केरल

आबकारी विभाग में कथित वसूली का मामला गरमाया, मंत्री ने जांच का किया समर्थन

Ratna Netam
7 Nov 2026 5:55 PM IST
आबकारी विभाग में कथित वसूली का मामला गरमाया, मंत्री ने जांच का किया समर्थन
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तिरुवनंतपुरम। केरल के आबकारी विभाग में वरिष्ठ अधिकारियों पर रिश्वत लेने और बार संचालकों से नियमित वसूली करने के आरोपों के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। मामले पर राज्य के आबकारी मंत्री एम. लिजू ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि भ्रष्टाचार से जुड़े सभी आरोपों की जांच होनी चाहिए। किसी भी आरोप को बिना जांच के नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। यह विवाद पूर्व आबकारी आयुक्त सीरम सांबाशिव राव की ओर से सरकार को सौंपी गई एक रिपोर्ट के बाद सामने आया है। रिपोर्ट में विभाग के दो वरिष्ठ अधिकारियों पर बार मालिकों से कथित तौर पर पैसे वसूलने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।मंत्री का बयान ऐसे समय आया है, जब आबकारी विभाग में अधिकारियों की कार्यप्रणाली, कथित रिश्वतखोरी और तबादलों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। पूर्व आबकारी आयुक्त की रिपोर्ट सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने भी सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। मामले में आबकारी मंत्री के कथित संपर्कों को लेकर भी राजनीतिक सवाल उठाए जा रहे हैं।
पूर्व आबकारी आयुक्त की रिपोर्ट से मचा विवाद
इस पूरे मामले की शुरुआत पूर्व आबकारी आयुक्त सीरम सांबाशिव राव की रिपोर्ट से हुई। उन्होंने 6 नवंबर 2026 को राज्य सरकार को एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपी थी। यह रिपोर्ट उनके तबादले से ठीक पहले सामने आई। रिपोर्ट में आबकारी विभाग के संयुक्त आयुक्त एस. विनोद और अलाप्पुझा के उप आबकारी आयुक्त अजय पर बार संचालकों से कथित तौर पर रिश्वत लेने के आरोप लगाए गए हैं।रिपोर्ट के अनुसार, दोनों अधिकारियों पर अलग-अलग क्षेत्रों में बार मालिकों से नियमित भुगतान लेने और लाइसेंस संबंधी काम कराने के बदले रकम मांगने की शिकायतें मिली थीं। पूर्व आयुक्त ने इन आरोपों को गंभीर बताते हुए संबंधित अधिकारियों को फील्ड पोस्टिंग से हटाने और उनके खिलाफ सतर्कता जांच कराने की सिफारिश की थी।उन्होंने सुझाव दिया कि आरोपों का सामना कर रहे अधिकारियों को संवेदनशील पदों पर तैनात नहीं किया जाना चाहिए। इसके बजाय उन्हें ऐसे विभागीय पदों पर स्थानांतरित किया जाए, जहां लाइसेंस और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से सीधे संपर्क की जिम्मेदारी न हो।
बार मालिकों से हर महीने 30 हजार रुपये मांगने का आरोप
पूर्व आबकारी आयुक्त की रिपोर्ट में संयुक्त आबकारी आयुक्त एस. विनोद को लेकर भी कई आरोप दर्ज किए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, विनोद का मुन्नुपुझा के एक बार संचालक से करीबी संपर्क था। आरोप है कि वह लाइसेंस और अन्य प्रशासनिक कार्यों में मध्यस्थ की भूमिका निभाते थे।रिपोर्ट में एक मुखबिर से मिली जानकारी का हवाला देते हुए कहा गया है कि संबंधित अधिकारी ने बार संचालक से निरीक्षण के दौरान कथित तौर पर हर महीने 30 हजार रुपये की मांग की थी। इसके अलावा बार के संचालन का समय बढ़ाने और लाइसेंस के विस्तार से जुड़े काम के लिए 50 हजार रुपये लेने का भी आरोप लगाया गया है।हालांकि, ये आरोप अभी जांच के अधीन हैं। संबंधित अधिकारी की दोषसिद्धि नहीं हुई है। रिपोर्ट में इन सूचनाओं के आधार पर सतर्कता जांच की आवश्यकता बताई गई है।
अलाप्पुझा के उप आबकारी आयुक्त पर भी आरोप
