केरल

वंदे मातरम विवाद पर BJP सांसद सदानंदन मास्टर का बड़ा बयान

Ratna Netam
8 Oct 2026 7:34 PM IST
वंदे मातरम विवाद पर BJP सांसद सदानंदन मास्टर का बड़ा बयान
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तिरुवनंतपुरम। केरल में राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' की 150वीं वर्षगांठ पर आयोजित सेमिनार को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक मुद्दा बन गया है। भारतीय जनता पार्टी के सांसद सी. सदानंदन मास्टर ने गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 को केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि 'वंदे मातरम' केवल एक देशभक्ति गीत नहीं, बल्कि भारत की आत्मा है। उन्होंने इस गीत के ऐतिहासिक महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान इसने लाखों भारतीयों को ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष करने की प्रेरणा दी थी। भाजपा सांसद ने सेमिनार के दौरान हुए विरोध प्रदर्शन के पीछे साजिश होने का आरोप भी लगाया। हालांकि, प्रदर्शनकारी छात्र संगठनों का कहना है कि उनका विरोध राष्ट्रीय गीत के खिलाफ नहीं, बल्कि कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े वक्ताओं की भागीदारी को लेकर था।
केरल के कासरगोड जिले में स्थित केंद्रीय विश्वविद्यालय केरल में 6 और 7 अक्टूबर को 'वंदे मातरम' की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर सहित कई अतिथियों ने हिस्सा लिया।सेमिनार के दौरान छात्र संगठनों ने कुछ वक्ताओं की उपस्थिति को लेकर विरोध प्रदर्शन किया था। इसके बाद राज्यपाल ने प्रदर्शन की आलोचना करते हुए इसके पीछे साजिश होने की आशंका जताई थी।
राज्यपाल के बयान का सदानंदन मास्टर ने किया समर्थन
भाजपा सांसद सी. सदानंदन मास्टर ने पत्रकारों से बातचीत में राज्यपाल के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि देश की स्वतंत्रता के इतिहास में 'वंदे मातरम' का विशेष स्थान रहा है।उन्होंने कहा, "हमारे गवर्नर ने जो कहा, वह बिल्कुल सही है। 'वंदे मातरम' सिर्फ एक देशभक्ति गीत नहीं है; यह हमारे देश की आत्मा है। हमारे आजादी के दीवाने देश की आजादी के लिए लड़ने आगे आए। उन्होंने अपनी जान की बाजी लगाई और अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी। वे 'वंदे मातरम' से मिली प्रेरणा से ही आगे आए थे।"सदानंदन मास्टर ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन में इस गीत की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। उनके अनुसार, देश की आजादी के लिए संघर्ष करने वाले लोगों को इस गीत से देशभक्ति और त्याग की प्रेरणा मिलती थी।उन्होंने राष्ट्रीय गीत से जुड़े कार्यक्रम के विरोध पर भी सवाल उठाए और राज्यपाल की चिंताओं को उचित बताया।
राज्यपाल आर्लेकर ने जताई थी साजिश की आशंका
इससे पहले बुधवार, 7 अक्टूबर को राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने केंद्रीय विश्वविद्यालय में आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार के समापन समारोह को संबोधित किया था।उन्होंने कहा था कि 'वंदे मातरम' का विरोध करने वाली विचारधाराओं और उनके पीछे सक्रिय लोगों के बारे में जानकारी जुटाने की आवश्यकता है।राज्यपाल ने आरोप लगाया कि इस प्रकार की घटनाओं को केवल छात्रों के विरोध प्रदर्शन तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए।उन्होंने कहा कि ऐसी गतिविधियों के पीछे कौन लोग हैं और उनकी क्या भूमिका है, इसकी जानकारी प्राप्त करना जरूरी है।आर्लेकर ने विश्वविद्यालयों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों से 'वंदे मातरम' के इतिहास तथा स्वतंत्रता आंदोलन में उसकी भूमिका का अध्ययन करने की भी अपील की थी।
सेमिनार में RSS से जुड़े वक्ता की मौजूदगी पर विरोध
