केरल

चल नहीं पा रहा 18 महीने का हाथी, इलाज के लिए भेजा जाएगा वनतारा

Kavita2
6 Nov 2026 12:25 PM IST
चल नहीं पा रहा 18 महीने का हाथी, इलाज के लिए भेजा जाएगा वनतारा
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कोच्चि। केरल में गंभीर आनुवंशिक बीमारी से जूझ रहे 18 महीने के हाथी के बच्चे को नई जिंदगी देने की कोशिश शुरू हो गई है। हड्डियों से जुड़ी बीमारी के कारण यह नन्हा हाथी अपने पैरों पर खड़ा होने और चलने में असमर्थ है। उसकी बिगड़ती हालत को देखते हुए केरल वन विभाग ने उसे बेहतर इलाज के लिए गुजरात के जामनगर स्थित वनतारा वन्यजीव बचाव एवं पुनर्वास केंद्र भेजने का फैसला किया है। शुक्रवार, 6 नवंबर को हाथी के बच्चे को विशेष विमान से जामनगर ले जाने की व्यवस्था की गई। इस दौरान पशु चिकित्सकों और वन विभाग के अधिकारियों की निगरानी में उसके सुरक्षित परिवहन की तैयारियां की गईं।

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, हाथी के बच्चे का वजन लगभग 125 से 130 किलोग्राम है। बीमारी के कारण वह खुद से उठ नहीं पा रहा है। ऐसी स्थिति में उसे एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाना भी चुनौतीपूर्ण बन गया है। शुक्रवार को कोडानाड हाथी केंद्र से उसे विशेष पशु एम्बुलेंस में स्थानांतरित करने के लिए करीब 10 से 12 लोगों की मदद लेनी पड़ी।

हाथी के बच्चे को सावधानीपूर्वक उठाने के लिए क्रेन का इस्तेमाल किया गया। कर्मचारियों ने यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि स्थानांतरण के दौरान उसे अतिरिक्त चोट न पहुंचे। इसके बाद उसे जानवरों के परिवहन के लिए तैयार की गई विशेष एम्बुलेंस में रखा गया।

एम्बुलेंस के जरिए हाथी के बच्चे को कोच्चि के नेदुंबसेरी हवाई अड्डे ले जाया गया। यहां से चार्टर्ड विमान द्वारा गुजरात के जामनगर भेजने की योजना बनाई गई। वन विभाग के अनुसार, यात्रा के दौरान पशु चिकित्सा विशेषज्ञ भी उसके साथ रहेंगे, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता दी जा सके।

केरल के मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक पी. पुगाझेंडी ने बताया कि हाथी के बच्चे को जन्म के कुछ समय बाद ही कोडानाड हाथी केंद्र लाया गया था। यहां उसकी देखभाल और उपचार किया जा रहा था। अधिकारियों को उसकी बीमारी की गंभीरता का पता उस समय चला, जब वह एक बार गिर पड़ा।

इसके बाद चिकित्सकीय परीक्षण में सामने आया कि हाथी का बच्चा हड्डियों से संबंधित आनुवंशिक समस्या से पीड़ित है। इस बीमारी ने उसके शरीर की सामान्य गतिविधियों को प्रभावित किया है। उसकी वर्तमान स्थिति ऐसी है कि वह बिना सहायता के खड़ा भी नहीं हो पा रहा है।

हाथियों के लिए पैरों और हड्डियों का मजबूत होना बेहद जरूरी होता है, क्योंकि उनके शरीर का वजन पैरों पर ही निर्भर करता है। ऐसे में हड्डियों की गंभीर कमजोरी या संरचनात्मक समस्या उनके चलने-फिरने और सामान्य जीवन को प्रभावित कर सकती है।

इस हाथी के बच्चे की स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती उसकी गतिशीलता वापस लाने की है। अधिकारियों को उम्मीद है कि विशेष उपचार और लंबे पुनर्वास कार्यक्रम से उसकी हालत में सुधार हो सकता है।

स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, हाथी का बच्चा गिरने के बाद कंधे की गंभीर चोट और हड्डियों की कमजोरी से भी जूझ रहा है। उसके उपचार के लिए विशेषज्ञों से सलाह ली गई थी। स्थिति गंभीर होने के कारण स्वास्थ्य निगरानी समिति ने पहले इच्छामृत्यु की सिफारिश भी की थी। हालांकि, बाद में वनतारा में विशेष इलाज की संभावना सामने आने के बाद उसे वहां भेजने का निर्णय लिया गया।

