
x
Thiruvananthapuram थिरुवनंतपुरम। केरल में अमीबिक मेनिंजोएन्सेफलाइटिस (Amoebic Meningoencephalitis) यानी ब्रेन-ईटिंग अमीबा संक्रमण के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। राज्य की स्वास्थ्य मंत्री वीणा जॉर्ज ने बुधवार को स्थिति पर अपडेट देते हुए बताया कि अब तक कुल 136 मरीज इस संक्रमण से ग्रस्त पाए गए हैं, जिनमें से 28 लोगों की मौत हो चुकी है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में करीब 50 मरीज विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं, जहां उन्हें विशेष निगरानी और इलाज दिया जा रहा है।
वीणा जॉर्ज ने कहा, “आज सुबह एक नया मामला रिपोर्ट हुआ है, और ऐसा लगता है कि मरीज किसी अन्य राज्य की है। कुल 136 मामलों में से पांच अन्य राज्यों से आए मरीज हैं। सभी मरीजों को उच्चतम स्तर की चिकित्सा दी जा रही है। उपचार प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन किया जा रहा है, जिसकी वजह से हम कई जिंदगियां बचाने में सफल रहे हैं। उन्होंने बताया कि थिरुवनंतपुरम मेडिकल कॉलेज और कोझिकोड मेडिकल कॉलेज में इस संक्रमण को लेकर विस्तृत अध्ययन चल रहा है। डॉक्टरों की टीमें संक्रमण के स्रोत, प्रसार और उपचार की प्रभावशीलता पर काम कर रही हैं। स्वास्थ्य विभाग ने राज्य के सभी जिलों में सतर्कता बढ़ा दी है और जिला चिकित्सा अधिकारियों को त्वरित रिपोर्टिंग के निर्देश दिए हैं।
संक्रमण के कारण और लक्षण
अमीबिक मेनिंजोएन्सेफलाइटिस एक दुर्लभ लेकिन घातक संक्रमण है, जो नेगलेरिया फाउलेरी (Naegleria fowleri) नामक एक सूक्ष्म अमीबा से होता है। यह प्रायः गर्म और स्थिर मीठे पानी में पनपता है। जब कोई व्यक्ति ऐसे पानी में तैराकी करता है या स्नान करता है, तो यह अमीबा नाक के रास्ते मस्तिष्क तक पहुंचकर संक्रमण फैलाता है। संक्रमण के शुरुआती लक्षणों में तेज़ बुखार, सिरदर्द, उल्टी, भ्रम और गर्दन में जकड़न शामिल हैं। अगर समय पर इलाज न मिले तो यह कुछ ही दिनों में जानलेवा साबित हो सकता है।
स्वास्थ्य विभाग का अलर्ट
राज्य सरकार ने सभी जिलों में स्वच्छ जलाशयों की जांच, स्विमिंग पूल की सफाई, और स्नान स्थलों पर चेतावनी बोर्ड लगाने के निर्देश दिए हैं। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि "हमारा लक्ष्य संक्रमण की श्रृंखला तोड़ना और लोगों को जागरूक करना है। जो लोग झील, तालाब या खुले जल स्रोतों में नहाते हैं, उन्हें सावधानी बरतनी चाहिए।"
उन्होंने बताया कि सरकार ने अस्पतालों में इलाज के लिए विशेष दवाएं और उपकरणों की आपूर्ति बढ़ाई है। मेडिकल कॉलेजों में इस बीमारी पर रीयल-टाइम डेटा मॉनिटरिंग सिस्टम शुरू किया गया है ताकि नए मामलों की तुरंत पहचान और उपचार किया जा सके।
विशेषज्ञों की राय
कोझिकोड मेडिकल कॉलेज के न्यूरो विभाग के एक वरिष्ठ डॉक्टर ने बताया कि संक्रमण अत्यंत तेजी से फैलता है और इसके इलाज में देरी से मृत्यु दर बढ़ जाती है। उन्होंने कहा, “केरल में यह संक्रमण मुख्यतः मानसून के बाद के महीनों में अधिक देखा जाता है जब पानी गर्म और स्थिर रहता है। लोगों को तालाब या झील में सिर डुबोकर नहाने से बचना चाहिए।”
सरकार की अपील
वीणा जॉर्ज ने जनता से अपील की कि किसी भी तरह के सिरदर्द या तेज बुखार को नजरअंदाज न करें, खासकर यदि हाल ही में किसी खुले जल स्रोत में स्नान किया हो। उन्होंने कहा, “अस्पतालों में विशेष वार्ड बनाए गए हैं और हर नए केस की समीक्षा राज्य स्तर पर की जा रही है। राज्य सरकार ने अब अमीबिक संक्रमण को “पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी” की श्रेणी में रखा है, ताकि संसाधनों और मेडिकल सहायता की त्वरित उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।
Tagsकेरल अमीबिक मेनिंजोएन्सेफलाइटिसवीणा जॉर्ज बयानथिरुवनंतपुरम मेडिकल कॉलेजकोझिकोड मेडिकल कॉलेजकेरल स्वास्थ्य विभागमस्तिष्क संक्रमणदुर्लभ अमीबा संक्रमण28 मौतेंनाक के रास्ते संक्रमणनेगलेरिया फाउलेरी केसकेरल हेल्थ अलर्टKerala amoebic meningoencephalitisVeena George statementThiruvananthapuram Medical CollegeKozhikode Medical CollegeKerala Health Departmentbrain infectionrare amoeba infection28 deathsnasal tract infectionNaegleria fowleri casesKerala health alertजनता से रिश्ता न्यूज़जनता से रिश्ताआज की ताजा न्यूज़हिंन्दी न्यूज़भारत न्यूज़खबरों का सिलसिलाआज की ब्रेंकिग न्यूज़आज की बड़ी खबरमिड डे अख़बारहिंन्दी समाचारजनताJanta Se Rishta NewsJanta Se RishtaToday's Latest NewsHindi NewsIndia NewsKhabron Ka SilsilaToday's Breaking NewsToday's Big NewsMid Day Newspaperjantasamachar newssamacharHindi news
Next Story





