
थिरुवल्ला। थमायाझम गांव में भूस्खलन की घटना ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। करीब 30 दिन पुरानी धान की फसल वाले खेतों में जमीन धंसने से लगभग 190 एकड़ कृषि भूमि प्रभावित हुई है। किसानों के अनुसार, इस घटना से उन्हें 20 लाख रुपये से अधिक का आर्थिक नुकसान हुआ है। खेतों में खड़ी धान की फसल के बर्बाद होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है और उन्होंने सरकार से तत्काल राहत और मुआवजे की मांग की है।
घटना की जानकारी मिलने के बाद मडावीना पदाशेखरम के विधायक के. बिनिमोन ने प्रभावित इलाके का दौरा किया। उन्होंने खेतों में जाकर स्थिति का जायजा लिया और किसानों से नुकसान की जानकारी ली। विधायक ने किसानों को भरोसा दिलाया कि सरकार मामले में हस्तक्षेप करेगी और उनकी समस्याओं का समाधान निकालने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
190 एकड़ खेत प्रभावित
थमायाझम में जिन खेतों में धान की फसल लगाई गई थी, वहां अचानक जमीन धंसने और भूस्खलन की स्थिति पैदा हुई। इससे बड़े क्षेत्र में धान के खेत प्रभावित हो गए। करीब 30 दिन पहले लगाई गई फसल अभी शुरुआती विकास के चरण में थी। ऐसे समय में खेतों के प्रभावित होने से किसानों को दोहरा नुकसान उठाना पड़ा है।
किसानों ने बताया कि लगभग 190 एकड़ क्षेत्र में लगी धान की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है। खेतों में मिट्टी और मलबा जमा होने के साथ जमीन की संरचना भी प्रभावित हुई है। इससे न केवल मौजूदा फसल नष्ट हुई है, बल्कि प्रभावित जमीन पर दोबारा खेती करना भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
20 लाख रुपये से अधिक नुकसान का दावा
प्रभावित किसानों का कहना है कि उन्हें कुल 20 लाख रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। धान की खेती के लिए किसानों ने बीज, खाद, मजदूरी और अन्य कृषि कार्यों पर खर्च किया था। फसल बर्बाद होने के बाद यह पूरी लागत भी किसानों के लिए आर्थिक बोझ बन गई है।
किसानों के मुताबिक, धान की फसल से उन्हें आने वाले समय में आय की उम्मीद थी। लेकिन जमीन धंसने की घटना के कारण उनकी पूरी फसल बर्बाद हो गई। इससे परिवारों की आर्थिक योजनाएं भी प्रभावित होने की आशंका है।
विधायक ने किया प्रभावित क्षेत्र का दौरा
घटना के बाद मडावीना पदाशेखरम के विधायक के. बिनिमोन मौके पर पहुंचे। उन्होंने प्रभावित खेतों का निरीक्षण किया और किसानों से बातचीत कर उनकी समस्याओं को समझा। विधायक ने नुकसान की स्थिति का जायजा लेने के साथ किसानों को हरसंभव सहायता का भरोसा दिलाया।
विधायक ने कहा कि सरकार इस मामले में हस्तक्षेप करेगी और किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने प्रभावित क्षेत्र की स्थिति और किसानों के नुकसान की जानकारी संबंधित स्तर पर पहुंचाने का आश्वासन भी दिया।
किसानों को राहत की उम्मीद
फसल बर्बाद होने के बाद किसानों की सबसे बड़ी उम्मीद सरकारी सहायता और मुआवजे पर टिकी है। किसानों का कहना है कि अचानक आई प्राकृतिक आपदा जैसी स्थिति के कारण उन्हें भारी नुकसान हुआ है। ऐसे में प्रशासन को नुकसान का जल्द सर्वे कराकर राहत उपलब्ध करानी चाहिए।
किसानों का यह भी कहना है कि प्रभावित खेतों की स्थिति को देखते हुए केवल फसल नुकसान का मुआवजा पर्याप्त नहीं होगा। यदि जमीन की संरचना भी खराब हुई है तो उसे खेती योग्य बनाने के लिए अतिरिक्त सहायता की जरूरत पड़ सकती है।
पदाशेखरम समिति के पदाधिकारी रहे मौजूद
विधायक के दौरे के दौरान पदाशेखरम समिति के कई पदाधिकारी और स्थानीय लोग भी मौजूद रहे। इनमें शाजी एस्थप्पन, पी. सुरेंद्रन, पी.वी. थंकाचन पौवथिल, रोजान पैटरिल और विनोद मडावना सहित अन्य लोग शामिल थे।
पदाशेखरम समिति से जुड़े पदाधिकारियों ने भी प्रभावित किसानों की स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने इलाके में हुए नुकसान का आकलन करने और किसानों को जल्द राहत उपलब्ध कराने की जरूरत बताई।
खेतों की स्थिति से बढ़ी चिंता
थमायाझम में जमीन धंसने से खेतों की स्थिति काफी खराब हो गई है। किसानों के अनुसार, जिस समय फसल को बढ़ने के लिए सबसे अधिक देखभाल की जरूरत थी, उसी दौरान जमीन धंसने की घटना ने पूरी मेहनत को खत्म कर दिया।
30 दिन पुरानी धान की फसल को बचाने के लिए किसानों ने अब तक काफी मेहनत और खर्च किया था। खेतों के बड़े हिस्से के प्रभावित होने से किसानों को अगली फसल की तैयारी को लेकर भी चिंता हो रही है।
नुकसान के विस्तृत आकलन की जरूरत
किसानों का कहना है कि प्रभावित क्षेत्र में नुकसान का विस्तृत सर्वे कराया जाना चाहिए। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि कितने किसानों की कितनी भूमि और कितनी फसल प्रभावित हुई है। सर्वे के आधार पर ही वास्तविक आर्थिक नुकसान का आंकड़ा सामने आ सकेगा।
प्रारंभिक तौर पर किसानों ने 190 एकड़ क्षेत्र के पूरी तरह प्रभावित होने और 20 लाख रुपये से अधिक के नुकसान का दावा किया है। प्रशासनिक स्तर पर विस्तृत आकलन के बाद नुकसान की वास्तविक स्थिति सामने आने की उम्मीद है।
सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग
किसानों ने सरकार से मांग की है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द राहत प्रदान की जाए। उनका कहना है कि खेती पर निर्भर परिवारों के लिए फसल का नुकसान बहुत बड़ा आर्थिक झटका है। समय पर सहायता नहीं मिली तो आने वाले दिनों में उनकी मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
विधायक के. बिनिमोन ने सरकार की ओर से हस्तक्षेप का भरोसा दिलाया है। अब किसानों को उम्मीद है कि संबंधित विभाग जल्द प्रभावित क्षेत्र का सर्वे कराएंगे और नुकसान के आधार पर सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू होगी।
थमायाझम में भूस्खलन के कारण धान के खेतों को हुआ नुकसान किसानों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है। 190 एकड़ क्षेत्र में फसल बर्बाद होने और 20 लाख रुपये से अधिक के नुकसान के दावे के बीच अब किसानों की नजर सरकारी राहत पर है। विधायक के दौरे के बाद उन्हें उम्मीद है कि उनकी समस्या प्रशासन और सरकार के स्तर पर प्राथमिकता से उठाई जाएगी और प्रभावित परिवारों को जल्द आर्थिक सहायता मिल सकेगी।