यह फैसला हाथी के बच्चे के जीवन को बचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है। वन विभाग और पशु चिकित्सा विशेषज्ञ अब इस उम्मीद के साथ आगे बढ़ रहे हैं कि उन्नत चिकित्सा सुविधाओं की मदद से उसकी स्थिति बेहतर हो सकेगी।

गुजरात के जामनगर में स्थित वनतारा वन्यजीव बचाव, उपचार और पुनर्वास से जुड़ा केंद्र है। यहां विभिन्न प्रजातियों के जानवरों की चिकित्सकीय देखभाल और पुनर्वास की व्यवस्था की जाती है। हाथियों सहित बड़े वन्यजीवों के उपचार के लिए विशेष संसाधनों का उपयोग किया जाता है।

हाथी के बच्चे को वहां भेजने के पीछे मुख्य उद्देश्य उसे ऐसी चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है, जो उसकी गंभीर शारीरिक समस्या के उपचार में सहायक हो सके। उसके लिए नियमित स्वास्थ्य निगरानी, आवश्यक चिकित्सकीय परीक्षण और पुनर्वास कार्यक्रम महत्वपूर्ण होंगे।

रिपोर्टों के मुताबिक, वनतारा में हाथी के बच्चे के लिए लगभग छह महीने के पुनर्वास कार्यक्रम की संभावना जताई गई है। हालांकि, इलाज की वास्तविक अवधि उसकी स्वास्थ्य स्थिति और उपचार के प्रति प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगी।

वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि आनुवंशिक समस्या होने के कारण बीमारी को पूरी तरह ठीक कर पाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसके बावजूद कोशिश यही रहेगी कि हाथी का बच्चा कम से कम अपने पैरों पर खड़ा होने और चलने की स्थिति में आ सके।

इस पूरे अभियान में हाथी के बच्चे का सुरक्षित परिवहन भी बेहद अहम है। लंबे समय से चलने-फिरने में असमर्थ जानवर को सड़क और हवाई मार्ग से ले जाते समय विशेष सावधानी बरतनी पड़ती है। उसके शरीर की स्थिति, आराम और स्वास्थ्य की लगातार निगरानी आवश्यक होती है।

इसी वजह से वन विभाग ने साधारण परिवहन व्यवस्था के बजाय पशु एम्बुलेंस और चार्टर्ड विमान का विकल्प चुना। विशेषज्ञों की मौजूदगी से यात्रा के दौरान उसकी जरूरतों का ध्यान रखने में सहायता मिलेगी।

हाथी के बच्चे के गुजरात पहुंचने के बाद विशेषज्ञ चिकित्सक उसकी स्वास्थ्य स्थिति का विस्तृत मूल्यांकन कर आगे के उपचार की योजना तैयार कर सकेंगे। उसके ठीक होने की संभावनाओं का आकलन भी इलाज के दौरान होने वाली प्रगति के आधार पर किया जाएगा।

वन्यजीव संरक्षण के दृष्टिकोण से भी यह मामला महत्वपूर्ण है। यह दर्शाता है कि गंभीर रूप से बीमार या घायल वन्यजीवों की देखभाल में विशेषज्ञ चिकित्सा, पुनर्वास और विभिन्न संस्थानों के बीच सहयोग की कितनी अहम भूमिका होती है।

फिलहाल केरल वन विभाग की प्राथमिकता हाथी के बच्चे को सुरक्षित तरीके से वनतारा पहुंचाना और उसे बेहतर इलाज उपलब्ध कराना है। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, यदि इलाज के बाद उसकी हालत में पर्याप्त सुधार होता है तो उसे वापस केरल लाने की संभावना पर विचार किया जा सकता है।

अब सभी की निगाहें इस नन्हे हाथी के उपचार पर टिकी हैं। जन्मजात बीमारी और चोट के कारण कठिन परिस्थितियों से गुजर रहे इस हाथी के बच्चे के लिए वनतारा में प्रस्तावित इलाज एक नई उम्मीद बनकर सामने आया है। आने वाले महीनों में उसकी स्वास्थ्य स्थिति ही तय करेगी कि वह दोबारा अपने पैरों पर खड़ा हो सकेगा या नहीं।

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