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तिरुवनंतपुरम। केरल के गृह मंत्री रमेश चेन्नीथला ने कोच्चि सिटी पुलिस कमिश्नर एस. कालीराज महेश कुमार के तबादले को लेकर उठ रहे सवालों पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस कमिश्नर का तबादला किसी तरह की सजा नहीं है और इसका चेरानल्लूर सड़क हादसे से कोई संबंध नहीं है। चेन्नीथला ने कहा कि अधिकारियों का स्थानांतरण प्रशासनिक प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा है और इसे किसी विशेष घटना से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। उनका यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब चेरानल्लूर में हुए घातक सड़क हादसे और उसकी शुरुआती जांच में कथित लापरवाही को लेकर पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को मीडिया से बातचीत में गृह मंत्री ने कोच्चि पुलिस कमिश्नर के तबादले को चेरानल्लूर मामले से जोड़ने वाली चर्चाओं को खारिज कर दिया। उन्होंने सवाल किया कि आखिर किसने कहा कि पुलिस कमिश्नर का तबादला इसी घटना के कारण किया गया है। चेन्नीथला ने स्पष्ट किया कि अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक यानी एडीजीपी की रिपोर्ट के आधार पर जिन अधिकारियों की जिम्मेदारी सामने आई है, उनके खिलाफ कार्रवाई की गई है।
उन्होंने कहा कि तबादला कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं है, बल्कि प्रशासन की नियमित व्यवस्था का हिस्सा है। गृह मंत्री के अनुसार, उन्होंने कभी यह नहीं कहा कि कमिश्नर के स्थानांतरण का संबंध चेरानल्लूर हादसे से है। उनके इस बयान के बाद पुलिस विभाग में हुए बदलाव और मामले में की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई के बीच अंतर को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
दरअसल, कोच्चि के चेरानल्लूर इलाके में 25 अक्टूबर की सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ था। इस दुर्घटना में 55 वर्षीय जयबालकृष्णन की मौत हो गई थी। वह सड़क किनारे भोजन की दुकान चलाते थे और घटना के समय अपनी स्कूटी से घर लौट रहे थे। इसी दौरान एक तेज रफ्तार मर्सिडीज-बेंज कार ने उनकी स्कूटी को टक्कर मार दी थी।
बताया गया कि कार कथित तौर पर एक अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश का 17 वर्षीय बेटा चला रहा था। दुर्घटना के बाद घायल जयबालकृष्णन को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। इस घटना के बाद मृतक के परिजनों और स्थानीय लोगों ने पुलिस की शुरुआती कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए।
मामले में सबसे अधिक विवाद तब शुरू हुआ, जब नाबालिग आरोपी को शुरुआती चरण में जमानत मिल गई। पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया कि दुर्घटना की गंभीरता के बावजूद पुलिस ने शुरुआत में अपेक्षाकृत हल्की कानूनी धाराएं लगाईं। परिवार और स्थानीय लोगों के विरोध के बाद मामले में अतिरिक्त धाराएं जोड़ी गईं और आरोपी के खिलाफ आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई।
जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 105 भी जोड़ी गई, जो गैर इरादतन हत्या से संबंधित है। इसके बाद आरोपी की जमानत को चुनौती देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। पीड़ित परिवार ने भी अदालत में अपना पक्ष रखने और न्याय सुनिश्चित करने के लिए कानूनी कदम उठाए हैं।
चेरानल्लूर मामले में पुलिस की शुरुआती कार्रवाई की समीक्षा के लिए वरिष्ठ अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई थी। एडीजीपी पी. विजयन की जांच में कथित लापरवाही के कई पहलुओं की पहचान की गई। इनमें प्राथमिकी दर्ज करने में देरी, साक्ष्य एकत्र करने की प्रक्रिया और घटनास्थल पर मौजूद लोगों द्वारा रिकॉर्ड किए गए वीडियो से संबंधित आरोप शामिल थे।
इन कथित खामियों को लेकर चेरानल्लूर पुलिस थाने से जुड़े चार पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया। इनमें थाना स्तर के अधिकारी भी शामिल हैं। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया कि जांच में जिन अधिकारियों की जिम्मेदारी सामने आएगी, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
इसी बीच 28 अक्टूबर को राज्य सरकार ने कोच्चि सिटी पुलिस कमिश्नर एस. कालीराज महेश कुमार का तबादला कर दिया। उनके स्थान पर वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी आर. निशांतिनी को नया पुलिस कमिश्नर नियुक्त किया गया। निशांतिनी इससे पहले दक्षिण क्षेत्र की पुलिस महानिरीक्षक के रूप में कार्यरत थीं। वहीं, आईपीएस अधिकारी पी. प्रकाश को दक्षिण क्षेत्र का नया आईजी नियुक्त किया गया।
कमिश्नर के तबादले का आदेश चेरानल्लूर मामले में पुलिस अधिकारियों के निलंबन के बाद जारी हुआ था। यही वजह रही कि कई समाचार रिपोर्टों में दोनों घटनाओं के बीच संबंध बताया गया। हालांकि, अब गृह मंत्री ने इसे नियमित प्रशासनिक फैसला बताया है। इस तरह तबादले के कारण को लेकर पहले सामने आई रिपोर्टों और गृह मंत्री के ताजा बयान में अंतर दिखाई देता है।
चेन्नीथला इससे पहले भी विधानसभा में चेरानल्लूर दुर्घटना को लेकर पुलिस की शुरुआती कार्रवाई पर असंतोष व्यक्त कर चुके हैं। उन्होंने स्वीकार किया था कि मामले में प्रारंभिक कदम उचित नहीं थे और संबंधित अधिकारियों को कानूनी प्रावधानों के तहत निष्पक्ष कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए थे।
गृह मंत्री ने यह भी कहा था कि कानून की नजर में सभी समान हैं और किसी व्यक्ति की सामाजिक या पद संबंधी स्थिति के आधार पर उसे विशेष व्यवहार नहीं मिलना चाहिए। उन्होंने पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने और मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता दोहराई थी।
इधर, जयबालकृष्णन के परिवार ने आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग जारी रखी है। परिवार की ओर से अदालत में जमानत संबंधी आदेश को चुनौती देने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई गई है। मामले में अगली सुनवाई 13 नवंबर 2026 को निर्धारित होने की जानकारी सामने आई है।
चेरानल्लूर हादसे ने नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने, तेज रफ्तार और सड़क दुर्घटनाओं में पुलिस की शुरुआती भूमिका जैसे महत्वपूर्ण सवाल भी खड़े किए हैं। खासकर ऐसे मामलों में, जहां किसी प्रभावशाली व्यक्ति के परिवार का सदस्य आरोपी हो, जांच की निष्पक्षता और पारदर्शिता को लेकर सार्वजनिक अपेक्षाएं बढ़ जाती हैं।
फिलहाल गृह मंत्री रमेश चेन्नीथला ने कोच्चि पुलिस कमिश्नर के तबादले को दंडात्मक कार्रवाई मानने से इनकार किया है। दूसरी ओर, चेरानल्लूर दुर्घटना की जांच और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई जारी है। अब इस मामले में आगे की अदालती कार्यवाही और जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे।
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