केरल

SI पर हमला और पुलिस सहायता केंद्र में तोड़फोड़ मामले में CPM नेताओं समेत 89 लोग बरी

Kavita2
17 July 2026 3:23 PM IST
SI पर हमला और पुलिस सहायता केंद्र में तोड़फोड़ मामले में CPM नेताओं समेत 89 लोग बरी
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कन्नूर: केरल के कन्नूर जिले में वर्ष 2012 में हुए विरोध प्रदर्शन से जुड़े मामले में थलासेरी की प्रिंसिपल असिस्टेंट सेशंस कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए CPM नेताओं और कार्यकर्ताओं समेत सभी आरोपितों को बरी कर दिया है। अदालत ने मट्टनूर बस स्टैंड पर ड्यूटी के दौरान एक सब इंस्पेक्टर पर कथित हमला करने, हत्या के प्रयास और पुलिस सहायता केंद्र में तोड़फोड़ के आरोपों से सभी आरोपितों को मुक्त कर दिया।

थलासेरी के प्रिंसिपल असिस्टेंट सेशंस कोर्ट के जज के.वी. कृष्णनकुट्टी ने मामले की सुनवाई के बाद CPM के जिला सचिवालय सदस्य पी. पुरुषोत्तमन, जिला समिति सदस्य एन.वी. चंद्रबाबू और मट्टनूर क्षेत्र सचिव एम. रतीश समेत कुल 89 लोगों को बरी कर दिया। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त और ठोस साक्ष्य पेश नहीं कर सका।

यह मामला वर्ष 2012 में CPM जिला सचिव पी. जयराजन की गिरफ्तारी के विरोध में निकाले गए मार्च से जुड़ा था। उस समय CPM कार्यकर्ताओं और नेताओं ने मट्टनूर क्षेत्र समिति के नेतृत्व में मट्टनूर CI कार्यालय तक विरोध मार्च निकाला था। इसी दौरान मट्टनूर बस स्टैंड पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति पैदा हुई थी।

पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान ड्यूटी पर तैनात सब इंस्पेक्टर सैली जोसेफ पर हमला करने का आरोप लगाया गया था। इसके अलावा पुलिस सहायता केंद्र में तोड़फोड़ करने और सरकारी कार्य में बाधा डालने के आरोप भी लगाए गए थे। घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी।

मामले में कई CPM नेताओं और कार्यकर्ताओं को आरोपित बनाया गया था। लंबे समय तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद अदालत में सुनवाई पूरी हुई। बचाव पक्ष ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि आरोपितों के खिलाफ लगाए गए आरोप राजनीतिक विरोध के कारण लगाए गए थे और अभियोजन पक्ष उन्हें साबित करने में असफल रहा।

बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता एन.एम. रामेशन ने पैरवी की। उन्होंने अदालत के समक्ष तर्क रखा कि मामले में प्रस्तुत साक्ष्यों में कई कमियां थीं और आरोपितों की संलिप्तता को साबित करने के लिए पर्याप्त आधार मौजूद नहीं थे।

अदालत के फैसले के बाद CPM नेताओं और कार्यकर्ताओं ने राहत की सांस ली है। पार्टी से जुड़े लोगों का कहना है कि यह फैसला न्याय व्यवस्था में विश्वास को मजबूत करता है। वहीं, विपक्ष और अन्य राजनीतिक दलों की ओर से इस फैसले पर अभी प्रतिक्रिया का इंतजार है।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, आपराधिक मामलों में केवल आरोप लगना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि अभियोजन पक्ष को अदालत में आरोपों को संदेह से परे साबित करना होता है। यदि पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध नहीं होते हैं तो अदालत आरोपितों को बरी कर सकती है।

इस मामले में भी अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहियों के आधार पर फैसला सुनाया। कोर्ट ने सभी आरोपितों को राहत देते हुए उन्हें मामले से मुक्त कर दिया।

2012 की यह घटना उस समय कन्नूर जिले की राजनीतिक गतिविधियों के बीच काफी चर्चा में रही थी। कन्नूर लंबे समय से राजनीतिक आंदोलनों और विरोध प्रदर्शनों के लिए जाना जाता रहा है। विभिन्न राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं के बीच टकराव के कई मामले भी सामने आते रहे हैं।

अदालत के फैसले के बाद अब यह मामला कानूनी रूप से समाप्त हो गया है। CPM नेताओं और कार्यकर्ताओं पर लगे हत्या के प्रयास, पुलिस सहायता केंद्र में तोड़फोड़ और अन्य आरोपों से उन्हें राहत मिल गई है।

फिलहाल अदालत के फैसले को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा जारी है। हालांकि, न्यायालय के निर्णय के बाद सभी आरोपितों को कानूनी राहत मिल गई है और उनके खिलाफ चल रही यह आपराधिक कार्यवाही समाप्त हो गई है।

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