केरल

88 की उम्र में भी कैप्टन सुब्रमण्यन का देशप्रेम कायम

Kavita2
15 Aug 2026 3:19 PM IST
88 की उम्र में भी कैप्टन सुब्रमण्यन का देशप्रेम कायम
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चालिसेरी। देश जब अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है, ऐसे मौके पर उन वीर जवानों को याद करना बेहद खास हो जाता है, जिन्होंने अपना जीवन राष्ट्र की सेवा में समर्पित कर दिया। केरल के चालिसेरी में रहने वाले कैप्टन के. सुब्रमण्यन भी ऐसे ही एक सैनिक हैं, जिन्होंने तीन दशकों से अधिक समय तक देश की सेवा की और कई महत्वपूर्ण सैन्य घटनाओं के साक्षी रहे।

88 वर्ष की उम्र में भी कैप्टन के. सुब्रमण्यन के भीतर देश सेवा का वही जज्बा कायम है। उनकी जिंदगी भारतीय सेना के गौरवशाली इतिहास से जुड़ी हुई है। उनके घर में आज भी सैन्य सेवा के दौरान मिले मेडल, सम्मान पत्र, पुरस्कार और यादगार वस्तुएं सुरक्षित रखी हुई हैं, जो उनकी बहादुरी और समर्पण की कहानी बयां करती हैं।

कैप्टन सुब्रमण्यन वर्ष 1959 में भारतीय सेना में शामिल हुए थे। सेना में भर्ती होने के बाद उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं और देश की सुरक्षा में अपना योगदान दिया। अपने लंबे सैन्य करियर के दौरान उन्होंने कई चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का सामना किया और देश के लिए पूरी निष्ठा से सेवा की।

उनकी सैन्य यात्रा उस दौर की गवाह रही है, जब भारत ने कई महत्वपूर्ण सुरक्षा चुनौतियों का सामना किया। उन्होंने वर्ष 1961-62 के भारत-चीन संघर्ष के दौरान अपनी सेवाएं दीं। इसके अलावा वर्ष 1965 और 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्धों के समय भी वे सेना का हिस्सा रहे।

इन युद्धों के दौरान भारतीय सैनिकों ने अदम्य साहस और वीरता का परिचय दिया था। कैप्टन सुब्रमण्यन ने भी अपने साथियों के साथ मिलकर देश की सीमाओं की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके लिए ये दौर जीवन के सबसे महत्वपूर्ण और यादगार अनुभवों में शामिल हैं।

सेना में बिताए वर्षों को याद करते हुए कैप्टन सुब्रमण्यन बताते हैं कि सैनिक का जीवन अनुशासन, साहस और जिम्मेदारी से भरा होता है। देश की रक्षा करना उनके लिए केवल नौकरी नहीं, बल्कि एक गर्व और सम्मान की बात थी।

उनके घर में रखे गए मेडल और सम्मान आज भी उनके सैन्य जीवन की उपलब्धियों की याद दिलाते हैं। हर पुरस्कार के पीछे एक संघर्ष, एक जिम्मेदारी और देश के प्रति समर्पण की कहानी छिपी हुई है।

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जब देश तिरंगे को सलाम करता है, तब ऐसे पूर्व सैनिकों का योगदान और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। कैप्टन सुब्रमण्यन जैसे सैनिकों ने अपने युवावस्था के महत्वपूर्ण वर्षों को देश की सुरक्षा में लगाया, ताकि देशवासी सुरक्षित और स्वतंत्र जीवन जी सकें।

स्थानीय लोग भी कैप्टन सुब्रमण्यन के योगदान को सम्मान की नजर से देखते हैं। उनके अनुभव युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। वे बताते हैं कि देश की सेवा करने का अवसर मिलना उनके जीवन का सबसे बड़ा सम्मान रहा है।

कैप्टन सुब्रमण्यन का मानना है कि आज की युवा पीढ़ी को देश के इतिहास, स्वतंत्रता सेनानियों और सैनिकों के बलिदान को समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश की प्रगति के लिए अनुशासन, मेहनत और जिम्मेदारी की भावना जरूरी है।

आजादी के 80वें वर्ष में कैप्टन के. सुब्रमण्यन जैसे वीरों की कहानियां हमें याद दिलाती हैं कि स्वतंत्रता केवल एक अधिकार नहीं, बल्कि लाखों लोगों के त्याग और बलिदान का परिणाम है। उनके जैसे सैनिकों के कारण ही देश की सीमाएं सुरक्षित रहीं और लोकतंत्र मजबूत हुआ।

तीन दशकों से अधिक समय तक राष्ट्रीय सेवा करने वाले कैप्टन सुब्रमण्यन आज भी देश के प्रति गर्व और सम्मान की भावना रखते हैं। उनके जीवन की कहानी आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है और यह संदेश देती है कि राष्ट्र सेवा से बड़ा कोई सम्मान नहीं होता।

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