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तिरुवनंतपुरम: केरल सरकार प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान के खिलाफ़ आर्थिक सुरक्षा देने के लिए 500 करोड़ रुपये की बीमा योजना को तेज़ी से लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इस व्यापक समूह बीमा योजना को लागू करने के लिए तीन IAS अधिकारियों की एक कोर कमेटी बनाई गई है। प्रस्तावित योजना में प्राकृतिक आपदाओं के दौरान आर्थिक सुरक्षा के लिए पैरामीट्रिक बीमा और BPL परिवारों के लिए क्षतिपूर्ति बीमा शामिल है। इस योजना का प्रीमियम 'कंसोलिडेटेड फंड' और 'मुख्यमंत्री आपदा राहत कोष' से भरा जाएगा।
यह बीमा योजना विश्व बैंक की मदद से चल रहे 'रेजिलिएंट केरल प्रोग्राम' के तहत लागू की जाएगी। कोर कमेटी में वित्त विभाग के अतिरिक्त सचिव जेरोमिक जॉर्ज, आपदा प्रबंधन आयुक्त वी. विग्नेश्वरी और 'रीबिल्ड केरल' के डिप्टी CEO संदीप कुमार शामिल हैं। यह कमेटी पात्रता मानदंड और टेंडर दस्तावेज़ तैयार करने, टेंडर का मूल्यांकन करने और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय करने का काम करेगी।
यह बीमा योजना नागालैंड में अपनाए गए मॉडल की तर्ज़ पर शुरू की जा रही है। ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि चिंता है कि प्राकृतिक आपदाओं के बाद आपातकालीन बचाव कार्यों, राहत, पुनर्वास और पुनर्निर्माण पर होने वाला खर्च राज्य की वित्तीय स्थिरता पर असर डाल सकता है। पैरामीट्रिक बीमा के तहत, हर घर को हुए नुकसान का अलग-अलग आकलन करने की ज़रूरत नहीं होगी। राहत और पुनर्वास के लिए बीमा राशि सबसे पहले सरकार को दी जाएगी। कवरेज इस आधार पर तय होगा कि पिछले दशक में राज्य ने प्राकृतिक आपदा राहत पर औसतन कितना खर्च किया है। यह पॉलिसी पाँच साल की अवधि के लिए होगी।
क्षतिपूर्ति बीमा के तहत, भारी बारिश, बाढ़ या तेज़ हवाओं की स्थिति में BPL घर-मालिक मुआवज़े के हकदार होंगे। यह कवर 10 लाख रुपये तक का होगा और इसमें घर और घर के सामान को हुए नुकसान के साथ-साथ मरम्मत का काम पूरा होने तक किराए का खर्च भी शामिल होगा। 500 करोड़ रुपये के पैरामीट्रिक बीमा कवर के लिए सालाना 15 करोड़ से 40 करोड़ रुपये का प्रीमियम लगने की उम्मीद है, जबकि 32.3 लाख BPL परिवारों को प्रति परिवार 250 रुपये के प्रीमियम पर कवर किया जाएगा, जिसका सालाना खर्च 80.75 करोड़ रुपये होगा। दोनों बीमा योजनाओं पर कुल सालाना खर्च 120.75 करोड़ रुपये होने का अनुमान है।
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