केंद्रीय विश्वविद्यालय केरल में आयोजित सेमिनार का विरोध कई छात्र संगठनों ने किया था।प्रदर्शन में स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI), ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (AISF), केरल स्टूडेंट्स यूनियन (KSU) और मुस्लिम स्टूडेंट्स फेडरेशन (MSF) के कार्यकर्ता शामिल थे।छात्र संगठनों ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े संगठन प्रज्ञा प्रवाह के राष्ट्रीय संयोजक जे. नंदकुमार को कार्यक्रम में वक्ता बनाए जाने पर आपत्ति जताई थी।प्रदर्शनकारी छात्रों का आरोप था कि राष्ट्रीय गीत की वर्षगांठ पर आयोजित कार्यक्रम में एक विशेष वैचारिक संगठन से जुड़े लोगों को प्रमुखता दी जा रही है।छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि सेमिनार के लिए पंजीकरण कराने के बावजूद कुछ विद्यार्थियों को कार्यक्रम स्थल पर प्रवेश नहीं दिया गया।छात्र संगठनों ने स्पष्ट किया कि उनका विरोध 'वंदे मातरम' गीत या उसकी 150वीं वर्षगांठ के आयोजन के खिलाफ नहीं था। उनका विरोध कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े लोगों की भागीदारी को लेकर था।
25 छात्रों के खिलाफ पुलिस ने दर्ज किया मामला
इस विवाद के बीच केरल पुलिस ने केंद्रीय विश्वविद्यालय के 25 अज्ञात छात्रों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।पुलिस के अनुसार, बुधवार को सेमिनार के दौरान कुछ छात्रों ने विश्वविद्यालय के मुख्य प्रॉक्टर के संबोधन में बाधा डालने का प्रयास किया था।आरोप है कि प्रदर्शनकारी छात्रों ने नारेबाजी की और कार्यक्रम स्थल पर अव्यवस्था पैदा की।बेकल पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। इनमें गैरकानूनी जमावड़ा और उपद्रव से संबंधित प्रावधान शामिल हैं।पुलिस ने अपनी ओर से मामला दर्ज किया है। विश्वविद्यालय प्रशासन या कार्यक्रम आयोजकों की ओर से अलग शिकायत दिए जाने की पुष्टि नहीं हुई है।हालांकि, छात्रों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी में लगाए गए आरोपों की न्यायिक पुष्टि होना अभी बाकी है।
स्वतंत्रता संग्राम में 'वंदे मातरम' की महत्वपूर्ण भूमिका
'वंदे मातरम' की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी। यह गीत भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान राष्ट्रीय भावना और स्वाधीनता की आकांक्षा का महत्वपूर्ण प्रतीक बन गया था।बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के उपन्यास 'आनंदमठ' में शामिल इस गीत ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष के दौरान व्यापक पहचान प्राप्त की।स्वतंत्रता आंदोलन के विभिन्न चरणों में इसे सभाओं, आंदोलनों और राष्ट्रीय कार्यक्रमों में गाया जाता थादेश की आजादी के बाद 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा में इसे राष्ट्रीय गीत के रूप में सम्मान दिया गया।भारतीय इतिहास में इसके इसी योगदान का उल्लेख करते हुए भाजपा सांसद सदानंदन मास्टर ने कहा कि 'वंदे मातरम' ने स्वतंत्रता सेनानियों को संघर्ष की प्रेरणा प्रदान की थी।
राष्ट्रीय गीत और राजनीतिक विचारधारा पर बहस
केरल के केंद्रीय विश्वविद्यालय में आयोजित सेमिनार से जुड़ा विवाद अब राष्ट्रीय गीत के ऐतिहासिक महत्व और विश्वविद्यालयों में राजनीतिक विचारधाराओं की भूमिका से संबंधित बहस का हिस्सा बन गया है।राज्यपाल और भाजपा सांसद सदानंदन मास्टर ने विरोध प्रदर्शन को लेकर चिंता जताई है। वहीं, छात्र संगठनों ने अपने विरोध को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े वक्ताओं की भागीदारी के खिलाफ बताया है।दोनों पक्षों के बयानों में विरोध प्रदर्शन की वजह को लेकर स्पष्ट मतभेद सामने आए हैं।राज्यपाल की ओर से साजिश की आशंका जताई गई है, लेकिन प्रदर्शन के पीछे किसी संगठित साजिश के होने की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।
विवाद के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज
भाजपा सांसद सी. सदानंदन मास्टर के बयान के बाद 'वंदे मातरम' से जुड़े सेमिनार का विवाद फिर चर्चा में आ गया है।उन्होंने राज्यपाल आर्लेकर के विचारों का समर्थन करते हुए राष्ट्रीय गीत को देश की आत्मा बताया और स्वतंत्रता आंदोलन में उसके योगदान को याद किया।दूसरी ओर, प्रदर्शनकारी छात्र संगठनों ने कहा है कि उनके विरोध को राष्ट्रीय गीत के विरोध के रूप में प्रस्तुत करना सही नहीं है।फिलहाल इस मामले में पुलिस ने 25 छात्रों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। विश्वविद्यालय में हुए घटनाक्रम और प्रदर्शन से जुड़े आरोपों की जांच तथा संबंधित पक्षों के बयानों के आधार पर आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।
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