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केरल में SFI के गढ़ में ABVP का क्लीन स्वीप सभी प्रमुख पदों पर दर्ज की जीत

Kavita2
22 Sept 2026 9:56 AM IST
केरल में SFI के गढ़ में ABVP का क्लीन स्वीप सभी प्रमुख पदों पर दर्ज की जीत
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तिरुवनंतपुरम: केरल के त्रिपुनिथुरा स्थित गवर्नमेंट संस्कृत कॉलेज के छात्रसंघ चुनाव में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने बड़ी सफलता हासिल की है। एबीवीपी ने छात्रसंघ के सभी छह प्रमुख पदों पर जीत दर्ज करते हुए स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) के लंबे समय से चले आ रहे प्रभाव को समाप्त कर दिया। लंबे समय से वामपंथी छात्र राजनीति का मजबूत केंद्र माने जाने वाले इस कॉलेज में आए चुनाव परिणाम ने राज्य की कैंपस राजनीति में नई चर्चा शुरू कर दी है।

चुनाव में एबीवीपी की स्निग्धा एम. हरि चेयरपर्सन चुनी गईं, जबकि आदित्य टी. ए. ने वाइस चेयरपर्सन पद पर जीत हासिल की। विग्नेश भट्ट जनरल सेक्रेटरी और विग्नेश डी. मैगजीन एडिटर चुने गए। अंजलि टी. ने आर्ट्स क्लब सेक्रेटरी और निवेद्या के. एन. ने यूनिवर्सिटी यूनियन काउंसलर का पद जीता। इसके अलावा शिवानी आर. सेकेंड यूजी रिप्रेजेंटेटिव और अवनी सी. बी. सेकेंड पीजी रिप्रेजेंटेटिव चुनी गईं।

अलग-अलग मीडिया रिपोर्टों में चुनाव में जीती गई कुल सीटों की संख्या को लेकर अंतर दिखाई देता है। एनडीटीवी की अंग्रेजी रिपोर्ट और आकाशवाणी से जुड़ी रिपोर्ट में एबीवीपी की छह प्रमुख पदों पर जीत का उल्लेख है, जबकि एनडीटीवी हिंदी सहित कुछ अन्य रिपोर्टों में संगठन के सभी 12 जनरल सीटों पर जीत हासिल करने की बात कही गई है। हालांकि सभी प्रमुख रिपोर्टें इस बात पर सहमत हैं कि कॉलेज यूनियन पर एबीवीपी ने नियंत्रण हासिल किया और एसएफआई को इस बार बड़ा झटका लगा।

गवर्नमेंट संस्कृत कॉलेज में एसएफआई लंबे समय से प्रभावशाली रहा है। कुछ मीडिया रिपोर्टों ने यहां वामपंथी छात्र संगठन के प्रभाव को चार दशक से अधिक पुराना बताया है। ऐसे में एबीवीपी का सभी प्रमुख पदों पर जीतना संगठनात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण बदलाव है। पिछले छात्रसंघ चुनाव में भी एबीवीपी ने कॉलेज में बढ़त बनाई थी और इस बार उसने अपने प्रदर्शन को और मजबूत किया।

चुनावी नतीजे के बाद एबीवीपी ने इसे छात्रों की ओर से उसके पक्ष में मिले समर्थन के रूप में पेश किया है। संगठन के एक प्रतिनिधि ने दावा किया कि यह नतीजा एसएफआई की कथित 'छात्र विरोधी नीतियों' के खिलाफ छात्रों की प्रतिक्रिया है। यह एबीवीपी का दावा है। संगठन ने पिछली एसएफआई नेतृत्व वाली यूनियनों पर संस्कृत को पर्याप्त बढ़ावा नहीं देने, छात्रों से एकत्र किए गए फंड के इस्तेमाल और छात्र गतिविधियों को लेकर भी आरोप लगाए हैं। इन आरोपों पर एसएफआई का विस्तृत जवाब उपलब्ध रिपोर्टों में प्रमुखता से सामने नहीं आया है।

एबीवीपी ने उम्मीद जताई है कि त्रिपुनिथुरा में मिली सफलता से केरल के दूसरे कॉलेज परिसरों में सक्रिय उसकी इकाइयों को भी उत्साह मिलेगा। हालांकि एक कॉलेज के छात्रसंघ चुनाव के नतीजे को पूरे राज्य के छात्रों के राजनीतिक रुझान का प्रतिनिधि मानना उचित नहीं होगा। अलग-अलग परिसरों में स्थानीय मुद्दे, उम्मीदवारों की लोकप्रियता और कॉलेज स्तर की परिस्थितियां चुनाव परिणामों को प्रभावित कर सकती हैं।

त्रिपुनिथुरा का छात्रसंघ चुनाव इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि इसी क्षेत्र की नगरपालिका में भी हाल में सत्ता परिवर्तन हुआ है। रिपोर्टों के मुताबिक भाजपा ने त्रिपुनिथुरा नगरपालिका की कमान संभाली है, जिससे स्थानीय निकाय में लंबे समय से चले आ रहे वाम नेतृत्व वाले शासन का अंत हुआ। कॉलेज और नगरपालिका के चुनाव अलग-अलग प्रकृति के हैं, इसलिए दोनों परिणामों को सीधे एक-दूसरे का संकेतक नहीं माना जा सकता।

कॉलेज के चुनावी नतीजे ने केरल में एबीवीपी और एसएफआई के बीच कैंपस स्तर की प्रतिस्पर्धा को फिर चर्चा में ला दिया है। एसएफआई का केरल के कई विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में मजबूत संगठनात्मक आधार रहा है। दूसरी तरफ एबीवीपी भी राज्य के शिक्षण संस्थानों में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश करती रही है। त्रिपुनिथुरा संस्कृत कॉलेज का परिणाम इसी प्रतिस्पर्धा में एबीवीपी के लिए महत्वपूर्ण संगठनात्मक उपलब्धि है।

यह नतीजा ऐसे समय आया है जब देश के दूसरे विश्वविद्यालयों में भी छात्रसंघ चुनावों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव 2026 में भी एबीवीपी ने चार केंद्रीय पदों में से तीन—अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव—पर जीत दर्ज की है। उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय दीपांशु शौकीन विजयी हुए।

त्रिपुनिथुरा गवर्नमेंट संस्कृत कॉलेज का परिणाम अब केरल की छात्र राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है। एसएफआई के लंबे प्रभाव वाले परिसर में एबीवीपी का सभी प्रमुख पदों पर जीतना स्थानीय स्तर पर स्पष्ट संगठनात्मक बदलाव है। आने वाले कॉलेज और विश्वविद्यालय चुनावों में दोनों संगठनों का प्रदर्शन कैसा रहता है, उससे यह समझने में मदद मिलेगी कि यह बदलाव केवल एक परिसर तक सीमित है या राज्य के दूसरे परिसरों में भी इसी तरह की प्रतिस्पर्धा देखने को मिलती है।

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