रिपोर्ट में अलाप्पुझा के उप आबकारी आयुक्त अजय का नाम भी शामिल है। उन पर कायमकुलम क्षेत्र के एक बार संचालक से कथित तौर पर पैसे मांगने का आरोप लगाया गया है।रिपोर्ट के अनुसार, बार में निरीक्षण के लिए पहुंचने के दौरान हर महीने 30 हजार रुपये की मांग किए जाने की शिकायत मिली थी। इसके अतिरिक्त ओणम के बाद लाइसेंस नवीनीकरण से संबंधित मामले में 20 हजार रुपये दिए जाने का भी जिक्र किया गया है।पूर्व आबकारी आयुक्त ने इन आरोपों को देखते हुए संबंधित अधिकारी के खिलाफ जांच और प्रशासनिक कार्रवाई की सिफारिश की है। रिपोर्ट में कथित तौर पर आय से अधिक संपत्ति और बेनामी लेनदेन की भी जांच कराने की मांग की गई है।
मंत्री एम. लिजू के संपर्कों पर भी उठे सवाल
यह मामला केवल विभागीय अधिकारियों तक सीमित नहीं रहा। रिपोर्ट में एक बार संचालक के साथ आबकारी मंत्री एम. लिजू के परिचय का भी उल्लेख किया गया है। इसके बाद राजनीतिक विवाद और बढ़ गया।सीपीआई(एम) के राज्य सचिव एम.वी. गोविंदन ने इस मामले पर सवाल उठाते हुए मंत्री से संबंधित बार संचालक के साथ अपने संबंधों को लेकर स्पष्टीकरण देने की मांग की। उन्होंने पूर्व आबकारी आयुक्त के तबादले की परिस्थितियों पर भी सवाल उठाए।गोविंदन ने आरोप लगाया कि विभाग में कथित भ्रष्टाचार के नेटवर्क को लेकर पहले भी शिकायतें सामने आई थीं, लेकिन संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने में बाधाएं आईं। उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।दूसरी ओर, आबकारी मंत्री एम. लिजू ने कहा कि सभी आरोपों की जांच होनी चाहिए। उन्होंने रिपोर्ट के सामने आने के समय पर भी सवाल उठाया और कहा कि पूर्व आयुक्त इसे अपने तबादले से पहले ही सरकार के सामने रख सकते थे।
सतर्कता जांच कराने की सिफारिश
पूर्व आबकारी आयुक्त ने अपनी रिपोर्ट में दोनों अधिकारियों के खिलाफ सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो से जांच कराने की सिफारिश की है। इसमें रिश्वतखोरी, नियमित वसूली, आय से अधिक संपत्ति और बेनामी संपत्ति से जुड़े आरोपों की जांच शामिल है।उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि आबकारी विभाग में अधिकारियों की नियुक्ति और तबादले की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाया जाए। विशेष रूप से संयुक्त आबकारी आयुक्त, अतिरिक्त आबकारी आयुक्त और उप आयुक्त जैसे महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति करते समय अधिकारियों के रिकॉर्ड और उनके खिलाफ लंबित शिकायतों को ध्यान में रखा जाना चाहिए।रिपोर्ट में संवेदनशील पदों पर नियुक्ति के लिए स्पष्ट मानक बनाने की आवश्यकता भी बताई गई है।
तबादले के बाद बढ़ा राजनीतिक विवाद
सीरम सांबाशिव राव को आबकारी आयुक्त और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के विशेष सचिव के पद से हटाकर अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति विकास विभाग में विशेष सचिव बनाया गया है। उनके तबादले और भ्रष्टाचार संबंधी रिपोर्ट के सामने आने के समय को लेकर सवाल उठ रहे हैं।विपक्षी नेताओं ने इस घटनाक्रम को लेकर सरकार से जवाब मांगा है। वहीं, मंत्री ने आरोपों की जांच का समर्थन किया है और रिपोर्ट के समय पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी है।फिलहाल आबकारी विभाग के अधिकारियों पर लगाए गए आरोप साबित नहीं हुए हैं। मामले में सतर्कता जांच और सरकार की आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि बार संचालकों से कथित वसूली के आरोपों में कितनी सच्चाई है और इसमें किन अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होती है।
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