृतिक रेशों से बने उत्पादों की मांग बढ़ने की संभावना को देखते हुए कॉयर उद्योग के लिए नए बाजार तलाशना महत्वपूर्ण है। घरेलू बाजार के साथ-साथ निर्यात के अवसरों को भी बढ़ाने की जरूरत है।
पारंपरिक उद्योग से आधुनिक बाजार तक
राज्य सरकार का यह अभियान केवल बिक्री बढ़ाने तक सीमित नहीं है। इसके जरिए कॉयर उद्योग को आधुनिक बाजार की जरूरतों के अनुसार विकसित करने की कोशिश भी की जा सकती है। डिजाइन, गुणवत्ता और उत्पादों की विविधता बढ़ाकर कॉयर को नए उपभोक्ताओं तक पहुंचाने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।
‘हर घर में एक कॉयर उत्पाद’ का लक्ष्य इस बात पर आधारित है कि घरेलू स्तर पर मांग बढ़ने से उद्योग को स्थायी बाजार मिल सकता है। वहीं ‘हर हाथ के लिए एक रस्सी’ का संदेश पारंपरिक कॉयर उत्पादन और श्रमिकों की भूमिका को रेखांकित करता है।
रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिल सकता है लाभ
कॉयर उद्योग के मजबूत होने से इससे जुड़े दो लाख से अधिक कर्मचारियों और सैकड़ों सहकारी समितियों को फायदा मिलने की उम्मीद है। उत्पादन बढ़ने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं।
सरकार की योजना यदि प्रभावी ढंग से लागू होती है तो इससे कॉयर उत्पादकों को बाजार, उपभोक्ताओं को पर्यावरण अनुकूल उत्पाद और उद्योग से जुड़े श्रमिकों को रोजगार का बेहतर आधार मिल सकता है।
फिलहाल रविवार को अलाप्पुझा में होने वाले राज्य स्तरीय उद्घाटन कार्यक्रम के साथ अभियान की औपचारिक शुरुआत होगी। छह महीने तक चलने वाली इस पहल की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कॉयर उत्पादों को कितनी व्यापकता से उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जाता है और बाजार में उनकी मांग को किस तरह बढ़ाया जाता है।





