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Thiruvananthapuram तिरुवनंतपुरम। केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने सोमवार को राज्य के पूर्व प्रधान महालेखाकार डॉ. बिजू जैकब द्वारा प्रस्तुत एक विस्तृत वित्तीय रोडमैप पर चर्चा की। इस रोडमैप में सुझाव दिया गया है कि राज्य नए कर लगाने के बजाय उन्नत डेटा एनालिटिक्स और सूचना प्रणाली (आईएस) ऑडिट का उपयोग कर अपने राजस्व को बढ़ा सकता है। डॉ. बिजू जैकब ने मुख्यमंत्री के समक्ष यह प्रस्तुति वित्त और कर विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में दी। यह बैठक ऐसे समय हुई है जब केरल पर 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक का सार्वजनिक ऋण है और मुख्यमंत्री 19 जून को अपना पहला बजट पेश करने वाले हैं।
पूर्व शीर्ष लेखा-परीक्षा अधिकारी ने आईएएनएस को बताया कि मुख्यमंत्री ने उनकी बातों को गंभीरता से सुना और विषय की गहरी समझ दिखाई। बिजू जैकब ने कहा कि केरल की सबसे बड़ी चुनौती नए राजस्व स्रोतों की कमी नहीं है, बल्कि उन करों को पूरी तरह से वसूल न कर पाना है जो कानूनी रूप से राज्य को मिलने चाहिए। उन्होंने कहा, “मेरा सुझाव उन करदाताओं और कर-आधार की पहचान करने पर केंद्रित है जो वर्तमान मूल्यांकन प्रणाली के दायरे से बाहर हैं। इसके लिए तकनीक आधारित जांच और विश्लेषण की आवश्यकता है। उन्होंने 2014 में किए गए एक सूचना प्रणाली (आईएस) ऑडिट अध्ययन का हवाला देते हुए बताया कि केवीएटी, केजीएसटी और सीएसटी के तहत 22,414 करोड़ रुपये के वास्तविक कर संग्रह के मुकाबले नमूना विश्लेषण में 12,282 करोड़ रुपये अतिरिक्त संभावित कर राजस्व की पहचान हुई थी, जो कुल संग्रह का लगभग 55 प्रतिशत था। बिजू जैकब का कहना था कि यदि संपूर्ण डेटा का विश्लेषण किया जाता, तो यह अंतर और भी अधिक हो सकता था।
उन्होंने एक व्यापक तकनीक-आधारित आईएस ऑडिट का प्रस्ताव रखा, जिसमें फर्जी पंजीकरणों की पहचान, शेल कंपनियों के नेटवर्क का पता लगाना, कारोबार छिपाने के मामलों की जांच, ई-वे बिल में विसंगतियां, जीएसटी और आयकर डेटा में अंतर, संदिग्ध रिफंड दावे तथा ईआरपी ऑडिट ट्रेल्स की समीक्षा शामिल होगी। जैकब ने केरल में सामने आए बड़े जीएसटी घोटालों का भी उल्लेख किया। इनमें 1,170 करोड़ रुपये के फर्जी पंजीकरण और इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) धोखाधड़ी का मामला तथा 580 करोड़ रुपये के कर चोरी के एक अन्य मामले का जिक्र किया गया। उन्होंने मुख्यमंत्री से कहा कि कर अधिकारियों, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) के विशेषज्ञों और चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की संयुक्त ऑडिट टीम कुछ ही महीनों में ऐसा ऑडिट पूरा कर सकती है और करोड़ों रुपये की वसूली योग्य राशि की पहचान कर सकती है।
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